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बेटी से प्रताड़ित डाक्टर ने लगायी फरियाद: वरिष्ठ डॉक्टर की गुहार पर हाईकोर्ट सख्त, SDM को 30 दिन में फैसला देने का निर्देश

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कवर्धा के वरिष्ठ चिकित्सक की याचिका पर SDM को निर्देश दिया है कि यदि शिकायत लंबित है तो 30 दिनों के भीतर सभी पक्षों को सुनकर कारणयुक्त आदेश पारित करें। मामला वरिष्ठ नागरिक अधिनियम 2007 से जुड़ा है।

July 16, 2026 4:03 AM
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Bilaspur Highcourt News छत्तीसगढ़ के एक सीनियर डाक्टर ने बेटी से प्रताड़ित होकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। डाक्टर की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कवर्धा के अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) को इस मामले में जल्द फैसला लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि यदि वरिष्ठ नागरिक की शिकायत अब भी लंबित है, तो सभी पक्षों को सुनकर 30 दिनों के भीतर कारणयुक्त (Speaking) आदेश पारित किया जाए।यह आदेश न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने कवर्धा निवासी वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गोवर्धन सिंह ठाकुर की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।

बेटी पर प्रताड़ना का आरोप, SDM से की थी शिकायत

दरअसल याचिकाकर्ता 62 वर्षीय डॉ. गोवर्धन सिंह ठाकुर कवर्धा में गोराज चिल्ड्रेन हॉस्पिटल का संचालन करते हैं। उन्होंने अपनी 31 वर्षीय पुत्री रश्मि सिंह ठाकुर पर लगातार विवाद और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया। डॉ. ठाकुर का कहना है कि पारिवारिक विवाद से परेशान होकर उन्होंने 10 दिसंबर 2025 को माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत कवर्धा के SDM के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी।

नोटिस जारी हुआ, लेकिन 7 महीने तक नहीं आया फैसला

शिकायत दर्ज होने के बाद SDM कार्यालय ने मामले में नोटिस जारी किया, लेकिन लगभग सात महीने बीत जाने के बावजूद अंतिम आदेश पारित नहीं किया गया। कार्रवाई में देरी से परेशान होकर डॉ. ठाकुर ने न्याय के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का रुख किया।

राज्य सरकार ने कोर्ट में क्या कहा?

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से प्रस्तुत पक्ष में कहा गया कि यदि शिकायत अब भी लंबित है, तो उसका निपटारा कानून के अनुसार शीघ्र किया जाएगा।

हाईकोर्ट ने SDM को दिए स्पष्ट निर्देश

हाईकोर्ट ने कहा कि माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 की धारा 5(4) के अनुसार ऐसे मामलों का निपटारा सामान्यतः 90 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए। विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 30 दिन का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है।कोर्ट ने SDM, कवर्धा को निर्देश दिया कि यदि शिकायत अब भी लंबित है, तो हाईकोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर सभी पक्षों की सुनवाई कर कानून के अनुरूप कारणयुक्त आदेश पारित किया जाए।

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