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अनुकंपा नियुक्ति में 10% की सीमा बनी अड़चन, MBA-इंजीनियरिंग कर चुके आश्रितों को भी चतुर्थ श्रेणी का पद लेने की मजबूरी, फेडरेशन ने लिखा CM-CS को पत्र

छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने अनुकंपा नियुक्ति में 10 प्रतिशत सीमा शिथिल करने की मांग की है। फेडरेशन का कहना है कि उच्च शिक्षित आश्रितों को भी चतुर्थ श्रेणी का पद लेना पड़ रहा है।

September 23, 2026 11:16 AM
CG KARMCHARI ADHIKARI FEDRESHAN
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रायपुर: अनुकंपा नियुक्ति में रियायत को लेकर कर्मचारी अधिकारियों फेडरेशन ने मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। छत्तीसगढ़ में अनुकंपा नियुक्ति की 10 प्रतिशत सीमा को लेकर कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने सरकार के सामने बड़ा मुद्दा उठाया है। फेडरेशन का कहना है कि कई सरकारी कार्यालयों में तृतीय श्रेणी के स्वीकृत पदों की संख्या इतनी कम है कि 10 प्रतिशत की सीमा के कारण दिवंगत कर्मचारियों के पात्र आश्रितों को उनकी शैक्षणिक योग्यता के मुताबिक नियुक्ति नहीं मिल पा रही है।

कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने इस व्यवस्था में शिथिलता देने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपा है। संगठन का कहना है कि कई आश्रित MBA, इंजीनियरिंग और स्नातकोत्तर जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त हैं, लेकिन तृतीय श्रेणी का पद उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें चतुर्थ श्रेणी की नौकरी स्वीकार करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

7 पद वाले कार्यालय में 10% का हिसाब कैसे बन रहा अड़चन?

फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा के मुताबिक समस्या खासतौर पर उन जिला और कार्यालय स्तर के संस्थानों में ज्यादा है, जहां सहायक वर्ग-3 के स्वीकृत पदों की संख्या कम है।फेडरेशन ने उदाहरण देते हुए बताया कि किसी कार्यालय में सहायक वर्ग-3 के 7 पद स्वीकृत हैं और उनमें से 25 प्रतिशत पद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति के लिए आरक्षित हैं, तो इसके बाद 6 पद बचते हैं।इन 6 पदों का 10 प्रतिशत 0.60 पद होता है। पूर्णांक में एक पद नहीं बनने के कारण पात्र आश्रित के लिए अनुकंपा नियुक्ति का रास्ता मुश्किल हो जाता है।

MBA और इंजीनियरिंग करने वालों को भी करना पड़ रहा समझौता

फेडरेशन का कहना है कि दिवंगत सरकारी कर्मचारियों के कई आश्रित MBA, इंजीनियरिंग, पोस्ट ग्रेजुएशन जैसी योग्यता रखते हैं। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी योग्यता के आधार पर वे बेहतर श्रेणी के पदों के लिए पात्र हो सकते हैं।

लेकिन अनुकंपा नियुक्ति में लागू 10 प्रतिशत की सीमा के कारण तृतीय श्रेणी का पद उपलब्ध नहीं होने पर उन्हें चतुर्थ श्रेणी के पद स्वीकार करने पड़ रहे हैं।संगठन का तर्क है कि इससे न केवल आश्रित परिवार को तत्काल राहत देने का उद्देश्य प्रभावित होता है, बल्कि उच्च शिक्षित युवाओं की योग्यता का भी पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाता।

फेडरेशन ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से क्या कहा?

छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को सौंपे ज्ञापन में 10 प्रतिशत की सीमा को शिथिल करने की मांग की है।फेडरेशन चाहता है कि केवल किसी एक जिला या कार्यालय की सीमा के आधार पर पात्रता तय करने के बजाय राज्य स्तर पर उपलब्ध रिक्त पदों की स्थिति को देखा जाए।संगठन के अनुसार यदि राज्य स्तर पर रिक्त पदों की गणना की जाए तो पात्र आश्रितों को उनकी योग्यता के अनुसार तृतीय श्रेणी के पद उपलब्ध कराने की संभावना बन सकती है।

2020-21 की तरह नियमों में छूट की मांग

फेडरेशन ने शासन को वर्ष 2020-21 में दी गई छूट का हवाला देते हुए एक बार फिर नियमों में शिथिलता देने की मांग की है।संगठन का कहना है कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य दिवंगत शासकीय सेवक के परिवार को कठिन परिस्थिति में आर्थिक और सामाजिक सहारा देना है। ऐसे में नियमों की तकनीकी बाध्यता के कारण पात्र आश्रितों को लंबे समय तक नियुक्ति से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।

सरकार से जल्द आदेश जारी करने का आग्रह

फेडरेशन ने शासन से मांग की है कि दिवंगत कर्मचारियों के आश्रित परिवारों की परिस्थितियों और उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस मामले में जल्द निर्णय लिया जाए।संगठन ने 10 प्रतिशत सीमा में शिथिलता, राज्य स्तर पर रिक्त पदों की गणना और पात्र आश्रितों को योग्यता के अनुरूप तृतीय श्रेणी के पदों पर नियुक्ति की मांग प्रमुखता से रखी है।

 

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