रायपुर। प्लेटफॉर्म पर सब कुछ सामान्य था। ट्रेन के आने-जाने की आवाजें, यात्रियों की हलचल और अपनी ड्यूटी में व्यस्त रेलवे कर्मचारी। तभी एक छोटा बच्चा घबराया हुआ दौड़ते-दौड़ते स्टेशन मास्टर के पास पहुंचा।
उसकी आवाज में डर साफ झलक रहा था।
“अंकल-अंकल… मेरी मौसी ट्रेन के सामने कूदने वाली हैं।”
बस इतना सुनना था कि स्टेशन मास्टर आनंद उपाध्याय ने एक पल भी गंवाए बिना उस दिशा में दौड़ लगा दी। सामने जो दृश्य था, उसे देखकर उनके कदम और तेज हो गए। एक महिला रेलवे ट्रैक के बेहद करीब खड़ी थी और उसी समय सामने से तेज रफ्तार मालगाड़ी आ रही थी।
अगले कुछ सेकंड बेहद अहम थे…
बच्चे की सजगता और स्टेशन मास्टर की फुर्ती
घटना 6 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 12:38 बजे दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के उरकुरा स्टेशन की है।
स्टेशन मास्टर आनंद उपाध्याय ट्रेन के लिए सिग्नल का आदान-प्रदान करने प्लेटफॉर्म पर पहुंचे थे। इसी दौरान एक बच्चा घबराया हुआ उनके पास आया और अपनी मौसी के ट्रेन के सामने जाने की बात बताई।
बच्चे की बात को गंभीरता से लेते हुए उपाध्याय तुरंत ट्रैक की ओर दौड़े।
उन्होंने देखा कि महिला ट्रेन की चपेट में आने की स्थिति में पहुंच चुकी थी। दूसरी ओर मालगाड़ी तेजी से उसी दिशा में बढ़ रही थी।
समय बेहद कम था।
आनंद उपाध्याय ने पूरी ताकत और तत्परता के साथ महिला का हाथ पकड़ा और उसे ट्रैक से दूर खींच लिया।
महिला के सुरक्षित पीछे हटते ही कुछ ही सेकंड बाद मालगाड़ी तेज रफ्तार से वहां से गुजर गई।
एक पल की देरी और कहानी कुछ और हो सकती थी।
ट्रेन गुजर गई, लेकिन थम गई एक जिंदगी की सांस
महिला को सुरक्षित ट्रैक से हटाने के बाद स्टेशन मास्टर ने राहत की सांस ली। उन्होंने महिला और दोनों बच्चों को संभाला, उन्हें पानी पिलाया और तत्काल रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को घटना की जानकारी दी।
आरपीएफ की टीम मौके पर पहुंची और महिला की काउंसलिंग की। कुछ देर बाद महिला की मां भी स्टेशन पहुंचीं और अपनी बेटी को सुरक्षित अपने साथ घर ले गईं।
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स तरह एक बच्चे की सजग नजर और एक रेलवे कर्मचारी की त्वरित कार्रवाई ने एक संभावित दर्दनाक हादसे को टाल दिया।
‘मौसी को बचाना है’… बच्चे की बात ने बदल दिया पूरा घटनाक्रम
इस घटना में सबसे अहम भूमिका उस छोटे बच्चे की रही, जिसने समय रहते खतरे को पहचान लिया। अगर वह घबराहट के बावजूद स्टेशन मास्टर तक नहीं पहुंचता, तो शायद स्थिति को संभालने का मौका नहीं मिलता।
वहीं स्टेशन मास्टर आनंद उपाध्याय ने भी बच्चे की बात को नजरअंदाज नहीं किया। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को समझा और बिना समय गंवाए मौके पर पहुंचकर महिला को ट्रैक से हटा लिया।
बच्चे ने खतरा देखा, स्टेशन मास्टर ने जिंदगी बचाने के लिए दौड़ लगा दी।
रेलवे ने किया सम्मानित करने का फैसला
घटना के बाद रेलवे प्रशासन ने स्टेशन मास्टर आनंद उपाध्याय की तत्परता, साहस और मानवीय संवेदनशीलता की सराहना की है। रेलवे प्रशासन ने उनके इस साहसिक कार्य के लिए उन्हें सम्मानित करने का निर्णय लिया है।
उरकुरा स्टेशन की यह घटना बताती है कि संकट की घड़ी में कुछ सेकंड की सजगता कितनी बड़ी अनहोनी को टाल सकती है।
एक तरफ मासूम बच्चे की सूझबूझ थी, जिसने खतरे को पहचाना और मदद के लिए दौड़ा। दूसरी तरफ स्टेशन मास्टर आनंद उपाध्याय की फुर्ती थी, जिन्होंने बिना अपनी सुरक्षा की परवाह किए महिला को बचाने के लिए ट्रैक की ओर दौड़ लगा दी।
एक बच्चे की आवाज… एक रेलवे कर्मचारी की दौड़… और बच गई एक जिंदगी।










