शिक्षक ट्रांसफर। शिक्षा विभाग से जुड़े ट्रांसफर मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा अहम आदेश दिया है। शिक्षा विभाग के स्थानांतरण मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी सक्षम स्थानांतरण समिति की ओर से अभ्यावेदन पर निर्णय नहीं होने का मामला सामने आया है। शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला बुंदेली के प्रधानपाठक बृजेश कुमार शर्मा के स्थानांतरण को लेकर हाईकोर्ट बिलासपुर ने 14 अगस्त 2026 को आदेश जारी कर सक्षम समिति को अभ्यावेदन पर निर्धारित अवधि में निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। बताया गया है कि निर्धारित 20 दिन की अवधि बीतने के बाद भी अभ्यावेदन पर कोई आदेश जारी नहीं हुआ। इसी बीच 23 सितंबर को प्रधानपाठक को भारमुक्त कर दिया गया।
प्रशासनिक आधार पर किया गया था स्थानांतरण
मामला शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला बुंदेली के प्रधानपाठक बृजेश कुमार शर्मा के स्थानांतरण से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार विकासखंड शिक्षा अधिकारी मनेंद्रगढ़ की ओर से प्रशासनिक आधार पर उनका स्थानांतरण जिला शिक्षा अधिकारी, सूरजपुर के विकल्प पर किया गया था।
स्थानांतरण आदेश से असंतुष्ट होकर बृजेश कुमार शर्मा ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट बिलासपुर का दरवाजा खटखटाया। याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 14 अगस्त 2026 को मामले में एक प्रक्रिया निर्धारित करते हुए संबंधित सक्षम समिति के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का अवसर दिया।
हाईकोर्ट ने 10 दिन में अभ्यावेदन देने कहा था
14 अगस्त के आदेश में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को राज्य स्थानांतरण नीति के खंड 8 के तहत गठित सक्षम स्थानांतरण समिति के समक्ष 10 दिन के भीतर अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत करने को कहा था।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर अभ्यावेदन प्रस्तुत किया जाता है, तो सक्षम समिति उस पर कानून और लागू स्थानांतरण नीति के प्रावधानों के अनुसार विचार करेगी।
इस तरह हाईकोर्ट ने स्थानांतरण को लेकर सीधे अंतिम निर्णय देने के बजाय संबंधित सक्षम समिति को अभ्यावेदन पर नियमों के अनुरूप विचार करने का निर्देश दिया था।
20 दिन के भीतर तर्कसंगत आदेश का निर्देश
हाईकोर्ट के आदेश में सक्षम समिति को अभ्यावेदन पर 20 दिन के भीतर तर्कसंगत और स्पष्ट आदेश जारी करने की बात कही गई थी। इसके बाद प्रधानपाठक की ओर से निर्धारित समय-सीमा के भीतर अध्यक्ष एवं सचिव, सक्षम स्थानांतरण समिति, स्कूल शिक्षा विभाग रायपुर के समक्ष अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत किए जाने की बात कही गई है।
याचिकाकर्ता पक्ष के अनुसार, हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित 20 दिन की अवधि भी पूरी हो चुकी है, लेकिन अभ्यावेदन पर समिति की ओर से अब तक कोई निर्णय जारी नहीं किया गया है।
निर्णय का इंतजार, लेकिन स्थानांतरण आदेश पर रोक नहीं
मामले में एक महत्वपूर्ण स्थिति यह है कि अभ्यावेदन पर निर्णय लंबित रहने के दौरान स्थानांतरण आदेश पर स्थगन, संशोधन या निरस्तीकरण का कोई अलग आदेश जारी नहीं हुआ।
ऐसे में मूल स्थानांतरण आदेश प्रभावी स्थिति में बना रहा। इसी क्रम में विकासखंड शिक्षा अधिकारी मनेंद्रगढ़ की ओर से बृजेश कुमार शर्मा को 23 सितंबर 2026 को कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी, एमसीबी की ओर से भारमुक्त कर दिया गया।
