CG High Court BEO Stay Order: शिक्षक संवर्ग से BEO की पोस्टिंग पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। इस मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा गया है। मामला रायगढ़ जिले के पुसौर विकासखंड का है। जहां, एक प्राचार्य को खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) के पद पर पदस्थ करने के राज्य शासन ने आदेश जारी किया था। लेकिन उस आदेश पर हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामले को विचारणीय मानते हुए 10 जून 2026 के आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
प्रशासनिक संवर्ग के अधिकारी की याचिका पर मिली राहत
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने की। अदालत ने याचिकाकर्ता शैलेश कुमार देवांगन की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य शासन और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। साथ ही निजी प्रतिवादी को भी 10 दिनों के भीतर नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
पहले बने थे BEO, फिर हुआ तबादला
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सी. जयंत के. राव ने अदालत को बताया कि शैलेश कुमार देवांगन की नियुक्ति सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी (ABEO) के रूप में हुई थी। इसके बाद 30 दिसंबर 2022 को पदोन्नति देकर उन्हें खरसिया का BEO बनाया गया।बाद में 10 जुलाई 2025 को उनका तबादला पुसौर विकासखंड में BEO के रूप में कर दिया गया।
प्राचार्य को BEO बनाने पर उठाया सवाल
याचिका में कहा गया कि इसके बावजूद राज्य शासन ने 10 जून 2026 को जारी आदेश के माध्यम से एक प्राचार्य को पुसौर का BEO पदस्थ कर दिया। याचिकाकर्ता का तर्क है कि संबंधित अधिकारी शैक्षणिक (शिक्षकीय) संवर्ग से हैं, जबकि वे प्रशासनिक संवर्ग के अधिकारी हैं।याचिका में यह भी कहा गया कि यह नियुक्ति छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षणिक एवं प्रशासनिक संवर्ग) भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2026 के प्रावधानों के विपरीत है।
हाईकोर्ट ने आदेश के क्रियान्वयन पर लगाई रोक
सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता गैरी मुखोपाध्याय ने नोटिस स्वीकार किया।अदालत ने कहा कि इसी प्रकार का विवाद पहले भी न्यायालय के समक्ष आ चुका है। साथ ही प्रथम दृष्टया यह भी स्पष्ट हुआ कि याचिकाकर्ता प्रशासनिक संवर्ग से संबंधित अधिकारी हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने 10 जून 2026 के आदेश के प्रभाव और संचालन पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक (Stay) लगा दी।










