Teacher Suspend। शिक्षक की मर्यादा को तार-तार करने वाले प्रधान पाठक की छुट्टी हो गयी है। शिक्षा विभाग ने शराबी प्रधान पाठक को सस्पेंड कर विभागीय जांच शुरू कर दी है। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में सरकारी स्कूल के एक प्रधान पाठक पर जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। विद्यालय समय में कथित तौर पर शराब के नशे में स्कूल पहुंचने, ग्रामीणों के सामने गाली-गलौज करने और अभद्र व्यवहार करने के आरोपों की पुष्टि प्रथम दृष्टया होने के बाद प्रधान पाठक हरिनंदन सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।यह कार्रवाई उस समय हुई जब विद्यालय परिसर में प्रधान पाठक के जमीन पर लेटे होने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया।
वायरल वीडियो के बाद प्रशासन हरकत में आया
दरअसल 8 जुलाई 2026 को रामानुजनगर विकासखंड के प्राथमिक शाला खोरखोरीपारा साल्ही में पदस्थ प्रधान पाठक हरिनंदन सिंह कथित रूप से शराब के नशे में विद्यालय पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने ग्रामीणों के सामने गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया तथा विद्यालय परिसर में जमीन पर लेट गए। इस पूरी घटना का वीडियो ग्रामीणों ने बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
कलेक्टर के निर्देश पर कराई गई जांच
वीडियो वायरल होने के बाद मामला कलेक्टर के संज्ञान में पहुंचा। इसके बाद प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी को तत्काल जांच एवं आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।जांच की जिम्मेदारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी, रामानुजनगर को सौंपी गई। जांच में प्रथम दृष्टया शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित प्रधान पाठक के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई।
तत्काल प्रभाव से निलंबन, विभागीय जांच भी शुरू
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, विकासखंड शिक्षा अधिकारी की जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रधान पाठक हरिनंदन सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही उनके विरुद्ध विभागीय जांच भी संस्थित कर दी गई है।शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी विद्यालयों में अनुशासनहीनता और विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
ग्रामीणों में थी नाराजगी
घटना के वीडियो में प्रधान पाठक विद्यालय परिसर में जमीन पर लेटे दिखाई दिए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उनकी हरकत से स्कूल का माहौल खराब हुआ और बच्चों व अभिभावकों के बीच गलत संदेश गया। यही वीडियो प्रशासनिक कार्रवाई का प्रमुख आधार बना।










