IAS Chandan Tripathi। घर में रखे ऐसे खिलौने जिनका अब इस्तेमाल नहीं हो रहा, उन्हें फेंकने या कबाड़ में देने के बजाय किसी बच्चे की मुस्कान की वजह बनाया जा सकता है। बलरामपुर जिला प्रशासन ने जिले के लोगों से ऐसे ही सुरक्षित, स्वच्छ और उपयोगी खिलौने दान करने की अपील की है। ये खिलौने जिले के 2,371 आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले नन्हे बच्चों के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे। इसके लिए 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जाएगा। अभियान के तहत 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक ‘आंगन मिलन सेवा’ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें खिलौना दान को जनभागीदारी से जोड़ा गया है।
आखिर कलेक्टर ने खिलौने क्यों मांगे?
कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने जिलेवासियों से अपील की है कि घर में रखे ऐसे खिलौने, जिनका अब उपयोग नहीं हो रहा है लेकिन वे बच्चों के लिए सुरक्षित और उपयोगी हैं, उन्हें नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र में दान किया जा सकता है। जो लोग चाहें, वे अपनी इच्छा से नए खिलौने खरीदकर भी बच्चों को दे सकते हैं।
जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल बच्चों को खिलौने उपलब्ध कराना नहीं है। इसके जरिए आंगनबाड़ी केंद्रों को बच्चों के लिए खुशहाल, आकर्षक और सीखने के अनुकूल माहौल देना है।कलेक्टर ने कहा कि बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाने वाला छोटा-सा प्रयास भी महत्वपूर्ण है। इस पहल में आम नागरिकों के साथ जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, स्वयंसेवी संस्थाएं और व्यवसायिक प्रतिष्ठान भी शामिल हो सकते हैं।
2,371 आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों तक पहुंचेगा सहयोग
बलरामपुर जिले के सभी 2,371 आंगनबाड़ी केंद्रों को इस अभियान से जोड़ा गया है। 25 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच लोग अपने नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचकर खिलौने दान कर सकेंगे।यानी घर में पड़ा एक ऐसा खिलौना, जिसका आपके परिवार में अब कोई इस्तेमाल नहीं करता, किसी आंगनबाड़ी के बच्चे के लिए खेलने और सीखने का नया साधन बन सकता है।
आंगनबाड़ी में सिर्फ खेल नहीं, खेल के जरिए सीखेंगे बच्चे
आंगनबाड़ी केंद्र छोटे बच्चों के लिए शुरुआती सीखने की महत्वपूर्ण जगह हैं। खिलौनों के माध्यम से बच्चे सिर्फ मनोरंजन नहीं करते, बल्कि कल्पनाशक्ति, रचनात्मकता, भाषा, सामाजिक व्यवहार और समझने की क्षमता को भी विकसित करते हैं।खेल-खेल में बच्चे चीजों को पहचानना, उनके बारे में सवाल करना, दूसरों के साथ संवाद करना और अपनी कल्पना को व्यक्त करना सीखते हैं। इसलिए आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए बेहतर खेल सामग्री उपलब्ध होना उनकी शुरुआती सीखने की प्रक्रिया को और रोचक बना सकता है।
‘आंगन मिलन सेवा’ में ऐसे जुड़ सकते हैं लोग
जिला प्रशासन के अनुसार 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक चलने वाली ‘आंगन मिलन सेवा’ में नागरिक अपने स्तर पर योगदान कर सकते हैं।
• घर में रखे सुरक्षित और साफ पुराने खिलौने दान कर सकते हैं।
• अपनी इच्छा के अनुसार नए खिलौने खरीदकर दे सकते हैं।
• सामाजिक संगठन और स्वयंसेवी संस्थाएं भी अभियान में भाग ले सकती हैं।
• व्यवसायिक प्रतिष्ठान और जनप्रतिनिधि भी जनभागीदारी के इस अभियान से जुड़ सकते हैं।
प्रशासन की अपील है कि दान किए जाने वाले खिलौने बच्चों की उम्र के हिसाब से सुरक्षित और उपयोगी हों।
सेवा संकल्प अभियान से जुड़ेगा जनभागीदारी का संदेश
बलरामपुर में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाला ‘सेवा संकल्प अभियान’ सामाजिक सहभागिता पर केंद्रित है। इसी अभियान के तहत ‘आंगन मिलन सेवा’ के जरिए आंगनबाड़ी बच्चों के साथ समाज को सीधे जोड़ने की कोशिश की जा रही है।इस पहल का खास पहलू यह है कि इसमें मदद के लिए किसी बड़े आर्थिक योगदान की जरूरत नहीं है। घर में मौजूद उपयोगी खिलौना भी इस अभियान का हिस्सा बन सकता है।
जिला प्रशासन का मानना है कि बच्चों के बेहतर विकास की जिम्मेदारी केवल परिवार तक सीमित नहीं है। समाज की छोटी-छोटी पहल भी बच्चों के सीखने और उनके खुशहाल बचपन के लिए महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।










