रायपुर। छत्तीसगढ़ के सहायक शिक्षकों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। वेतन विसंगति को लेकर एक महत्वपूर्ण अपडेट है। सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन की मांग पर छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने वेतन विसंगति दूर करने की पहल की है।
फेडरेशन अध्यक्ष रविंद्र राठौर की अगुवाई में विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह से हुई मुलाकात के बाद अब विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने एक पत्र स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव को लिखा है। डाक्टर रमन सिंह ने पत्र लिखकर प्रदेश के लगभग 37,000 सहायक शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही वेतन विसंगति को दूर करने की मांग पर नियमानुसार त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
क्या है पूरा मामला?
आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक / समग्र फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को एक आवेदन सौंपा गया था। इस आवेदन में मांग की गई है कि प्रदेश के करीब 37,000 सहायक शिक्षकों को ‘वन-टाइम रिलैक्सेशन’ (एकमुश्त छूट) प्रदान किया जाए, ताकि उनकी वेतन विसंगति दूर हो सके और क्रमोन्नत वेतनमान का लाभ मिल सके। मुलाकात के दौरान भी रमन सिंह ने आश्वस्त किया था कि वेतन विसंगति के मुद्दे पर वो पहल करेंगे।
फेडरेशन के इसी आवेदन को संज्ञान में लेते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने स्कूल शिक्षा मंत्री को पत्र प्रेषित किया है। पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि संलग्न आवेदन का विधिवत परीक्षण कराया जाए और नियमानुसार उचित कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाए।
पत्र के मुख्य बिंदु:
• लगभग 37,000 सहायक शिक्षकों को फायदा: इस पूरी प्रक्रिया और मांग के दायरे में छत्तीसगढ़ के करीब 37,000 सहायक शिक्षक आते हैं, जिन्हें इस फैसले से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
• ‘वन-टाइम रिलैक्सेशन’ की मांग: फेडरेशन ने विशेष छूट (One-Time Relaxation) , क्रमोन्नत वेतनमान लागू करने का प्रस्ताव रखा है।
• शासन स्तर पर बढ़ी हलचल: विधानसभा अध्यक्ष के इस पत्र के बाद अब स्कूल शिक्षा विभाग में इस पर मंथन और त्वरित कार्रवाई होने की पूरी संभावना है, जिससे शिक्षकों में उम्मीद की नई किरण जगी है।
अब सबकी निगाहें स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव और विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं कि इस मामले में कितनी जल्दी सकारात्मक निर्णय लिया जाता है।

जानिये क्या है वेतन विसंगति
दरअसल सालों तक शिक्षाकर्मी रहने के बाद साल 2018 की तत्कालीन रमन सिंह सरकार ने सभी शिक्षाकर्मियों का स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन कर दिया। शिक्षा विभाग में संविलियन के बाद जो वेतनमान तय किया गया, वो अलग-अलग वर्गों के लिए अलग-अलग था। वर्ग एक यानि व्याख्याता व वर्ग दो यानि शिक्षक के वेतनमान में ज्यादा अंतर तो नहीं था, लेकिन शिक्षक व सहायक शिक्षक का जो वेतनमान तय किया गया, उसमें काफी अंतर था।
बताया जा रहा है कि सहायक शिक्षकों का वेतनमान कम निर्धारित किया गया, जिसकी वजह से सालों से सहायक शिक्षकों को हजारों रुपये नुकसान में काम करना पड़ रहा है। वेतन विसंगति दूर करने की मांग को लेकर ही सहायक शिक्षक फेडरेशन बना, जो बाद में सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन बना।
मुख्यमंत्री से भी वेतन विसंगति पर हुई थी चर्चा
सहायक शिक्षक फेडरेशन वेतन विसंगति की मांग को लेकर सालों से आंदोलन कर रहा है। साल 2021 में शिक्षकों ने बड़ा प्रदर्शन किया था। दावा किया जा रहा है कि संविलियन के बाद ये अब तक सबसे बड़ा प्रदर्शन था, लेकिन तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार ने महज आश्वासन के आधार पर आंदोलन को खत्म करा दिया। अब शिक्षक लगातार वेतन विसंगति की मांग को लेकर सरकार को घेर रहे हैं और अलग-अलग रणनीति के जरिये सरकार पर दवाब बना रहे हैं।
आपको बता दें कि जब पिछले दिनों सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन ने जशपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिला था, तो उस दौरान भी फेडरेशन के जिलाध्यक्ष अजय गुप्ता की मांग पर मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया था कि वेतन विसंगति मोदी की गारंटी में शामिल है और उस पर जरूर कोई निर्णय सरकार लेगी।