इस कार्रवाई के बाद अब मामला एक बार फिर चर्चा में है कि जब हाईकोर्ट के निर्देश के तहत सक्षम समिति के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत किया जा चुका था और उस पर निर्धारित समय-सीमा में निर्णय लिया जाना था, तो निर्णय जारी होने से पहले ही स्थानांतरण आदेश के आधार पर भारमुक्त किए जाने की स्थिति कैसे बनी।
हाईकोर्ट के आदेश की प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले में मुख्य बिंदु हाईकोर्ट के आदेश की प्रक्रिया और उसके बाद हुई प्रशासनिक कार्रवाई है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सक्षम समिति के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर दिया था। साथ ही समिति को तय अवधि में अभ्यावेदन पर विचार कर स्पष्ट आदेश जारी करने को कहा था।
अब, यदि अभ्यावेदन पर निर्णय लंबित रहा और इस दौरान स्थानांतरण आदेश के आधार पर कर्मचारी को भारमुक्त कर दिया गया, तो मामले में आगे की प्रशासनिक और कानूनी स्थिति महत्वपूर्ण हो सकती है।
हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि हाईकोर्ट के आदेश में स्थानांतरण आदेश पर स्वतः रोक लगाए जाने का निर्देश नहीं था। इसलिए मामले की वास्तविक स्थिति समझने के लिए हाईकोर्ट के मूल आदेश, सक्षम समिति के समक्ष प्रस्तुत अभ्यावेदन और उसके बाद जारी प्रशासनिक आदेशों को एक साथ देखना जरूरी होगा।
23 सितंबर को किया गया भारमुक्त
उपलब्ध जानकारी के अनुसार 23 सितंबर 2026 को बृजेश कुमार शर्मा को जिला शिक्षा अधिकारी, एमसीबी कार्यालय की ओर से भारमुक्त कर दिया गया। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई जब सक्षम स्थानांतरण समिति के समक्ष प्रस्तुत अभ्यावेदन पर निर्णय लंबित बताया जा रहा है।
इससे अब संबंधित पक्ष के लिए समिति के निर्णय के साथ-साथ आगे की कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हो गई है। यदि समिति बाद में अभ्यावेदन पर कोई आदेश जारी करती है, तो उस आदेश के आधार पर स्थानांतरण की आगे की स्थिति तय हो सकती है।
शिक्षा विभाग में स्थानांतरण मामलों में प्रक्रिया अहम
शिक्षा विभाग में स्थानांतरण से जुड़े मामलों में राज्य की स्थानांतरण नीति और उसके तहत गठित सक्षम समितियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। जब किसी कर्मचारी के स्थानांतरण आदेश को न्यायालय के समक्ष चुनौती दी जाती है, तो कई मामलों में न्यायालय संबंधित प्राधिकारी को कर्मचारी के अभ्यावेदन पर नियमों के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश देता है।
इस मामले में भी हाईकोर्ट ने इसी प्रक्रिया के तहत प्रधानपाठक को सक्षम समिति के समक्ष अभ्यावेदन देने का अवसर दिया था। अब निर्धारित समय-सीमा में निर्णय नहीं होने और इसके बाद भारमुक्त किए जाने की कार्रवाई के कारण मामले में आगे समिति या न्यायालय के स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।
क्या है पूरा मामला?
- कर्मचारी: बृजेश कुमार शर्मा, प्रधानपाठक
- विद्यालय: शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला बुंदेली
- स्थानांतरण: प्रशासनिक आधार पर
- हाईकोर्ट आदेश: 14 अगस्त 2026
- अभ्यावेदन की समय-सीमा: 10 दिन
- समिति को निर्णय की अवधि: 20 दिन
- अभ्यावेदन: सक्षम स्थानांतरण समिति, स्कूल शिक्षा विभाग रायपुर के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की जानकारी
- समिति का निर्णय: उपलब्ध जानकारी के अनुसार अब तक जारी नहीं
- भारमुक्ति: 23 सितंबर 2026









