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ट्रांसफर पर हाईकोर्ट का कड़ा आदेश: पहले खुद मांगा ट्रांसफर, फिर उसी आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती; कोर्ट ने कहा- समीक्षा अपील का दूसरा रास्ता नहीं

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कर्मचारी की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। कर्मचारी ने पहले खुद अंतर-निकाय ट्रांसफर मांगा था, बाद में उसी तबादले को हाई कोर्ट में चुनौती दी।

October 7, 2026 4:26 AM
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बिलासपुर:  सरकारी नौकरी में तबादले को लेकर अक्सर कर्मचारी मनपसंद जगह के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन भिलाई-चरौदा नगर निगम के सहायक ग्रेड-2 अंकित यादव का मामला कुछ अलग निकला। जिस अंतर-निकाय तबादले की मांग उन्होंने खुद की थी, बाद में उसी तबादले को नियम विरुद्ध बताते हुए हाई कोर्ट में चुनौती दे दी।

मामला समीक्षा याचिका तक पहुंचा, लेकिन कोर्ट ने इसे भी खारिज कर दिया। अब ट्रांसफर के उसी केस में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है।न्यायमूर्ति बिभू दत्त गुरु की एकलपीठ ने पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि समीक्षा अदालत अपीलीय अदालत की तरह काम नहीं कर सकती। समीक्षा के नाम पर पुराने मामले की दोबारा सुनवाई भी नहीं की जा सकती।

पहले रायपुर से चरौदा, फिर खुद मांगा दूसरे निगम में तबादला

अंकित यादव की नियुक्ति नगर निगम रायपुर में सहायक ग्रेड-3 के पद पर हुई थी। इसके बाद उनका तबादला 30 सितंबर 2021 को रिसाली और फिर 18 सितंबर 2025 को भिलाई-चरौदा नगर निगम किया गया।चरौदा में स्वीकृत पदों की तुलना में कर्मचारियों की संख्या अधिक होने की स्थिति बनी तो अंकित ने खुद आवेदन देकर दूसरे निकाय में तबादले की मांग की।यानी उस समय मामला साफ था—चरौदा में पद से ज्यादा कर्मचारी हैं, इसलिए खुद ही दूसरे निकाय में जाने का रास्ता चुना गया।

शासन ने राजनांदगांव भेजा तो बदल गया रुख

अंकित के आवेदन के बाद शासन ने 31 जुलाई 2026 को उन्हें रिक्त पद वाले नगर निगम राजनांदगांव स्थानांतरित कर दिया।लेकिन जिस तबादले की मांग खुद कर्मचारी ने की थी, राजनांदगांव भेजे जाने के बाद उसी आदेश पर सवाल उठ गया।अंकित ने 2026 में हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए तबादले को चुनौती दी। हालांकि हाई कोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को उनकी याचिका खारिज कर दी।इसके बाद उन्होंने इसी आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी।

खुद मांगा तबादला, फिर बताया नियम विरुद्ध

पुनर्विचार याचिका में कर्मचारी की ओर से तर्क दिया गया कि नगर पालिका निगम अधिनियम की धारा 58(5) और 58(6) के तहत एक नगर निगम से दूसरे नगर निगम में सीधे तबादले का प्रावधान नहीं है।याचिकाकर्ता ने अपने पक्ष में एक पुराने मामले का भी हवाला दिया और कहा कि मौजूदा तबादला नियमों के अनुरूप नहीं है।लेकिन हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

कोर्ट ने कहा- दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग

अदालत ने मोहम्मद वसीम खान के मामले से की गई तुलना को खारिज करते हुए कहा कि दोनों मामलों के तथ्य एक जैसे नहीं हैं।इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि याचिकाकर्ता स्वयं अंतर-निकाय स्थानांतरण चाहता था।ऐसे में बाद में उसी स्थानांतरण को चुनौती देने के आधार पर समीक्षा का दायरा बढ़ाया नहीं जा सकता।

समीक्षा याचिका को अपील की तरह इस्तेमाल नहीं कर सकते

हाई कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए समीक्षा की कानूनी सीमा भी स्पष्ट की।अदालत ने कहा कि समीक्षा तभी की जा सकती है, जब पहले दिए गए आदेश में ऐसी कोई स्पष्ट गलती हो जो रिकॉर्ड पर ही दिखाई दे। केवल इसलिए समीक्षा नहीं की जा सकती कि पक्षकार अदालत के फैसले से सहमत नहीं है या वह मामले की दोबारा सुनवाई चाहता है।यानी आसान भाषा में कहें तो समीक्षा याचिका फैसले की दोबारा अपील करने का दूसरा टिकट नहीं है।

तबादले पर कोर्ट का अहम संदेश

इस मामले में हाई कोर्ट ने कर्मचारी के तबादले की परिस्थितियों के साथ-साथ समीक्षा याचिका की सीमा को भी स्पष्ट किया है।एक तरफ कर्मचारी ने चरौदा में पदों से अधिक स्टाफ होने के कारण खुद दूसरे निकाय में स्थानांतरण की मांग की। दूसरी तरफ शासन ने रिक्त पद के आधार पर उसे राजनांदगांव भेजा तो उसी अंतर-निकाय तबादले को चुनौती दे दी गई।

हाई कोर्ट ने फिलहाल पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए साफ कर दिया कि जिस राहत की मांग खुद की गई हो, बाद में उसी प्रक्रिया को चुनौती देने के लिए समीक्षा का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, जब तक आदेश में रिकॉर्ड पर स्पष्ट कानूनी गलती न हो।

एक नजर में पूरा मामला

  • 2021: रायपुर से रिसाली तबादला।
  • 2025: रिसाली से भिलाई-चरौदा तबादला।
  • 2026: चरौदा में अधिक कर्मचारी होने पर खुद अंतर-निकाय तबादले का आवेदन।
  • 31 जुलाई 2026: राजनांदगांव तबादला।
  • 18 अगस्त 2026: हाई कोर्ट ने तबादले के खिलाफ याचिका खारिज की।
  • इसके बाद: पुनर्विचार याचिका दाखिल।
  • अब: हाई कोर्ट ने रिव्यू पीटिशन भी खारिज कर दी।

 

Gitendra Sahu

Gitendra Kumar Sahu has over 10 years of experience in journalism and newsroom operations. He has worked with reputed media organizations such as Swaraj Express and Press Trust of India (PTI), where he spent nearly five years in active journalism. He has also worked with several digital media platforms and possesses extensive experience in both field reporting and newsroom desk operations. After completing his graduation, he chose journalism as his professional career. He specializes in political reporting, current affairs, and crime journalism, with strong expertise in breaking and handling major news stories.

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