न्यूज हेडलाइन टॉप न्यूज छत्तीसगढ़ ब्यूरोक्रेट वेब स्टोरी/शॉर्टस क्राइम शिक्षक/कर्मचारी देश/राज्य मौसम मनोरंजन खेल/खिलाड़ी राशिफल/धर्म सेहत ऑटोमोबाइल/मोबाइल बिजनेस नौकरी/सरकारी योजनाएं

---Advertisement---

Highcourt से लेडी तहसीलदार को राहत: पहले विभागीय जांच पर रोक, अब निलंबन पर भी हाईकोर्ट ने लगाया ब्रेक

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कांकेर तहसीलदार माया अंचल लहरे के निलंबन आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने राजस्व विभाग समेत संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

September 12, 2026 4:54 AM
हाईकोर्ट की फाइल फोटो
---Advertisement---11

Highcourt News। कांकेर जिले में तहसीलदार के पद पर पदस्थ माया अंचल लहरे के निलंबन आदेश पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने निलंबन आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

मामला रायगढ़ जिले के पुसौर तहसील में माया अंचल लहरे की पदस्थापना के दौरान वर्ष 2020 में पारित एक राजस्व आदेश से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, 28 अक्टूबर 2020 को तत्कालीन तहसीलदार माया अंचल लहरे ने ग्राम पुसौर स्थित खसरा नंबर 16/2ख की भूमि, जो राजस्व अभिलेखों में शासकीय छोटे झाड़ के जंगल मद में दर्ज थी, के संबंध में अभिलेख सुधार का आदेश पारित किया था। इस आदेश के खिलाफ छत्तीसगढ़ राजस्व मंडल, बिलासपुर के समक्ष पुनरीक्षण आवेदन प्रस्तुत किया गया था।

राजस्व मंडल ने मामले की सुनवाई के बाद 21 अगस्त 2025 को अपने आदेश में बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के शासकीय मद में दर्ज भूमि का मद परिवर्तन किए जाने को गंभीरता से लेते हुए संबंधित तहसीलदार और हल्का पटवारी के खिलाफ प्रशासनिक एवं विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की थी। राजस्व मंडल की ओर से मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन को भी आदेश की प्रति भेजी गई थी।

राजस्व मंडल के आदेश को हाईकोर्ट में दी थी चुनौती

राजस्व मंडल के इस आदेश से असंतुष्ट होकर माया अंचल लहरे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले में हाईकोर्ट ने 17 फरवरी 2026 को अंतरिम राहत देते हुए राजस्व मंडल के 21 अगस्त 2025 के आदेश के उस हिस्से पर रोक लगा दी थी, जिसमें उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का निर्देश दिया गया था। यह अंतरिम आदेश वर्तमान में भी प्रभावी बताया गया है और संबंधित रिट याचिका हाईकोर्ट में लंबित है।

इसी मामले में जुलाई 2026 में किया गया था निलंबित

इसी दौरान छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अवर सचिव ने 16 जुलाई 2026 को माया अंचल लहरे को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। उस समय वे कांकेर जिले में तहसीलदार के पद पर पदस्थ थीं।

निलंबन आदेश के खिलाफ माया अंचल लहरे ने हाईकोर्ट में अधिवक्ता नरेंद्र मेहेर के माध्यम से याचिका दायर की। 10 सितंबर 2026 को न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की अदालत में मामले की सुनवाई हुई।

अधिवक्ता ने अंतरिम आदेश के उल्लंघन का उठाया मुद्दा

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने दलील दी कि निलंबन आदेश उन्हीं तथ्यों और आरोपों के आधार पर जारी किया गया है, जिनके संबंध में राजस्व मंडल ने विभागीय जांच शुरू करने का निर्देश दिया था। उन्होंने न्यायालय को बताया कि राजस्व मंडल के उक्त आदेश को पहले ही WPS No. 1785/2026 के माध्यम से चुनौती दी जा चुकी है और हाईकोर्ट ने 17 फरवरी 2026 को विभागीय जांच शुरू करने वाले हिस्से पर रोक लगा दी थी।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि जब हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश प्रभावी था, उसी दौरान उन्हीं आरोपों और तथ्यों के आधार पर 16 जुलाई 2026 को निलंबन आदेश जारी किया गया। इसे याचिकाकर्ता ने न्यायालय के अंतरिम आदेश के विपरीत बताते हुए राहत की मांग की।

निलंबन आदेश पर रोक, अधिकारियों से जवाब तलब

दलीलों पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने तहसीलदार माया अंचल लहरे के निलंबन आदेश पर रोक लगा दी। साथ ही न्यायालय ने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव व अवर सचिव, राजस्व मंडल बिलासपुर, आयुक्त बिलासपुर, कलेक्टर रायगढ़, कलेक्टर कांकेर तथा संबंधित अनुविभागीय अधिकारी सहित उत्तरवादी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

मामले में आगे की सुनवाई के दौरान शासन और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब के बाद न्यायालय इस विवाद पर आगे विचार करेगा।

 

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related Stories

Leave a Comment