पेंड्रा (गौरेला-पेंड्रा-मरवाही): यूं तो सरकार मुफ्त शिक्षा का दावा कर करोड़ों अरबो रुपये खर्च करती है। स्कूल बनाती है, शिक्षकों की नियुक्ति करती है, अलग-अलग योजनाएं तैयार करती है, बावजूद उन योजनाओं का जमीन पर क्या हश्र है, इसका उदाहरण छत्तीसगढ़ के पेंड्रा विकासखंड में दिखा है। पेंड्रा से एक बेहद चिंताजनक और हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहां 9वीं कक्षा में प्रवेश नहीं मिलने से निराश एक छात्र ने कीटनाशक पीकर आत्महत्या का प्रयास कर लिया। हालांकि खुशकिस्मित की बात ये रही कि समय रहते परिजनों ने उसे अस्पताल पहुंचा दिया, जिससे उसकी जान बच गई। फिलहाल छात्र का जिला अस्पताल में इलाज जारी है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
जानिये क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार यह घटना पेंड्रा विकासखंड के ग्राम पंचायत खरड़ी के उरांव मोहल्ला की है। यहां रहने वाला सनील उरांव इस वर्ष 8वीं कक्षा पास करने के बाद आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहता था। वह कोड़गार स्थित हाई स्कूल में 9वीं कक्षा में प्रवेश लेने की कोशिश कर रहा था।हालांकि, प्रवेश प्रक्रिया के दौरान आवश्यक दस्तावेज पूरे न होने के कारण उसे एडमिशन नहीं मिल सका। बताया जा रहा है कि छात्र लगातार दस्तावेज तैयार कराने और प्रवेश पाने के प्रयास में लगा था, लेकिन सफलता नहीं मिलने से वह मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगा था।
मानसिक तनाव में उठाया खौफनाक कदम
परिजनों ने बताया कि सनील पिछले कुछ दिनों से पढ़ाई को लेकर काफी चिंतित था। इसी तनाव के चलते उसने घर में रखे कृषि उपयोग के कीटनाशक का सेवन कर लिया।कुछ ही देर में उसकी हालत बिगड़ने लगी, जिसके बाद परिजनों ने तुरंत उसे जिला अस्पताल पहुंचाया।
डॉक्टरों ने बचाई जान
अस्पताल में डॉक्टरों ने तत्काल उपचार शुरू किया, जिससे उसकी जान बचाई जा सकी। चिकित्सकों के अनुसार अब छात्र की स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियातन उसे निगरानी में रखा गया है।
प्रशासन भी जुटा जांच में
घटना की सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी मामले की जानकारी ली जा रही है। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि छात्र किन दस्तावेजों के अभाव में प्रवेश नहीं ले सका और वे समय पर उपलब्ध क्यों नहीं हो पाए।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश और चिंता का माहौल है। लोगों का कहना है कि स्कूलों की प्रवेश प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए। साथ ही विद्यार्थियों के लिए काउंसलिंग की व्यवस्था भी जरूरी है, ताकि वे मानसिक दबाव में इस तरह के कदम न उठाएं।शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आज के समय में छात्रों पर पढ़ाई का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में स्कूल और परिवार दोनों की जिम्मेदारी है कि बच्चों को भावनात्मक सहयोग और सही मार्गदर्शन दिया जाए।










