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“दो महीने में लिव इन पार्टनर से शादी करो, वरना बर्खास्त” महिला आयोग का CRPF जवान को दो टूक निर्देश, छह साल से रिलेशन में, पर नहीं कर रहा शादी

June 23, 2026 3:58 AM
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Chhattisgarh Mahila Ayog : “दो महीने के भीतर लिव इन पार्टनर से शादी करो, नहीं तो बर्खास्तगी के लिए तैयार रहो” कांस्टेबल को महिला आयोग ने दो टूक निर्देश दिया है। महिला आयोग ने ये सख्त रुख जवान की महिला पार्टनर की शिकायत पर अपनाया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि छह साल से लिव इन में रहने के बावजूद जवान उससे शादी नहीं कर रहा है, जबकि उसके लिव इन रिलेशन से एक बेटी भी हुई है। इससे पहले छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक और सदस्य प्रियम्वदा सिंह जूदेव ने सोमवार को जशपुर कलेक्ट्रेट में महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई की।

6 साल से लिव इन में रह रही महिला को मिलेगा न्याय

सुनवाई के दौरान एक अहम मामला सामने आया, जिसमें एक सेना के जवान को अपनी साथी महिला से विधिवत विवाह करने का निर्देश दिया गया। महिला ने शिकायत में बताया कि वह पिछले 6 वर्षों से जवान के साथ रह रही है और उनकी एक 6 साल की बेटी भी है, लेकिन अब तक शादी नहीं हुई।सुनवाई में जवान ने महिला के साथ रहने और बच्ची का पिता होने की बात स्वीकार की। महिला ने एफआईआर कराने से इनकार करते हुए शादी की इच्छा जताई, जिस पर जवान भी सहमत हो गया।

आयोग ने दिए सख्त निर्देश

महिला आयोग ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे दोनों पक्षों के बीच समन्वय कर 2 महीने के भीतर विवाह की प्रक्रिया पूरी कराएं और इसकी रिपोर्ट आयोग को सौंपें।साथ ही, जवान को आदेश दिया गया है कि वह हर महीने की 5 तारीख तक महिला के बैंक खाते में 10,000 रुपये भरण-पोषण के रूप में जमा करे।

आदेश नहीं मानने पर होगी कड़ी कार्रवाई

आयोग ने साफ कहा कि यदि जवान आदेश का पालन नहीं करता है, तो उसकी सैन्य यूनिट को पत्र भेजा जाएगा और उसकी सेवा समाप्ति की अनुशंसा भी की जा सकती है। साथ ही महिला को शारीरिक शोषण का मामला दर्ज कराने का पूरा अधिकार रहेगा।

एक और मामले में 20 हजार भरण-पोषण तय

वहीं एक अन्य मामले में सीआरपीएफ के एक आरक्षक ने अपनी पत्नी और दो बच्चों के लिए हर महीने 20,000 रुपये देने पर सहमति जताई। आयोग ने इस राशि के नियमित भुगतान की निगरानी की जिम्मेदारी अधिकारियों को सौंपी है।महिला आयोग ने अन्य मामलों में भी आपसी सहमति और समझाइश के आधार पर कई प्रकरणों का समाधान किया।

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