बिलासपुर। शिक्षा विभाग में प्रमोशन-पोस्टिंग मामले में कई बार गड़बड़ियां उजागर हुई है। सस्पेंशन से लेकर विभागीय कार्रवाई तक हुई, बावजूद जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी अपनी करतूतों से बाज नहीं आ रहे हैं। नया मामला बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से उजागर हुआ है, जहां प्रमोशन के बाद हुई पोस्टिंग में जमकर मनमानी की शिकायत पर बैठी जांच के बाद डीपीआई ने कड़ा एक्शन लिया है। जांच रिपोर्ट में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में कर्मचारियों की पदोन्नति और पदस्थापना से जुड़े मामलों में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
संभागीय संयुक्त संचालक की जांच रिपोर्ट में वरिष्ठता सूची से लेकर रिक्त पदों पर पदस्थापना और वेतन आहरण तक नियमों की अनदेखी किए जाने का उल्लेख है।जांच रिपोर्ट के आधार पर लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने जिला शिक्षा अधिकारी को संबंधित सहायक ग्रेड-3 लिपिक सुनील कुमार यादव के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। विभाग को 15 दिनों के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर पालन प्रतिवेदन भेजने को कहा गया है।
अंतरिम वरिष्ठता सूची के आधार पर हुई पदोन्नति
जांच में सबसे अहम आपत्ति पदोन्नति के लिए इस्तेमाल की गई वरिष्ठता सूची को लेकर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक 1 अगस्त 2022 की अंतरिम वरिष्ठता सूची को आधार बनाकर पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।जांच में इस सूची के आधार पर की गई पदोन्नति की वैधानिकता पर सवाल उठाए गए हैं। यानी पदोन्नति के लिए जिस आधार का इस्तेमाल किया गया, वही जांच के दायरे में आ गया।
28 पदों में 27 पर पदोन्नति, फिर नियमों पर सवाल
जांच के अनुसार उस समय 28 रिक्त पदों के विरुद्ध 27 कर्मचारियों को पदोन्नति दी गई। इसके बाद कुछ कर्मचारियों द्वारा पदोन्नति के बाद कार्यभार ग्रहण नहीं किए जाने की स्थिति में भी प्रक्रिया रोकने के बजाय 15 अन्य लिपिकों को पदोन्नति देने का आदेश जारी किया गया।जांच में इस पूरी प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप नहीं पाया गया।
रिक्त पद छोड़कर पसंद की संस्थाओं में पदस्थापना
मामले में पदोन्नति के बाद पदस्थापना को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। जांच रिपोर्ट के मुताबिक जिन संस्थाओं में पद रिक्त थे, वहां कर्मचारियों की पदस्थापना करने के बजाय उनकी इच्छा अथवा पसंद के अनुसार दूसरी संस्थाओं में पदस्थापना की गई।इतना ही नहीं, बाद में ऐसे स्थानों से भी संशोधन आदेश जारी किए गए, जहां पद उपलब्ध नहीं थे। इससे पदोन्नति के बाद पदस्थापना की पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई।
बिना रिक्ति पदों के पदस्थापना और दूसरे संस्थानों से वेतन
जांच में छह कर्मचारियों को ऐसी संस्थाओं में पदस्थ किए जाने का भी उल्लेख है, जहां संबंधित पद रिक्त नहीं थे। इसके बाद इन कर्मचारियों का वेतन अन्य पांच संस्थाओं से आहरित किए जाने का आदेश जारी किया गया।विभागीय जांच में इस व्यवस्था को वित्तीय नियमों के अनुरूप नहीं माना गया है। इससे न केवल पदस्थापना बल्कि वेतन आहरण की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हुए हैं।
दिव्यांगता के आधार पर पदोन्नति का मामला भी जांच में
जांच रिपोर्ट में सहायक ग्रेड-3 हितेश वैष्णव की पदोन्नति का मामला भी शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार उन्हें दिव्यांगता के आधार पर पदोन्नति दिए जाने का उल्लेख है, जबकि जांच में कहा गया कि संबंधित पदोन्नति प्रक्रिया में इस आधार पर आरक्षण का प्रावधान लागू नहीं था।इस बिंदु को भी विभाग ने नियमों के उल्लंघन से जोड़कर देखा है।
108 रिक्त पदों की सूची को दरकिनार करने का आरोप
मामले में 108 रिक्त पदों की मूल सूची को लेकर भी अनियमितता सामने आई है। जांच के अनुसार मूल रिक्तियों के आधार पर पदस्थापना करने के बजाय अलग-अलग संस्थाओं में कर्मचारियों की पदस्थापना और वेतन आहरण की व्यवस्था की गई।जांच रिपोर्ट में इसे विभागीय और वित्तीय व्यवस्था के लिए गंभीर समस्या माना गया है।
एक लिपिक के आदेशों पर उठे बड़े सवाल
मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि सहायक ग्रेड-3 स्तर के एक कर्मचारी के स्तर से इतने महत्वपूर्ण पदोन्नति, पदस्थापना, संशोधन और वेतन आहरण से जुड़े आदेश किस प्रक्रिया के तहत जारी हुए।डीपीआई की कार्रवाई के बाद विभागीय स्तर पर उस समय पदस्थ रहे सक्षम अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि अधिकारियों की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित विभागीय जांच के बाद ही सामने आएगा।
DPI ने 15 दिन में मांगी कार्रवाई रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए लोक शिक्षण संचालनालय ने जिला शिक्षा अधिकारी को संबंधित लिपिक के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।DPI ने कार्रवाई पूरी कर 15 दिनों के भीतर पालन प्रतिवेदन भेजने को कहा है। अब निगाह इस बात पर है कि विभागीय स्तर पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है और जांच में सामने आए अन्य पहलुओं पर आगे क्या कदम उठाया जाता है।जांच रिपोर्ट में पदोन्नति प्रक्रिया, पदस्थापना में संशोधन और वेतन आहरण से जुड़े मामलों में नियमों की अनदेखी का उल्लेख होने के बाद जिला शिक्षा विभाग में यह मामला गंभीर प्रशासनिक जांच का विषय बन गया है।










