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“मैं नहीं घुमा रहा…सवाल ही घुमावदार है” सदन में अजय चंद्राकर पर क्यों नाराज हो गये स्वास्थ्य मंत्री, प्लेसमेंट कर्मियों के पुलिस सत्यापन पर सत्ता पक्ष ने ही सरकार को घेरा…

छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्लेसमेंट कर्मियों के पुलिस सत्यापन का मुद्दा गूंजा। धरमलाल कौशिक ने बिना सत्यापन भुगतान पर सवाल उठाए, जबकि पूरक प्रश्न के दौरान स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और अजय चंद्राकर के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

July 15, 2026 6:56 AM
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Chhattisgarh Vidhansabha LIVE। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सरकारी अस्पतालों में कार्यरत प्लेसमेंट कर्मियों के पुलिस सत्यापन का मुद्दा सदन में जोरदार तरीके से गूंजा। भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने बिना पुलिस सत्यापन के कर्मचारियों को भुगतान किए जाने और अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।

धरमलाल कौशिक ने आरोप लगाया कि बिना पुलिस वैरिफिकेशन के तैनात कर्मचारी कई तरह की वारदातें कर रहे हैं। उन्होंने इस दौरान बिना वैरिफिकेशन के सेवा लेने वाली एजेंसी के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की। हालांकि इस दौरान पूरक प्रश्नों के दौरान स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और भाजपा विधायक अजय चंद्राकर के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।

धरमलाल कौशिक ने उठाया नियमों के उल्लंघन का मुद्दा
धरमलाल कौशिक ने पूछा कि जब अनुबंध की शर्तों में प्लेसमेंट कर्मियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य है, तब वर्ष 2024 से कार्यरत कर्मचारियों का सत्यापन समय पर क्यों नहीं कराया गया। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि बिना पुलिस सत्यापन के कर्मचारियों को अब तक कितना भुगतान किया गया।

कौशिक ने कहा कि अस्पतालों में चोरी की घटनाएं सामने आती रही हैं और कई बार सुरक्षा कर्मियों द्वारा आम लोगों तथा पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें भी मिली हैं। ऐसे में बिना पुलिस सत्यापन के कर्मचारियों की तैनाती गंभीर चिंता का विषय है।

मंत्री ने कहा- भुगतान रोकने का प्रावधान नहीं

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने जवाब में कहा कि रायपुर मेडिकल कॉलेज और डीकेएस अस्पताल के अनुबंध में पुलिस सत्यापन का प्रावधान है, जबकि डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय के पुराने अनुबंध में ऐसा प्रावधान नहीं था।

उन्होंने बताया कि डीकेएस अस्पताल के सभी कर्मियों का पुलिस सत्यापन पूरा हो चुका है, जबकि शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर में लगभग 80 से 85 प्रतिशत कर्मचारियों का सत्यापन कराया जा चुका है। कुछ कर्मचारियों के लगातार बदलने के कारण प्रक्रिया में विलंब हुआ।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि मौजूदा अनुबंधों में पुलिस सत्यापन नहीं होने पर भुगतान रोकने का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन भविष्य में जारी होने वाले टेंडरों में इस संबंध में स्पष्ट शर्त जोड़ी जाएगी।

15.74 करोड़ रुपये का भुगतान

स्वास्थ्य मंत्री ने सदन को बताया कि वर्ष 2024 से 20 जून 2026 तक संबंधित प्लेसमेंट एजेंसी को 15 करोड़ 74 लाख 15 हजार 327 रुपये का भुगतान किया गया। उन्होंने कहा कि यह भुगतान अनुबंध की शर्तों और निविदा नियमों के अनुसार किया गया है तथा इसमें कोई आर्थिक अनियमितता नहीं हुई।

मीडिया कर्मियों से विवाद और शिकायतों की जानकारी

मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025 में डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय में मीडिया कर्मियों और प्लेसमेंट एजेंसी के कर्मचारियों के बीच विवाद हुआ था, जिस पर पुलिस ने कार्रवाई की थी।

इसके अलावा 26 जून 2026 को सीएम हेल्पलाइन 1076 में मरीजों के परिजनों के साथ सफाई कर्मियों के अमर्यादित व्यवहार की शिकायत दर्ज हुई थी। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन ने प्लेसमेंट एजेंसी को भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होने की चेतावनी दी।

अजय चंद्राकर के सवाल पर मंत्री हुए नाराज

कार्यवाही के दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने पूरक प्रश्न पूछते हुए अनुबंध की शर्तों और पुलिस सत्यापन को लेकर सरकार से जवाब मांगा। सवालों की श्रृंखला पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल कुछ नाराज नजर आए। श्याम बिहारी जायसवाल ने जवाब देने के दौरान टोकाटोकी से नाराज होकर अजय चंद्राकर से कह दिया… “आप ही जवाब दे दीजिए।”
इस पर अजय चंद्राकर ने भी पलटवार करते हुए कहा, “आप प्रश्न में घुमाते भी हैं और नाराज भी हो जाते हैं।”
मंत्री ने जवाब दिया कि “प्रश्न ही घुमावदार है। जो जानकारी मांगी जाएगी, सरकार उपलब्ध कराएगी।”
मंत्री और विपक्षी विधायक के बीच हुई इस हल्की नोकझोंक ने सदन का माहौल कुछ देर के लिए गर्मा दिया।

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