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छत्तीसगढ़ के शिक्षक प्रमोशन में आखिर ऐसा क्या हुआ? हाईकोर्ट के एक सवाल ने बढ़ाई सरकार की मुश्किलें, कोर्ट ने पूछा, आखिर LB संवर्ग के शिक्षक ही….

छत्तीसगढ़ शिक्षक पदोन्नति मामले में बिलासपुर हाई कोर्ट ने 2025 की DPC में 50% अनुपात और ई-कैडर के पात्र शिक्षकों को शामिल नहीं करने पर राज्य सरकार से जवाब मांगा।

September 22, 2026 9:50 AM
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Bilaspur High Court News: छत्तीसगढ़ में शिक्षक पदोन्नति से जुड़े मामले में बिलासपुर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने ई कैडर को प्रमोशन से बाहर रखने पर सवाल पूछा है। कोर्ट ने पूछा है कि आखिर क्यों सिर्फ LB कैडर को ही प्रमोशन क्यों मिला। ये मामला वर्ष 2025 में हुई विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) में निर्धारित 50 प्रतिशत अनुपात का पालन नहीं करने और पदोन्नति के लिए पात्र शिक्षक (ई-कैडर) को प्रक्रिया में शामिल नहीं किए जाने से जुड़ा है।

ब्रजेश मिश्रा समेत कई शिक्षकों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार से इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।मामले की सुनवाई 21 सितंबर 2026 को जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य के अधिवक्ता को सरकार से आवश्यक जानकारी लेकर अगली सुनवाई में यह बताने का निर्देश दिया कि वर्ष 2025 की डीपीसी में केवल शिक्षक (एलबी कैडर) को ही पदोन्नति के लिए क्यों शामिल किया गया।

2025 की DPC में ई-कैडर को क्यों नहीं किया गया शामिल?

याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट के सामने पदोन्नति के लिए पात्र शिक्षकों के कैडर से जुड़ा मुद्दा उठाया गया। उनका कहना है कि शिक्षक (ई-कैडर) के ऐसे कर्मचारी, जो 1 जनवरी 2025 से पदोन्नति के लिए पात्र थे, उन्हें भी DPC की प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए था।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने विशेष रूप से राज्य सरकार से पूछा कि वर्ष 2025 में हुई DPC में निर्धारित 50 प्रतिशत अनुपात को क्यों नहीं अपनाया गया और केवल शिक्षक (एलबी कैडर) के मामलों पर ही विचार क्यों किया गया।यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि याचिकाओं में पदोन्नति प्रक्रिया में अलग-अलग कैडर के पात्र शिक्षकों को शामिल किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

सरकार से मांगी गई पूरी स्थिति

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को मामले से संबंधित आवश्यक जानकारी जुटाकर अगली सुनवाई में स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता वाईएस ठाकुर ने पक्ष रखा।वहीं, कई हस्तक्षेपकर्ताओं और अन्य पक्षकारों की ओर से भी अधिवक्ता अदालत में उपस्थित हुए। चूंकि इस विषय से संबंधित कई याचिकाएं हाई कोर्ट में लंबित हैं, इसलिए सुनवाई के दौरान अलग-अलग पक्षों की ओर से अपने-अपने मुद्दे रखे गए।

अंतरिम राहत अगली सुनवाई तक जारी

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पहले से दी गई अंतरिम राहत को अगली सुनवाई तक जारी रखने की बात स्पष्ट की है। राज्य सरकार को आवश्यक निर्देश प्राप्त कर मामले की स्थिति अगली सुनवाई में बतानी होगी।मुख्य याचिकाओं को कोर्ट ने दो सप्ताह बाद वाले सप्ताह में सुनवाई के लिए रखने का निर्देश दिया है।

तीन याचिकाएं मुख्य मामलों से अलग

सुनवाई के दौरान तीन याचिकाओं को मुख्य याचिकाओं के समूह से अलग कर दिया गया। इन मामलों में संबंधित अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि उनके मामलों में उठाए गए मुद्दे बाकी याचिकाओं से अलग हैं।राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इन तीन मामलों में उठाए गए मुद्दों पर पहले ही निर्णय हो चुका है। संबंधित आदेश अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए राज्य की ओर से समय मांगा गया।इसके बाद हाई कोर्ट ने इन तीनों मामलों को मुख्य याचिकाओं से अलग करते हुए 23 सितंबर 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

 

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