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छत्तीसगढ़ में युवाओं के लिए 500 करोड़ की योजना, 8.23 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव; CM साय बोले- आइडिया को कारोबार में बदलें, युवा नौकरी मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें

छत्तीसगढ़ में युवाओं और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए 500 करोड़ की मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं निपुण योजना पर काम हो रहा है। CM साय ने निवेश, रोजगार और नए अवसरों पर बात की।

September 30, 2026 4:14 AM
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की फाइल फोटो
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में युवाओं के लिए रोजगार के साथ-साथ उद्यमिता और स्टार्टअप के नए रास्ते तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। राजधानी रायपुर में आयोजित यूथ इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव-2026 में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने युवाओं, स्टार्टअप उद्यमियों और नवाचारकर्ताओं से संवाद किया। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी केवल नौकरी तलाशने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने विचार, कौशल और तकनीक के जरिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकती है। राज्य सरकार की ओर से इसके लिए वित्तीय सहायता, तकनीकी सहयोग, अधोसंरचना और नीतिगत सुविधाओं पर काम किया जा रहा है।

500 करोड़ की योजना से स्टार्टअप को मिलेगा सहारा

मुख्यमंत्री ने युवाओं के सवालों के जवाब में बताया कि उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए ‘मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं निपुण योजना’ पर काम किया जा रहा है। इसके लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान बताया गया है। सरकार का उद्देश्य युवाओं के नए विचारों को व्यावसायिक रूप देने के लिए जरूरी सहायता उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना सहित केंद्र और राज्य की विभिन्न योजनाओं के जरिए भी युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। नई औद्योगिक नीति-2024 में नए उद्यमियों के लिए प्रोत्साहन के प्रावधान हैं। महिलाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और दिव्यांगजनों सहित विभिन्न वर्गों की उद्यमिता को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है।

नई औद्योगिक नीति के बाद 8.23 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव

कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री ने राज्य में निवेश की स्थिति का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ को करीब 8 लाख 23 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इनमें से कई परियोजनाओं पर जमीन पर काम भी शुरू हो चुका है।

उन्होंने बताया कि अब निवेश की संभावनाएं पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं हैं। ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल और दूसरे उभरते क्षेत्रों में भी अवसर बन रहे हैं।

युवाओं को औद्योगिक नीति समझने की सलाह

मुख्यमंत्री ने युवाओं से नई औद्योगिक नीति का अध्ययन करने और उसमें उपलब्ध प्रोत्साहनों का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नए औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं। उद्योग लगाने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम की व्यवस्था भी की गई है, ताकि निवेशकों और उद्यमियों को अलग-अलग विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें।

स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने वाले उद्योगों के लिए भी नीति में विशेष प्रावधान किए गए हैं।

2047 तक 75 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इस अवधि तक प्रदेश की अर्थव्यवस्था को करीब 75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य बताया गया।

उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने में सरकार के साथ युवा, किसान, उद्यमी, वैज्ञानिक, शोधार्थी और आम नागरिक सभी की भूमिका होगी। विशेष रूप से तकनीक, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में नई पीढ़ी की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया गया।

खेती से लेकर AI तक युवाओं के लिए अवसर

मुख्यमंत्री ने संवाद के दौरान अपने किसान परिवार और गांव बगिया से जुड़े अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि खेती-किसानी और पशुपालन से जुड़े रहने के कारण वे कृषि क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं को करीब से समझते हैं।

उन्होंने कृषि को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक कृषि के अलावा जैव प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण, डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी युवा उद्यमिता की संभावनाएं तलाश सकते हैं।

बस्तर की वनोपज से बन सकते हैं नए कारोबार

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की वन संपदा को भी युवा उद्यमिता से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बस्तर समेत वन क्षेत्रों में इमली, महुआ, सीताफल और औषधीय पौधों जैसी वनोपज उपलब्ध है।

इन उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के जरिए स्थानीय स्तर पर नए कारोबार खड़े किए जा सकते हैं। इससे वनोपज का मूल्य बढ़ने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए साधन तैयार होने की संभावना है।

