Police Promotion News। पुलिस विभाग में आउट ऑफ टर्न प्रमोशन को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने 5 महीने के भीतर प्रमोशन के मुद्दे पर निर्णय लेने को कहा है। साल 2020 में राजनांदगांव जिले के मानपुर क्षेत्र में हुई नक्सल मुठभेड़ में शामिल तीन आरक्षकों की आउट ऑफ टर्न पदोन्नति से जुड़े मामले में विभाग के रुख के खिलाफ ये याचिका दायर की गयी थी। इस मामले राकेश मोहन पांडे की एकल पीठ ने पुलिस अधीक्षक, राजनांदगांव को आदेश दिया है कि वे याचिकाकर्ताओं के लंबित अभ्यावेदन पर कानून और लागू नियमों के अनुसार विचार करते हुए 150 दिनों के भीतर कारणयुक्त निर्णय लें।
2020 की नक्सल मुठभेड़ का मामला
आउट आफ टर्न प्रमोशन की याचिका आरक्षक शिवाजी राव आमोड़े, होमेंद्र कुमार साहू और घनश्याम महेश की ओर से दायर की गई थी। याचिका में कहा गया कि वर्ष 2020 में राजनांदगांव जिले के मानपुर थाना क्षेत्र के ग्राम परदोनी में हुई नक्सल मुठभेड़ के दौरान वे छत्तीसगढ़ आर्म्स फोर्स और जिला पुलिस बल की संयुक्त टीम का हिस्सा थे। उनका दावा था कि अभियान में उन्होंने साहस और वीरता का प्रदर्शन किया, इसलिए पुलिस रेगुलेशन-70 के तहत उन्हें अगले उच्च पद पर आउट ऑफ टर्न पदोन्नति का लाभ मिलना चाहिए।
2022 से लंबित है अभ्यावेदन
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने 14 मई 2022 को पुलिस अधीक्षक, राजनांदगांव के समक्ष पदोन्नति के लिए अभ्यावेदन प्रस्तुत किया था। हालांकि, लंबे समय तक उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। इसी के बाद उन्होंने न्यायालय की शरण ली।
राज्य सरकार ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि आउट ऑफ टर्न पदोन्नति के लिए नियमों में स्पष्ट प्रावधान है। कुल पदोन्नतियों में अधिकतम 10 प्रतिशत पद ही इस श्रेणी के लिए आरक्षित किए जा सकते हैं। सरकार ने यह भी कहा कि नक्सल विरोधी अभियानों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी शामिल होते हैं, इसलिए सभी को इस आधार पर पदोन्नति देना संभव नहीं है।राज्य सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि याचिकाकर्ताओं के साहस को देखते हुए उन्हें 26 फरवरी 2022 को नगद पुरस्कार प्रदान किया जा चुका है।
हाई कोर्ट ने दिया समयबद्ध आदेश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने सीधे पदोन्नति का आदेश नहीं दिया। अदालत ने पुलिस अधीक्षक, राजनांदगांव को निर्देश दिया कि वे लंबित अभ्यावेदन पर कानून और लागू नियमों के अनुसार विचार करें तथा आदेश की प्रति प्राप्त होने के 150 दिनों के भीतर कारणयुक्त और विधिसम्मत निर्णय पारित करें।










