बिलासपुर। सर्पदंश घोटाले में फंसी डाक्टर प्रियंका को ढाई महीने बाद जमानत मिल गयी है। फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट देने के आरोपों से घिरी डाक्टर प्रियंका सोनी को जुलाई महीने में गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि सर्पदंश से मौत के मामलों में कथित फर्जी पोस्टमार्टम (PM) रिपोर्ट तैयार कर मुआवजा दिलाने के मामले में डॉ. प्रियंका सोनी आरोपी है।
19 जुलाई को गिरफ्तार हुई महिला डाक्टर अब बिलासपुर हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय ने मामले की सुनवाई करते हुए जमानत मंजूर की। आपको बता दें कि विधानसभा में उठे मामले के बाद फर्जी तरीके सर्पदंश से मौत बताकर मुआवजे की जांच हुई। जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि सर्पदंश से झूठी मौत बताकर लाखों रुपये की मुआवजा राशि हड़पी गयी थी।
तीन मामलों में फर्जी PM रिपोर्ट का आरोप
डॉ. प्रियंका सोनी पर तीन अलग-अलग मामलों में फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने का आरोप है। इन तीनों मामलों में सर्पदंश से मौत के बाद मृतकों के परिजनों को शासन की ओर से 4-4 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया था।मामले में प्रशासनिक जांच के दौरान दस्तावेजों और प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद प्रकरण की जांच आगे बढ़ी। इसी कार्रवाई के तहत डॉ. प्रियंका सोनी को आरोपी बनाया गया था।
प्रशासनिक जांच में सामने आई थी गड़बड़ी
सर्पदंश से मौत के मामलों में दिए गए मुआवजे से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के दौरान प्रशासन को अनियमितताएं मिली थीं। जांच में पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर भी सवाल उठे। इसके बाद मामला पुलिस कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचा।अब हाईकोर्ट ने डॉ. प्रियंका सोनी को जमानत दे दी है। मामले में आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
आपको बता दें कि इस घोटाले में एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। सरकंडा पुलिस ने मामले में कड़ी कार्रवाई की है। प्रारंभिक जांच में यह मामला किसी एक व्यक्ति की धोखाधड़ी नहीं बल्कि संगठित रैकेट के रूप में सामने आया है. पुलिस के अनुसार इस पूरे खेल में कुछ आवेदकों के साथ डॉक्टरों, वकीलों और परिजनों की मिलीभगत की आशंका है. कथित तौर पर कानूनी और चिकित्सा दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी दावे पेश किए गए और सरकारी धन का गबन किया गया. कई संदिग्धों और आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।
पुलिस ने एसडीएम कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक को गिरफ्तार किया है। तहसील कार्यालय के बाबू हरिशंकर राठौर और गरीब बिंझवार भी पकड़े गए हैं। इस गिरोह में केवल बाबू ही नहीं, बल्कि पेशेवर लोग भी शामिल थे। महिला डॉक्टर प्रियंका सोनी और अधिवक्ता राजेंद्र कुमार चतुर्वेदी को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था। हालांकि डॉक्टर प्रियंका को अब जमानत मिल गयी है। अब तक जिले में 17 फर्जी सर्पदंश प्रकरण सामने आ चुके हैं. ये मामले सरकंडा, तोरवा, सिविल लाइन और बिल्हा थानों में दर्ज किए गए हैं।
विधानसभा में उठा मुद्दा तब शुरू हुई जांच
इस पूरे घोटाले का खुलासा तब हुआ, जब मामला विधानसभा पहुंचा। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने 2019 से 2023 के बीच हुए मुआवजा वितरण पर सवाल उठाए थे। उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए इस संदिग्ध खेल की जांच की मांग की थी। जब शासन ने जांच शुरू की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। सामान्य और संदिग्ध मौतों को सर्पदंश बताकर फाइलें तैयार की गई थीं।
जब इस मामले की जांच शुरू हुई, कई चौकाने वाली जानकारी आयी। जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जिन मामलों में सर्पदंश से मौत दिखाकर मुआवजा लिया गया, उनमें से कई मौतें वास्तव में बीमारी, जहर सेवन या अन्य कारणों से हुई थीं. आरोप है कि दस्तावेजों में हेरफेर और फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर मौत का कारण बदल दिया गया, ताकि सरकार से मिलने वाली मुआवजा राशि हासिल की जा सके।










