सुकमा (छत्तीसगढ़)। सुकमा जिला अब से कुछ महीने पहले तक नक्सलवाद के लिए जाना जाता था। गोलियों के शोर व जवानों के बूटों की आवाज से प्रतिभाएं दम तोड़ देती थी, लेकिन बारसे रोशन ने सुकमा जिले से कीर्तिमान रच दिया। प्रशासन के मार्गदर्शन और तत्वावधान में संचालित “ क्षितिज“ जेई/नीट कोचिंग सेंटरश् ने सुकमा जैसे दूरस्थ क्षेत्र में शिक्षा की एक नई अलख जगाई है। जिला प्रशासन की इस दूरदर्शी पहल का ही सुखद परिणाम है कि झापरा क्षेत्र के एक साधारण किसान परिवार से आने वाले मेधावी छात्र बारसे रोशन ने अपने पहले ही प्रयास में जेईई एडवांस 2026 की राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में 634वीं कैटेगरी रैंक हासिल कर एक ऐतिहासिक मिसाल कायम की है। यह सफलता जिला प्रशासन के उस संकल्प को सिद्ध करती है, जिसके तहत वे ग्रामीण और आदिवासी अंचल के बच्चों को देश के सर्वोच्च शैक्षणिक मंचों तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बीच पलने वाले रोशन का बचपन से ही आईआईटी में पढ़ने का सपना था, जिसे जिला प्रशासन की “क्षितिज“ योजना ने सही दिशा, उत्कृष्ट मार्गदर्शन और निशुल्क कोचिंग देकर पंख लगाए। रोशन की रुचि कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (CSE) में है, और उनकी इस शानदार रैंक के आधार पर आईआईटी भिलाई, आईआईटी भुवनेश्वर तथा आईआईटी हैदराबाद जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश मिलना लगभग तय है। एक किसान परिवार के बेटे द्वारा राष्ट्रीय स्तर की इस कठिनतम परीक्षा को पहली ही प्रयास में क्रैक करना यह साबित करता है कि यदि प्रशासनिक स्तर पर सही संसाधन और सहयोग मिले, तो ग्रामीण परिवेश की प्रतिभाएँ भी आसमान छू सकती हैं।
बारसे रोशन की इस गौरवपूर्ण उपलब्धि से न केवल उनका परिवार और झापरा गाँव, बल्कि पूरा सुकमा जिला और जिला प्रशासन गौरवान्वित महसूस कर रहा है। रोशन की यह सफलता आने वाले समय में जिले के सैकड़ों अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का एक ऐसा जीवंत स्रोत बनेगी, जो यह संदेश देती है कि मेहनत और सही प्रशासनिक सहयोग से बड़े से बड़ा सपना भी सच किया जा सकता है। सुकमा जिला प्रशासन की इस अनूठी पहल ने यह साबित कर दिया है कि बस्तर अंचल का युवा अब सिर्फ बदल नहीं रहा, बल्कि देश के तकनीकी और वैज्ञानिक भविष्य को संवारने में अपना अमूल्य योगदान देने के लिए पूरी तरह तैयार है।









