धमतरी। प्रदेश सहित धमतरी जिले में हलषष्ठी यानी कमरछठ पर्व उत्साह के साथ मनाया गया। जिले के नगरी नगर में भी कमरछठ पर्व को लेकर माताओं और बहनों में भारी उत्साह देखने को मिला। नगरी के मां गायत्री मंदिर परिसर एवं वार्ड क्रमांक 12 के डीहपारा में महिलाएं एक जगह एकत्रित हुईं और विधि-विधान एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना कर एक-दूसरे को पर्व की बधाई दी।
संतान की दीर्घायु के लिए रखा व्रत।
हलषष्ठी पर्व पर माताएं अपनी संतान की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि की कामना को लेकर व्रत रखती हैं। महिलाओं ने श्रृंगार कर पूरे श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की और अपनी संतानों की खुशहाली के लिए प्रार्थना की।
सगरी बनाकर की पूजा
कमरछठ पर्व पर पूजा स्थल पर सगरी यानी मिट्टी का कुंड बनाने की परंपरा है। महिलाओं ने सगरी में पानी डालकर उसके चारों ओर पूजा-अर्चना की। इसके साथ ही पर्व की पारंपरिक पूजा सामग्री रखकर विधिवत पूजा की गई। महिलाओं ने हलषष्ठी से जुड़ी कथा सुनी और विभिन्न परंपराओं का निर्वहन किया।
पसहर चावल सहित इन चीजों का होता है उपयोग।
इस पर्व में स्थानीय परंपरा के अनुसार पसहर चावल, महुआ, लाई, फल-फूल सहित अन्य पूजा सामग्री का उपयोग किया जाता है। कई स्थानों पर महिलाएं हल से जुती जमीन से प्राप्त अनाज का सेवन नहीं करतीं और बिना हल से उगाई गई चीजों को प्राथमिकता देती हैं।
भगवान बलराम से जुड़ा है पर्व।
हलषष्ठी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी से जुड़ा माना जाता है। बलराम जी का प्रमुख अस्त्र हल है, इसलिए इस पर्व का संबंध हल, खेती-किसानी और प्रकृति से भी माना जाता है। माताएं इस दिन व्रत रखकर संतान के सुखी, स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना करती हैं।
नगरी में दिखा उत्साह।
नगरी के मां गायत्री मंदिर परिसर और डीहपारा सहित कई स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की। इस दौरान सगरी की पूजा, कथा श्रवण और पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया गया। पूजा के बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को हलषष्ठी पर्व की शुभकामनाएं दीं।




















