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CGPSC भर्ती पर हाईकोर्ट में बड़ा अपडेट: विज्ञापन रद्द नहीं, संशोधित रोस्टर के बाद आगे बढ़ेगी चयन प्रक्रिया

बिलासपुर हाईकोर्ट में CGPSC ने स्पष्ट किया कि चिकित्सा शिक्षा विभाग की 2021 भर्ती का विज्ञापन रद्द नहीं हुआ है। संशोधित रोस्टर के अनुरूप सरकार से प्रस्ताव मिलने के बाद चयन प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

July 5, 2026 6:10 AM
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) ने चिकित्सा शिक्षा विभाग की वर्ष 2021 की भर्ती प्रक्रिया को लेकर हाईकोर्ट में स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने साफ किया कि वर्ष 2021 में जारी भर्ती विज्ञापन को निरस्त नहीं किया गया है। आयोग ने ये भी कहा है कि आरक्षण संबंधी न्यायालय के फैसले के बाद केवल संशोधित रोस्टर के अनुरूप राज्य सरकार से नया प्रस्ताव (Requisition) मांगा गया है। प्रस्ताव मिलते ही भर्ती प्रक्रिया नियमानुसार आगे बढ़ाई जाएगी। इस जानकारी के बाद अभ्यर्थियों ने राहत की सांस ली है।

भर्ती विज्ञापन अब भी प्रभावी: CGPSC

हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से अधिवक्ता आनंद मोहन तिवारी ने 15 मार्च 2023 का आधिकारिक पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। इसमें स्पष्ट किया गया कि दो दिसंबर 2021 को जारी भर्ती विज्ञापन आज भी प्रभावी है और उसे रद्द नहीं किया गया है। लोक सेवा आयोग ने बताया कि आरक्षण से जुड़े डिवीजन बेंच के फैसले के बाद पदों के रोस्टर में संशोधन आवश्यक हो गया था। इसी कारण राज्य सरकार से संशोधित रीक्विजिशन मांगा गया है। जैसे ही संशोधित प्रस्ताव प्राप्त होगा, भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ा दी जाएगी।

भर्ती रद्द होने की आशंका पर पहुंचे थे हाईकोर्ट

दरअसल यह पूरा मामला अभय कुमार किस्पोट्टा, डॉ. अजय त्रिपाठी, एल्युस एक्का और आदित्य सिंह द्वारा दायर रिट याचिका से जुड़ा था। याचिकाकर्ताओं को आशंका थी कि 2 दिसंबर 2021 का भर्ती विज्ञापन निरस्त कर दिया गया है, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया अधर में लटक गई है।

स्पष्टीकरण के बाद याचिका वापस

CGPSC का पक्ष सामने आने और भर्ती विज्ञापन के प्रभावी होने की पुष्टि के बाद याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उनका मुख्य संशय दूर हो गया है। इसके बाद उन्होंने अपनी रिट याचिका वापस लेने का अनुरोध किया।

हाईकोर्ट ने दी अनुमति

जस्टिस बिभू दत्त गुरु की एकल पीठ ने याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए मामले का निराकरण कर दिया। साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर याचिकाकर्ता उचित वैधानिक मंच का रुख कर सकते हैं।

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