बालोद। तीजा पर बहनों के मायके आने की परंपरा दशकों पुरानी है। छत्तीसगढ़ में तो तीजा को महापर्व से भी बढ़कर माना जाता है। इस दौरान बहनों को ना सिर्फ मायके में जमकर आदर-सम्मान मिलता है, बल्कि तोहफे भी मिलते हैं। वो तोहफा साड़ी भी हो सकता है, गहने भी हो सकते हैं या फिर पैसे के रूप में भी होता है, लेकिन बालोद में बहनों को जो कुछ इस बार तीजा पर मिला, वो ना सिर्फ चौकाने वाला था, बल्कि एक नयी सोच की तरफ भी इशारा करता था।
दरअसल तीजा पर पहुंचने वाली बेटियों के लिए मायका सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि अपनापन और सुरक्षा का एहसास भी होता है। बालोद जिले के टिकरी गांव में इस बार इसी भावना को एक अनोखे अंदाज में आगे बढ़ाया गया। यहां तीजा मनाने पहुंचीं करीब 1000 महिलाओं को ऐसा तोहफा मिला, जिसकी उन्हें पहले से कोई जानकारी नहीं थी।
गांव में आयोजित पीहर महोत्सव के दौरान महिलाओं का एक साल के लिए ₹1 लाख का बीमा कराया गया। खास बात यह रही कि आयोजन से पहले महिलाओं को सिर्फ आधार कार्ड की फोटो कॉपी लाने के लिए कहा गया था। उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि गांव में इस बार उनके लिए कुछ अलग तैयारी की गई है।
दस साल पहले शुरू हुई थी एक छोटी सी पहल
टिकरी गांव में तीजा के मौके पर होने वाला यह आयोजन कोई नया कार्यक्रम नहीं है। पूर्व सरपंच रितेश देवांगन ने वर्ष 2016 में पीहर महोत्सव की शुरुआत की थी।तब से हर साल तीजा पर गांव की बेटियां और बहनें मायके पहुंचती हैं और सामूहिक रूप से करू भात का आयोजन होता है। समय के साथ यह कार्यक्रम केवल भोजन तक सीमित नहीं रहा। महिलाओं के लिए खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम और मनोरंजन की गतिविधियां भी इसमें जुड़ती गईं।इसी पहल को रितेश देवांगन ने ‘मिशन अनमोल मुस्कान’ का नाम दिया।
इस बार महिलाओं को नहीं पता था कि क्या मिलने वाला है
इस बार भी पीहर महोत्सव की तैयारी शुरू हुई, लेकिन महिलाओं को मिलने वाले तोहफे की जानकारी जानबूझकर नहीं दी गई।कार्यक्रम की सूचना में महिलाओं से आधार कार्ड की फोटो कॉपी साथ लाने के लिए कहा गया था। जब वे आयोजन स्थल पर पहुंचीं, तब उन्हें पता चला कि उनके लिए बीमा की व्यवस्था की गई है।इसके बाद बीमा कंपनी के कर्मचारियों ने मौके पर ही आवश्यक प्रक्रिया पूरी की और करीब 1000 महिलाओं का ₹1 लाख का बीमा कराया गया।
तीजा के तोहफे का अंदाज बदला, इस बार यादगार बनी पहल
आमतौर पर त्योहारों में महिलाओं को कपड़े, श्रृंगार सामग्री या दूसरी उपयोगी चीजें उपहार में दी जाती हैं। टिकरी में इस बार सोच थोड़ी अलग रही।पूर्व सरपंच रितेश देवांगन और उनकी पत्नी तथा वर्तमान सरपंच ललिता देवांगन ने ऐसा तोहफा चुना, जिसका संबंध सीधे महिलाओं की सुरक्षा से है।यही वजह है कि पीहर महोत्सव का यह आयोजन गांव में चर्चा का विषय बन गया है।
करू भात के साथ उत्सव, खेल और संस्कृति भी
पीहर महोत्सव में तीजा पर मायके पहुंचने वाली महिलाओं के लिए सामूहिक करू भात कराया गया। इसके साथ खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए।इस आयोजन का मकसद गांव की बेटियों को एक साथ जोड़ना और तीजा के मौके पर उन्हें मायके में त्योहार मनाने का अवसर देना है।
‘मिशन अनमोल मुस्कान’ से जुड़ी है पूरी कहानी
रितेश देवांगन की ओर से करीब एक दशक से चलाया जा रहा ‘मिशन अनमोल मुस्कान’ गांव में अलग-अलग सामुदायिक आयोजनों के जरिए लोगों को जोड़ने की कोशिश करता है।तीजा के मौके पर होने वाला पीहर महोत्सव इसी मुहिम का हिस्सा है। 2016 से लगातार चल रहे इस आयोजन में हर साल कुछ नया जोड़ने की कोशिश की जाती है।इस बार वह नया कदम करीब 1000 महिलाओं के बीमा के रूप में सामने आया।
मायके आईं बेटियों के लिए यादगार बना तीजा
तीजा पर मायके आने वाली बेटियों के स्वागत की टिकरी की यह परंपरा अब एक सामूहिक उत्सव का रूप ले चुकी है। इस बार आयोजन में शामिल महिलाओं को पहले से बिना बताए बीमा का तोहफा देना कार्यक्रम की सबसे खास बात रही।त्योहार खत्म होने के बाद भी इस पहल की चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि तीजा के पारंपरिक ‘पीहर महोत्सव’ को इस बार एक नई सोच के साथ जोड़ा गया।










