Teacher Suspend। Bemetara Collector Inspection। शिक्षकों की भर्राशाही पर कलेक्टर का बड़ा एक्शन हुआ है। एक शिक्षक को सस्पेंड कर दिया गया है, तो वहीं पढ़ाई छोड़ अन्य कार्य में लगे शिक्षकों पर भी गाज गिरी है। मामला बेमेतरा जिले का है, जहां सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई ने सख्त रुख अपनाया है।
शुक्रवार को विकासखंड नवागढ़ के विभिन्न शासकीय विद्यालयों का औचक निरीक्षण करते हुए उन्होंने शिक्षण व्यवस्था, शिक्षकों की उपस्थिति और स्कूलों की साफ-सफाई का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर एक सहायक शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया, जबकि प्रधान पाठक समेत छह शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
बिना सूचना अनुपस्थित मिले शिक्षक, तत्काल निलंबन
कलेक्टर के औचक निरीक्षण के दौरान शासकीय प्राथमिक शाला खैरी में पदस्थ सहायक शिक्षक (एलबी) सुरेंद्र कुमार बारले बिना पूर्व सूचना के अनधिकृत रूप से अनुपस्थित पाए गए। बताया गया कि वो कई दिनों से स्कूल नहीं आ रहे हैं। इसे शासकीय कर्तव्यों के प्रति लापरवाही और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 का उल्लंघन मानते हुए कलेक्टर ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बेरला निर्धारित किया गया है।
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में मिली अव्यवस्था
उसी तरह से निरीक्षण के दौरान कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, नवागढ़ का परिसर गंदा और अव्यवस्थित मिला। इस पर कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए अधीक्षिका चन्द्रप्रभा बंजारे को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।उन्होंने साफ कहा कि विद्यालय परिसर की स्वच्छता और अनुशासन से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पढ़ाई छोड़ पुस्तक स्कैनिंग कर रहे थे शिक्षक
कलेक्टर के निरीक्षण में प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शाला नांदल में भी बड़ी लापरवाही सामने आई। यहां तीन शिक्षकों के अवकाश पर रहने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित मिली। वहीं कुछ शिक्षक कक्षा में अध्यापन करने के बजाय पुस्तकों की स्कैनिंग करते पाए गए।इस मामले में प्रधान पाठक शिवकुमार ध्रुव सहित सुमेन्त खरे, तुलाराम हीरवानी, जग्गु राम चन्द्राकर, अनिता भानु और विजय प्रताप सिंह भारद्वाज को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने जारी किए सख्त निर्देश
घटना के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने जिले के सभी संस्था प्रमुखों और शिक्षकों के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि शिक्षण अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की पुस्तक स्कैनिंग या अन्य गैर-शैक्षणिक कार्य नहीं किया जाएगा।निर्देश में कहा गया है कि यदि पुस्तकों की स्कैनिंग करनी है तो वह केवल विद्यालय में अध्यापन कार्य समाप्त होने के बाद ही की जाए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
‘शिक्षण कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता’
कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई ने दो टूक कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षण कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता है। विद्यार्थियों की पढ़ाई से समझौता करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि शिक्षकों का अवकाश तभी स्वीकृत किया जाए, जब उससे विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित न हो।










