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शिक्षा विभाग के वसूलीबाज अफसर: वसूली के पैसे से तीन अफसरों ने खरीदी एक जैसी कार, स्कूलों में घूम-घूमकर शिक्षकों को बनाते थे टारगेट, फिर 50000 से लेकर 1 लाख तक की वसूली

शिक्षकों से वसूली और प्रताड़ना के आरोपों की जांच के बाद BEO दुर्गेश देवांगन, ABEO रविन्द्र नाथ साय और BRC देवेन्द्र सिंह पर कार्रवाई हुई। तीनों की एक जैसी कारों की चर्चा भी तेज है।

September 11, 2026 8:38 AM
शिक्षा विभाग में अफसरों की वसूली रैकेट का पर्दाफाश
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जशपुर/फरसाबहार। शिक्षा विभाग में अफसरों की अजब गजब करतूत सामने आती रहती है। लेकिन जशपुर में शिक्षा विभाग के जिन तीन अफसरों की कारगुजारी उजागर हुई है, उसने शिक्षा विभाग का सर शर्म से नीचा कर दिया है। आरोप है कि वसूलीबाज तीन अफसर पहले घूम-घूमकर शिक्षकों के रूप में अपना शिकार ढूंढते थे और फिर उनके वसूली किया करते थे। जब शिकायत हुई, तो जांच में अफसरों की सारी पोल खुल गयी।

पूरा मामला जशपुर के फरसाबहार विकासखंड का है, जहां स्कूलों का निरीक्षण कर शिक्षकों से कथित तौर पर वसूली और मानसिक प्रताड़ना की खबरें सामने आयी है। गंभीर आरोपों की जांच के बाद शिक्षा विभाग के तीन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है। फरसाबहार के BEO दुर्गेश देवांगन को जिला पंचायत कार्यालय और ABEO रविन्द्र नाथ साय को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अटैच किया गया है, जबकि BRC देवेन्द्र सिंह को कलेक्टर ने निलंबित कर दिया है।

कमाल की बात ये है कि इन तीनों अफसरों ने हाल ही में एक जैसी कार भी खरीदी है। आरोप है कि ये कार वसूली के पैसे से ही ली गयी थी। लिहाजा, इन अधिकारियों पर कार्रवाई के बीच अब तीनों की एक जैसी नई कारें खरीदने का मामला भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि तीनों अधिकारियों ने एक ही कंपनी और एक ही मॉडल की नई कार खरीदी है। शिक्षकों से कथित वसूली की शिकायतों के बीच एक जैसे वाहन खरीदे जाने को लेकर विकासखंड में तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं।

शिकायतों के बाद हुई जांच, आरोप पाए गए सही

छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक, समग्र शिक्षक फेडरेशन ने फरसाबहार के इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ शिक्षकों को कथित तौर पर प्रताड़ित करने और वसूली किए जाने की शिकायत 5 अगस्त को मुख्यमंत्री से की थी। शिकायत के बाद जिला पंचायत स्तर पर जांच टीम गठित की गई।

जांच के दौरान शिक्षकों द्वारा लगाए गए शोषण, मानसिक प्रताड़ना और पद के दुरुपयोग के आरोप सही पाए जाने के बाद कलेक्टर कार्यालय से बुधवार रात तीनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश जारी किया गया।

स्कूल पहुंचते ही कमियां निकालने और कार्रवाई की धमकी का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि तीनों अधिकारी स्कूलों में निरीक्षण के नाम पर पहुंचते थे और छोटी-छोटी कमियां मिलने पर शिक्षकों को निलंबन की धमकी दी जाती थी। आरोप है कि कार्रवाई से बचने के लिए शिक्षकों से 50 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक की मांग की जाती थी।

शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, जो शिक्षक कथित तौर पर पैसे दे देते थे, वे कार्रवाई से बच जाते थे, जबकि पैसे नहीं देने वाले शिक्षकों के खिलाफ उच्च कार्यालय को प्रतिवेदन भेजकर कार्रवाई की जाती थी। जो जानकारी आयी है, उसके मुताबिक शिक्षकों ने अपनी शिकायत में 60 हजार, 80 हजार व 50 हजार की रकम मांगने को जो आरोप लगाया था, उसके साक्ष्य भी जांच टीम को दिये गये।

तीनों की एक जैसी कार बनी चर्चा का विषय

इसी बीच तीनों अधिकारियों द्वारा एक ही कंपनी और एक ही मॉडल की नई कारें खरीदे जाने की चर्चा ने पूरे मामले को नया एंगल दे दिया है। शिक्षकों से वसूली की शिकायतें पहले से चर्चा में थीं और अब तीनों के एक जैसे वाहन खरीदने की बात सामने आने के बाद विकासखंड में इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं।

लोगों के बीच चर्चा है कि शिक्षा विभाग का कामकाज सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था के बजाय किसी ‘टारगेट और रिवार्ड’ सिस्टम की तरह चलाया जा रहा था। हालांकि, सिर्फ एक जैसी कार खरीदना अपने आप में किसी अवैध कमाई का प्रमाण नहीं है।

प्रधान पाठक के निलंबन के बाद ग्रामीणों ने किया था स्कूल का बहिष्कार

फरसाबहार में इन अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुका है। करीब एक महीने पहले प्राथमिक शाला सिकिरमा की प्रधान पाठक सुगंती तिर्की को कथित तौर पर 10 मिनट देर से स्कूल पहुंचने के मामले में निलंबित कर दिया गया था।इस कार्रवाई के विरोध में ग्रामीणों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया था। करीब पांच दिनों तक स्कूल में बच्चों की उपस्थिति नहीं हुई। बाद में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद सुगंती तिर्की को फिर उसी स्कूल में पदस्थ किया गया।

कार्रवाई के बाद शिक्षकों ने ली राहत की सांस

तीनों अधिकारियों पर हुई कार्रवाई के बाद फरसाबहार विकासखंड में पदस्थ शिक्षकों ने राहत की सांस ली है। अब पूरे मामले में प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि शिक्षकों से कथित वसूली के आरोपों और अधिकारियों की संपत्ति व खर्च से जुड़े आरोपों की आगे कोई जांच होती है या नहीं।

 

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