रायपुर। प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति क्या है, ये बताने की जरूरत नहीं? आरोप लगता है कि शिक्षक लापरवाही करते हैं, लेकिन हकीकत तो ये है कि शिक्षा विभाग के अफसर भी हद से ज्यादा लापरवाह हैं। उन्हें ना तो विभाग के आदेश की कोई परवाह है और ना ही निर्देशों की कोई कद्र, लिहाजा अब जिला शिक्षा अधिकारियों पर भी बड़े एक्शन की तैयारी है।
छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में लापरवाही को लेकर लोक शिक्षण संचालनालय ने सख्त रुख अपनाया है। भवन विहीन और मरम्मत योग्य शालाओं की जानकारी निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध नहीं कराने वाले जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। संचालनालय ने संबंधित अधिकारियों से तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है।
संचालनालय की इस कार्रवाई के बाद जिला शिक्षा कार्यालयों में हड़कंप की स्थिति है। अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।
एक सप्ताह में मांगी गई थी जानकारी
लोक शिक्षण संचालनालय ने पत्र क्रमांक 448, दिनांक 7 सितंबर 2026 के माध्यम से सभी जिला कार्यालयों को निर्देश जारी किए थे। इसमें अपने-अपने जिलों के अंतर्गत आने वाली भवन विहीन एवं मरम्मत योग्य शालाओं की विस्तृत जानकारी एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने को कहा गया था।
निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी अधिकांश जिला कार्यालयों की ओर से मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। संचालनालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
बलौदाबाजार और बलरामपुर से मिली जानकारी
संचालनालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, निर्धारित समय में बलौदाबाजार जिले से जानकारी उपलब्ध कराई गई, जबकि बलरामपुर जिले की ओर से भवन विहीन शालाओं से संबंधित जानकारी भेजी गई।इसके अलावा अन्य जिलों से अपेक्षित जानकारी समय-सीमा में उपलब्ध नहीं कराए जाने पर संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है।
शासकीय कार्यों में लापरवाही पर जताई नाराजगी
लोक शिक्षण संचालनालय ने अपने आदेश में इस विषय को महत्वपूर्ण बताते हुए जानकारी उपलब्ध कराने में हुई देरी पर नाराजगी जताई है। संचालनालय के अनुसार, स्कूल भवनों की वास्तविक स्थिति से संबंधित जानकारी शासन की योजनाओं और आवश्यक कार्यवाही के लिए महत्वपूर्ण है।समय-सीमा में जानकारी नहीं भेजे जाने को अधिकारियों की शासकीय कार्यों के प्रति उदासीनता और लापरवाही के रूप में देखा गया है।
अक्टूबर का वेतन रोकने की चेतावनी
मामले में संचालनालय ने और सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई प्रस्तावित करने की बात कही गई है।
नोटिस में अधिकारियों का अक्टूबर माह का वेतन रोकने की कार्रवाई प्रस्तावित किए जाने की चेतावनी दी गई है। हालांकि अंतिम कार्रवाई संबंधित अधिकारियों के जवाब और विभागीय प्रक्रिया के आधार पर होगी।


तीन दिन में देना होगा जवाब
कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों को तीन दिवस के भीतर अपना प्रतिवाद प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। जवाब के साथ मांगी गई जानकारी भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।
संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि तय समय-सीमा में यदि संतोषजनक जवाब या आवश्यक जानकारी प्राप्त नहीं होती है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध बिना विलंब अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जा सकती है।
स्कूल भवनों की स्थिति को लेकर विभाग सख्त
भवन विहीन और मरम्मत योग्य स्कूलों की जानकारी जुटाने का उद्देश्य संबंधित शालाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करना और जरूरत के मुताबिक निर्माण या मरम्मत की कार्रवाई करना है। ऐसे में जिलों से जानकारी नहीं मिलने पर विभाग ने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक माना है।
अब संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों की ओर से दिए जाने वाले जवाब के बाद यह तय होगा कि विभाग आगे क्या कार्रवाई करता है। फिलहाल लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा का पालन करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।










