अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ में सेवारत शिक्षकों की TET अनिवार्यता और पदोन्नति का मुद्दा लगातार गरमाता जा रहा है। मुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री से बातचीत के बाद अब शिक्षकों ने आंदोलन व प्रदर्शन का रास्ता भी अपनाना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में 10 सितंबर 2026 को छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के बैनर तले सरगुजा संभाग के बड़ी संख्या में शिक्षक संयुक्त संचालक कार्यालय, अंबिकापुर पहुंचे।
शिक्षकों ने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री के नाम संयुक्त संचालक को ज्ञापन एवं अभ्यावेदन सौंपकर मांग की कि TET के आधार पर किसी वरिष्ठ शिक्षक को पदोन्नति से वंचित न किया जाए।शिक्षकों का कहना है कि जब उनकी नियुक्ति हुई थी, उस समय TET जैसी कोई प्रक्रिया लागू नहीं थी। उन्हें सेवा के दौरान भी TET पास करने के संबंध में कोई आदेश या स्पष्ट अवसर नहीं दिया गया। ऐसे में अब TET को आधार बनाकर पदोन्नति रोकना उनके लिए अन्यायपूर्ण है।
अजय गुप्ता ने उठाया सेवा शर्तों और वरिष्ठता का मुद्दा
ज्ञापन कार्यक्रम के दौरान जशपुर जिलाध्यक्ष व तेज तर्रार शिक्षक नेता अजय गुप्ता ने शिक्षकों की सबसे बड़ी चिंता को सामने रखा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति से लेकर संविलियन और अब तक विभाग की ओर से जारी किए गए सेवा संबंधी आदेशों में कहीं भी TET की अनिवार्यता का उल्लेख नहीं किया गया है।
अजय गुप्ता ने कहा कि जब शिक्षकों को कभी TET पास करने के लिए आदेशित ही नहीं किया गया और न ही इस संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी या अवसर दिया गया, तो अचानक TET को पदोन्नति से जोड़ना उचित नहीं है।उन्होंने कहा कि शिक्षकों की सेवा, अनुभव और वरिष्ठता को नजरअंदाज करके केवल TET के आधार पर पदोन्नति रोकना उनके अधिकारों पर सीधा असर डालता है। उनका कहना था कि जिन शिक्षकों ने वर्षों तक विभाग में सेवाएं दी हैं, उन्हें पदोन्नति प्रक्रिया में उचित अवसर मिलना चाहिए।
“बिना अवसर दिए पदोन्नति रोकना सेवा और वरिष्ठता पर कुठाराघात”
अजय गुप्ता ने कहा कि विभागीय सेवा शर्तों में जब TET का प्रावधान नहीं था, तो पुराने शिक्षकों पर अचानक इसे लागू करने से पहले शासन को पूरी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि TET पास करने के लिए निर्धारित समयावधि के भीतर किसी भी शिक्षक को केवल TET नहीं होने के कारण पदोन्नति से वंचित नहीं किया जाए।उन्होंने कहा कि शिक्षकों को पहले TET पास करने का पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए। इसके बाद ही पदोन्नति को लेकर कोई निर्णय लिया जाना चाहिए।
संदीप पाण्डेय बोले- 2028 तक पदोन्नति से वंचित न किया जाए
संगठन के सरगुजा जिलाध्यक्ष संदीप कुमार पाण्डेय ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 में लाया गया और अप्रैल 2010 से लागू हुआ। इसके बाद शिक्षक पात्रता परीक्षा की व्यवस्था अस्तित्व में आई। ऐसे में पहले से सेवा में कार्यरत शिक्षकों पर नई व्यवस्था को किस तरह लागू किया जाए, इस पर शासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए।संदीप पाण्डेय ने कहा कि संगठन की मांग है कि 31 अगस्त 2028 तक की समयावधि समाप्त होने से पहले किसी भी शिक्षक को TET पास नहीं होने के आधार पर पदोन्नति से वंचित नहीं किया जाए।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षकों को TET की योग्यता हासिल करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया गया है। ऐसे में इस अवधि के दौरान वरिष्ठ शिक्षकों की पदोन्नति रोकना उचित नहीं होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि शासन TET को लेकर कोई व्यवस्था लागू करना चाहता है, तो सभी संबंधित शिक्षकों को पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए। संगठन की मांग है कि सरकार या तो इन शिक्षकों को TET अनिवार्यता से राहत देने की पहल करे या फिर विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित कर सभी प्रभावित शिक्षकों को परीक्षा पास करने का पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए।
