बिलासपुर 9 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में अनुकंपा नियुक्ति को लेकर अहम सुनवाई की। कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामले में राज्य सरकार और संबंधित विभाग से कड़ा जवाब मांगा है। अदालत ने सवाल किया है कि जब शासन की अनुकंपा नियुक्ति नीति में स्पष्ट प्रावधान है कि मृत शासकीय कर्मचारी के आश्रित को एक महीने के भीतर आवेदन प्रपत्र उपलब्ध कराया जाए, तो ऐसा क्यों नहीं किया गया।
हाई कोर्ट ने प्रतिवादियों को एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण और संबंधित दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए हैं।याचिका के अनुसार, याचिकाकर्ता के पिता शासकीय सेवा में कार्यरत थे और सेवाकाल के दौरान उनका निधन हो गया।
इसके बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया गया, लेकिन विभाग ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि कर्मचारी की मृत्यु के तीन महीने के भीतर आवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया, जबकि नीति के अनुसार निर्धारित समयसीमा का पालन जरूरी था।यह आदेश न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने विनोद कुमार डोमर उर्फ विनोद कुमार मांझरे द्वारा दायर रिट याचिका की सुनवाई के दौरान पारित किया।
नीति का हवाला देकर दी चुनौती
अधिवक्ता रवींद्र शर्मा ने याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी कि 14 जून 2013 की अनुकंपा नियुक्ति नीति की कंडिका 15(1) के अनुसार किसी शासकीय कर्मचारी की मृत्यु होने पर संबंधित विभाग का दायित्व है कि वह एक महीने के भीतर आश्रित परिवार को स्वयं आवेदन का प्रपत्र उपलब्ध कराए।
यदि विभाग ने यह जिम्मेदारी पूरी नहीं की, तो आवेदन में हुई देरी के लिए आश्रित को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।वहीं, प्रतिवादी क्रमांक-3 और 4 की ओर से अधिवक्ता पंकज अग्रवाल ने तर्क दिया कि आवेदन निर्धारित समयसीमा के भीतर प्राप्त नहीं हुआ, इसलिए उसे अस्वीकार किया गया।
हाई कोर्ट ने मांगा स्पष्ट जवाब
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि प्रतिवादियों के जवाब में इस बात का कोई उल्लेख नहीं है कि मृतक कर्मचारी के आश्रित को निर्धारित समय के भीतर आवेदन फॉर्म उपलब्ध कराया गया था या नहीं। इस पर हाई कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण और संबंधित अभिलेख पेश करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई अगले से अगले सप्ताह होगी। राज्य शासन की ओर से पैनल अधिवक्ता अमनदीप सिंह ने पक्ष रखा।










