बिलासपुर। शिक्षिका के रिटायरमेंट का विवाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में एक कर्मचारी की जन्मतिथि में सिर्फ एक साल के अंतर ने उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख पर सवाल खड़ा कर दिया है। शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड में याचिकाकर्ता सुहासिनी पत्तलवार की जन्मतिथि 28 दिसंबर 1957 दर्ज है। इसी के आधार पर विभाग ने उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख 30 दिसंबर 2019 तय की थी।हालांकि याचिकाकर्ता का कहना है कि उनकी सही जन्मतिथि 28 दिसंबर 1958 है।
यानी उनका दावा सही माना जाए तो विभाग ने उनकी जन्मतिथि एक साल पहले दर्ज की और इसी वजह से उनकी सेवानिवृत्ति भी एक साल पहले निर्धारित हो गई।अब मामला हाई कोर्ट में है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड की जांच के बाद कहा कि 1957 की जन्मतिथि दर्ज करने का आधार स्पष्ट नहीं है। कोर्ट ने राज्य सरकार को वह पूरा रिकॉर्ड पेश करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है, जिसके आधार पर जन्मतिथि 28 दिसंबर 1957 तय की गई।
पूरा विवाद आखिर है क्या?
दरअसल, विवाद किसी नई जन्मतिथि को लेकर नहीं, बल्कि 1957 और 1958 में से सही वर्ष कौन-सा है, इसे लेकर है।
• शिक्षा विभाग का रिकॉर्ड: 28 दिसंबर 1957
• विभाग के अनुसार सेवानिवृत्ति: 30 दिसंबर 2019
• याचिकाकर्ता का दावा: 28 दिसंबर 1958
• मुख्य विवाद: विभाग ने 1957 को किस आधार पर सही माना?
यही सवाल अब हाई कोर्ट ने शिक्षा विभाग के सामने रखा है।
विभाग ने हाई स्कूल प्रमाणपत्र का दिया आधार
मामले की सुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग की ओर से दस्तावेज पेश किए गए। इनमें उच्चतर माध्यमिक विद्यालय प्रमाणपत्र परीक्षा के आधार पर याचिकाकर्ता की जन्मतिथि 28 दिसंबर 1957 बताई गई है।विभाग ने इसी जन्मतिथि को आधार बनाकर सेवानिवृत्ति की तारीख 30 दिसंबर 2019 निर्धारित की।
लेकिन हाई कोर्ट ने दस्तावेज देखने के बाद पाया कि रिकॉर्ड में 1957 दर्ज होने की बात तो है, लेकिन विभाग इस निष्कर्ष तक किस आधार पर पहुंचा, यह पर्याप्त रूप से स्पष्ट नहीं है।कोर्ट ने इसी बिंदु पर राज्य से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं।
याचिकाकर्ता बोलीं- जन्मतिथि 1958 है
याचिकाकर्ता सुहासिनी पत्तलवार की ओर से अधिवक्ता चक्रेश तिवारी ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा कि उनकी वास्तविक जन्मतिथि 28 दिसंबर 1958 है।यदि यह जन्मतिथि सही पाई जाती है तो विभाग द्वारा 28 दिसंबर 1957 को जन्मतिथि मानकर तय की गई सेवानिवृत्ति तारीख पर भी सवाल खड़ा होता है।यानी इस मामले में एक साल का अंतर महज रिकॉर्ड की गलती नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध याचिकाकर्ता की सेवा अवधि और रिटायरमेंट से है।
पहले के आदेश के बाद भी सवाल बरकरार
इस मामले में हाई कोर्ट ने 28 जुलाई 2026 को पहले आदेश जारी किया था। इसके अनुपालन में संयुक्त संचालक, शिक्षा, रायपुर की ओर से शपथपत्र पेश किया गया।शपथपत्र में विभाग ने बताया कि जन्मतिथि से संबंधित विवाद को 21 अगस्त 2026 के दस्तावेज, एनेक्सचर ए-1, के माध्यम से सुलझा लिया गया है।हालांकि कोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद पाया कि जन्मतिथि 1957 निर्धारित करने के निष्कर्ष का आधार अभी स्पष्ट नहीं है।
अब विभाग को देना होगा पूरा रिकॉर्ड
राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता पूर्वा तिवारी ने संबंधित दस्तावेज पेश करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा। हाई कोर्ट ने यह समय मंजूर करते हुए राज्य को निर्देश दिया कि वह वे सभी दस्तावेज रिकॉर्ड पर लाए, जिनके आधार पर सुहासिनी पत्तलवार की जन्मतिथि 28 दिसंबर 1957 निर्धारित की गई।मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर 2026 को होगी।
फिलहाल हाई कोर्ट ने यह फैसला नहीं दिया है कि याचिकाकर्ता की जन्मतिथि 1957 है या 1958। अगली सुनवाई में शिक्षा विभाग की ओर से पेश किए जाने वाले दस्तावेजों से यह स्पष्ट होगा कि 1957 को जन्मतिथि मानने का ठोस आधार क्या है।