शिक्षकों ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से लगाई गुहार
संयुक्त संचालक कार्यालय में पहुंचे शिक्षकों ने अपने अभ्यावेदन में मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री से मांग की कि TET को पदोन्नति के रास्ते में बाधा न बनाया जाए।शिक्षकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति के समय TET अनिवार्य नहीं था और सेवा के दौरान भी उन्हें TET के लिए कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिया गया।
अब अचानक TET को पदोन्नति से जोड़ने से वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों की वरिष्ठता और पदोन्नति प्रभावित हो सकती है।शिक्षकों ने मांग की कि शासन इस पूरे मामले में ऐसी व्यवस्था बनाए जिससे पुराने शिक्षकों को सेवा अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति का अवसर मिल सके और TET के लिए निर्धारित समयसीमा का भी पालन हो।
“संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के अधिकारों का भी सवाल”
संदीप पाण्डेय ने कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों को TET पास करने के लिए निर्धारित समय दिया है तो उस अवधि से पहले केवल TET के आधार पर किसी वरिष्ठ शिक्षक को पदोन्नति से रोकना उचित नहीं होगा। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 से जुड़े अधिकारों का विषय भी बताया।
संगठन ने शासन से मांग की है कि इस मामले में शिक्षकों के पक्ष को ध्यान में रखते हुए जल्द स्पष्ट निर्णय लिया जाए, ताकि पदोन्नति प्रक्रिया में हजारों शिक्षकों के सामने असमंजस की स्थिति समाप्त हो सके।
संभाग के कई जिलों से पहुंचे शिक्षक
ज्ञापन कार्यक्रम में सरगुजा संभाग के विभिन्न जिलों से शिक्षक और संगठन के पदाधिकारी शामिल हुए। संगठन की ओर से बताया गया कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए TET और पदोन्नति से जुड़े मुद्दे पर शासन के समक्ष अपना पक्ष रखा।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश महासचिव टिकेश्वर भोय, प्रदेश पदाधिकारी रीता भगत, प्रदेश सलाहकार केसरी लाल पैंकरा, संतोष यादव, प्रदेश संयुक्त सचिव यशवंत यादव, प्रदेश संगठन मंत्री धनंजय सिंह, कोरिया जिलाध्यक्ष विश्वास भगत, सूरजपुर जिलाध्यक्ष विजय साहू, बलरामपुर जिलाध्यक्ष देवनारायण गुप्ता, जशपुर जिलाध्यक्ष अजय गुप्ता, एमसीबी जिलाध्यक्ष सुरेश नेताम और सरगुजा जिलाध्यक्ष संदीप पाण्डेय मौजूद रहे।
इसके अलावा मुकेश सिन्हा, शिवचरण नागेश, छत्रपति सिंह, प्रमोद सिंह, राम सिंह कमरों, श्यामलाल राम, देव कुमार सिंह, लोकपाल मरावी, गौरी शंकर, पंकज कुमार लहरे, राजूराम खलखो, रविन्द्र ओटी, बजरंग दास, सचिन महतो, जितेंद्र अहिरवार, विकास भगत, श्रवण पैंकरा, ज्ञानलता, अंजना बखला, रवि किरण डन सेना, राकेश सिंह, फरसा बहार नरेश कुमार यादव, पूरेन्दर यादव, महेंद्र सिंह, संतोष जाटवर, लखन भारद्वाज, कमल किशोर मांझी, छात्रधारी सिंह, मनोज सिंह, एके दुबे, तोमर सिंह, प्रभाकर मुखर्जी, उमा सोनवानी, तिलक देव, सरोज शर्मा, महेन्द्र राजवाड़े, बृजेश तिवारी, रविशंकर पाण्डेय, शशि भूषण दुबे, अमोल सिंह, बनारसी सिंह, महिपाल सिंह, माधुरी तिर्की, विवेक पैकरा, दिनेश्वरी पैकरा, फूलकेरिया, नवल किशोर गुप्ता, बोस प्रताप और सुमेर सिंह सहित सैकड़ों शिक्षक उपस्थित रहे।
अब शासन के निर्णय पर टिकी नजर
सरगुजा संभाग में दिए गए इस ज्ञापन के बाद अब शिक्षकों की नजर शासन के अगले कदम पर है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि उसकी मांग केवल पदोन्नति का अवसर बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों की सेवा शर्त, वरिष्ठता और पदोन्नति अधिकार को सुरक्षित रखने की है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि TET को लेकर स्पष्ट नीति बनने तक ऐसे शिक्षकों की पदोन्नति प्रभावित नहीं होनी चाहिए, जिन्हें उनकी नियुक्ति के समय TET की अनिवार्यता के बारे में कोई प्रावधान नहीं बताया गया था।










