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DEO पर गाज़ गिरनी तय: मंत्री का कड़ा बयान, बोले, “ऐसे भ्रष्ट अफसरों की जरूरत नहीं” करोड़ों के घोटाले में एक्शन होना तय, जानिए पूरी करतूत

बलरामपुर के प्रभारी DEO मनीराम यादव पर 4.51 करोड़ रुपए की खरीदी में वित्तीय अनियमितता, फर्जी बिलिंग और नियमों की अनदेखी के आरोप लगे हैं। मंत्री रामविचार नेताम ने कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

September 7, 2026 4:36 PM
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बलरामपुर। जिला शिक्षा अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में किसी भी दिन कार्रवाई हो सकती है। करोड़ों रुपए के घोटाले के खुलासे के बाद अब सरकार की नजरें भी बलरामपुर के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव पर टेढ़ी हो गई है। आपको बता दे कि भ्रष्ट डीईओ मनीराम यादव एक बार फिर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर विवादों में हैं। उन पर वित्तीय वर्ष 2025-26 में करीब 4.51 करोड़ रुपये की खरीदी में नियमों की अनदेखी, फर्जी बिलिंग और सरकारी राशि के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं। मामले की जांच कलेक्टर के निर्देश पर कराई गई, जिसमें कई अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई है।

मामला सामने आने के बाद कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है और जिले में भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों के लिए कोई जगह नहीं है। मंत्री ने ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश करने की बात कही है।

4.57 करोड़ के बजट में 4.51 करोड़ की खरीदी पर उठे सवाल

जानकारी के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2025-26 में बलरामपुर शिक्षा विभाग को छह योजनाओं के लिए करीब 4.57 करोड़ रुपये का बजट मिला था। इसमें छात्राओं के लिए साइकिल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सामग्री, फर्नीचर और अन्य जरूरी सामान की खरीदी शामिल थी।
आरोप है कि खरीदी के दौरान जेम पोर्टल के नियमों का पालन नहीं किया गया। जिला स्तरीय क्रय समिति का गठन और सामग्री का भौतिक सत्यापन किए बिना भुगतान किए जाने की बात सामने आई है।

स्टॉक रजिस्टर में एंट्री नहीं, कैशबुक में कटिंग-ओवरराइटिंग

शिकायत के बाद जब जांच की गई तो जांच के दौरान कई खरीदी गई सामग्रियों की उपलब्धता और वितरण को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने का दावा किया गया है। कार्यालय के लिपिकों ने भी कई सामग्रियों की प्राप्ति और खरीदी से अनभिज्ञता जताई। वहीं कैशबुक में कटिंग, ओवरराइटिंग और अप्रमाणित सुधार पाए जाने की बात जांच रिपोर्ट में सामने आई है।

आरोपों के मुताबिक टेंडर प्रक्रिया से बचने के लिए 50-50 हजार रुपये के कई बिल बनाए गए और एक ही फर्म को भुगतान किए गए। करीब 42 लाख रुपये की विज्ञान किट की खरीदी में भी सत्यापन और स्टॉक एंट्री नहीं मिलने की बात कही गई है।

4025 साइकिलों के 1.62 करोड़ के भुगतान पर भी सवाल

जांच में 4025 साइकिलों के लिए करीब 1.62 करोड़ रुपये के भुगतान का भी उल्लेख किया गया है। इस भुगतान से संबंधित स्टॉक एंट्री और चालान नहीं मिलने का दावा है। इससे खरीदी और सामग्री की वास्तविक उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

स्टेशनरी से लेकर नाश्ते तक के खर्च पर सवाल

जांच के दौरान स्टेशनरी के नाम पर करीब 11.20 लाख रुपये बिना कोटेशन और स्टॉक एंट्री के भुगतान किए जाने की बात सामने आई। परीक्षा की मुद्रण सामग्री के लिए रांची की एक फर्म को करीब 17.96 लाख रुपये भुगतान किए गए।

वहीं शिक्षा विभाग की बैठकों में नाश्ते के नाम पर करीब 4 लाख रुपये खर्च किए जाने का भी उल्लेख है। जांच में कुछ ऐसे भुगतान भी पाए जाने का दावा है, जिनसे संबंधित सामग्री कार्यालय या भंडार में उपलब्ध नहीं थी। कई मामलों में डिलीवरी चालान नहीं मिले और कुछ बिलों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर भुगतान किए जाने की बात सामने आई।

कार्रवाई को लेकर मंत्री ने क्या कहा?

शिकायत के बाद कलेक्टर ने अपर कलेक्टर प्रमोद गुप्ता और जिला कोषालय अधिकारी दशरथ सोनी से जांच कराई। जांच में अनियमितताएं सामने आने के बाद भी अब तक FIR दर्ज नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

मंत्री रामविचार नेताम ने कहा है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और भ्रष्टाचार के आरोपों में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर शिक्षा विभाग की ओर से क्या कार्रवाई होती है और जिम्मेदारी किसकी तय होती है, इस पर नजर रहेगी।

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