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महतारी वंदन योजना में बड़ा खेल! पुरुष महीनों तक महिला बनकर लेता रहा योजना का पैसा, खुलासे पर मचा हड़कंप

खैरागढ़ में महतारी वंदन योजना में बड़ी गड़बड़ी सामने आई। पुरुष के नाम महिला हितग्राही का आवेदन स्वीकृत हो गया और 12 महीने तक खाते में किस्तें आती रहीं। ई-केवाईसी के दौरान मामला उजागर हुआ।

July 7, 2026 6:46 AM
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खैरागढ़। महतारी वंदन योजना सनी लियोन के नाम पर एप्रूव हुआ था, तो उस वक्त खूब बबाल मचा था। अब एक नया मामला खैरागढ़ से सामने आया है, जहां एक पुरुष ने महिला बनकर महतारी वंदन योजना का लाभ ले लिया। अब छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना की सत्यापन प्रक्रिया पर खैरागढ़ जिले से सामने आए इस मामले ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच में पता चला है कि यहां एक पुरुष का आवेदन महिला हितग्राही के रूप में न सिर्फ स्वीकृत हो गया, बल्कि उसके बैंक खाते में कई महीनों तक योजना की राशि भी पहुंचती रही। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आवेदन में हितग्राही और पति, दोनों के नाम के स्थान पर एक ही व्यक्ति का नाम दर्ज था, फिर भी दो स्तर की जांच में यह गलती पकड़ में नहीं आई।

ट्रायल के लिए भरा आवेदन, मंजूर हो गया

मामला खैरागढ़ परियोजना के मुढ़ीपार निवासी तिलोक साहू का है। तिलोक एक कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) संचालक है। उसने बताया कि महतारी वंदन योजना का पोर्टल शुरू होने के बाद आवेदन प्रक्रिया को समझने और ट्रायल के उद्देश्य से उसने अपने ही नाम से आवेदन भर दिया था।उसके मुताबिक, उसे उम्मीद नहीं थी कि आवेदन स्वीकृत हो जाएगा, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि आवेदन मंजूर हो गया और उसके बैंक खाते में योजना की किस्तें भी आने लगीं।

10 या 12 किस्त? रिकॉर्ड में भी अंतर

तिलोक साहू का दावा है कि उसे योजना की 10 किस्तों की राशि मिली थी, जिसे उसने बाद में वापस कर दिया। वहीं विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार उसके आवेदन के आधार पर 12 महीनों तक राशि जारी की गई।यानी हितग्राही द्वारा बताई गई किस्तों और विभागीय रिकॉर्ड में भी अंतर सामने आया है।

दो स्तर की जांच के बाद भी नहीं पकड़ी गई चूक

ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार आवेदन “पब्लिक” श्रेणी से दर्ज किया गया था। इसके बाद संबंधित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने आवेदन का सत्यापन किया और फिर सुपरवाइजर स्तर पर भी उसे मंजूरी दे दी गई।सबसे बड़ा सवाल यह है कि आवेदन में हितग्राही और पति दोनों के नाम के स्थान पर तिलोक साहू का ही नाम दर्ज था, फिर भी आवेदन स्वीकृत कैसे हो गया? दो स्तर की जांच के बावजूद इतनी बड़ी त्रुटि नजरअंदाज कैसे हो गई?

राशि की रिकवरी शुरू

खैरागढ़ परियोजना अधिकारी रंजना श्रीवास्तव ने बताया कि संबंधित हितग्राही से योजना की राशि की वसूली की जा रही है। अब तक 10 हजार रुपये की रिकवरी की जा चुकी है। शेष राशि वापस लेने की प्रक्रिया जारी है।

ई-केवाईसी अभियान में उजागर हुई खामियां

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब जिले में महतारी वंदन योजना के लाभार्थियों का ई-केवाईसी अभियान चल रहा है।राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-चौकी और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिलों में कुल 2,40,996 हितग्राहियों की ई-केवाईसी का लक्ष्य रखा गया है। जून तक 2,36,886 हितग्राहियों का सत्यापन पूरा हो चुका है, जबकि 10,222 हितग्राहियों का सत्यापन अभी शेष है। इसे अगस्त तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

अधिकारियों का दावा है कि अब तक करीब 98 प्रतिशत ई-केवाईसी पूरी हो चुकी है, लेकिन खैरागढ़ का यह मामला योजना की सत्यापन प्रणाली और निगरानी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।अब देखने वाली बात होगी कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए सरकार क्या कदम उठाती है।

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