सुगंधित धान की ब्रांडिंग और निर्यात पर जोर

सुगंधित चावल के निर्यात से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की धान विविधता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जवाफूल, विष्णुभोग, हनुमानभोग और शीतलचीनी जैसी सुगंधित धान की किस्में हैं।

उन्होंने कहा कि कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय प्रसंस्करण से लेकर पैकेजिंग, ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन और निर्यात तक पूरी श्रृंखला विकसित करने की जरूरत है। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ कृषि आधारित स्टार्टअप्स के लिए भी नए बाजार तैयार हो सकते हैं।

युवाओं ने फंडिंग से फिल्म सिटी तक पूछे सवाल

कॉन्क्लेव में युवाओं ने मुख्यमंत्री से सीधे सवाल भी किए। स्टार्टअप फंडिंग, ऋण में कोलेटरल, सरकारी योजनाओं की मदद और रोजगार सृजन जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

इसके अलावा हॉर्टिकल्चर विद्यार्थियों के कौशल के इस्तेमाल, सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर इकोसिस्टम तथा प्रस्तावित फिल्म सिटी से बनने वाले अवसरों को लेकर भी युवाओं ने सवाल पूछे।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से नए प्रयोग करने और असफलता से घबराने के बजाय उससे सीखने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसी नए विचार को वास्तविक बदलाव में बदलने के लिए मेहनत, कौशल और उद्यमिता का जुड़ना जरूरी है।

बायोटेक इन्क्यूबेशन सेंटर में आधुनिक लैब की सुविधाएं

कॉन्क्लेव के दौरान मुख्यमंत्री ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में बने सुभाष चंद्र बोस बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर का भी अवलोकन किया।

सेंटर में बायोसेफ्टी लेवल लैब, एनिमल कल्चर लैब, माइक्रोबियल सेल और प्लांट टिश्यू कल्चर लैब जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। स्टार्टअप्स के लिए इन्क्यूबेशन स्पेस, ड्राई एवं वेट लैब, प्लग एंड प्ले ऑफिस, कॉमन इंस्ट्रूमेंटेशन लैब और एनालिटिकल टेस्टिंग की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केंद्र युवाओं को उनके विचारों को अनुसंधान से आगे ले जाकर उत्पाद और उद्यम में बदलने का अवसर देगा। यहां मेंटरिंग, तकनीक हस्तांतरण, उत्पाद विकास और संस्थागत सहयोग की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

एग्रीटेक से डीप-टेक तक स्टार्टअप्स ने दिखाए नवाचार

तीन दिवसीय कॉन्क्लेव में अलग-अलग क्षेत्रों के स्टार्टअप्स और नवाचारकर्ताओं ने अपने उत्पाद और तकनीक प्रदर्शित किए। इनमें एग्रीटेक, खाद्य प्रसंस्करण, जैव प्रौद्योगिकी, ग्रामीण उद्यमिता, डिजिटल टेक्नोलॉजी, AI, डीप-टेक, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण जैसे क्षेत्र शामिल रहे।

इस मंच पर विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के बीच नए विचारों को तकनीक, बाजार और निवेश से जोड़ने पर चर्चा हुई।

‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत पौधरोपण

मुख्यमंत्री ने इन्क्यूबेशन सेंटर परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत मौलश्री का पौधा भी लगाया। इस दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने और लगाए गए पौधों के संरक्षण पर जोर दिया।

कॉन्क्लेव के समापन संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवाओं में प्रतिभा और क्षमता की कमी नहीं है। जरूरत उन्हें सही मंच और अवसर देने की है। सरकार की ओर से युवाओं के विचारों को उद्यम में बदलने के लिए जिस इकोसिस्टम को विकसित करने की बात कही जा रही है, उसमें स्टार्टअप, तकनीक, कृषि, जैव प्रौद्योगिकी और नए उद्योगों को प्रमुख क्षेत्र के तौर पर रखा गया है। कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल सहित अधिकारी, वैज्ञानिक, युवा उद्यमी, स्टार्टअप प्रतिनिधि और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

 

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