रायपुर। शिक्षकों पर शिक्षा विभाग की नजर और भी पैनी होने वाली है। शिक्षकों की समय की पाबंदी ज्यादा बढ़ाने के बाद अब स्कूलों में पढ़ाई को लेकर विभाग की सख्ती शुरू होने वाली है। सूत्रों के मुताबिक स्कूलों में शिक्षकों की ऑनलाइन हाजिरी लागू करने के बाद अब शिक्षा विभाग निगरानी व्यवस्था को एक कदम और आगे ले जाने की तैयारी में है।
अब सिर्फ यह नहीं देखा जाएगा कि शिक्षक समय पर स्कूल पहुंच रहे हैं या नहीं, बल्कि कितने बच्चे स्कूल आ रहे हैं और कक्षा में कितना पाठ्यक्रम पूरा हुआ, इसका डिजिटल रिकॉर्ड भी मुख्यालय स्तर पर तैयार किया जाएगा।इसके लिए बच्चों की उपस्थिति और स्कूलों में विषयवार पढ़ाई की प्रगति को ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ने की तैयारी है।
कुछ स्कूलों में इसकी शुरुआती कवायद शुरू भी हो चुकी है। विभाग की योजना के मुताबिक हर महीने का डेटा मुख्यालय तक पहुंचेगा और हर तीन महीने में इसी रिकॉर्ड के आधार पर स्कूलवार समीक्षा की जाएगी। जानकारी के मुताबिक विभाग की तरफ से शिक्षकों की मानिटरिंग को तेज करने के लिए नयी तकनीक का भी इस्तेमाल किया जायेगा।
अब स्कूल की फाइल में नहीं रहेगा बच्चों की हाजिरी का पूरा रिकॉर्ड
अभी तक बच्चों की उपस्थिति मुख्य रूप से स्कूल स्तर पर ही दर्ज होती है। संस्था प्रमुख के पास यह जानकारी रहती है कि कौन बच्चा कितने दिन स्कूल आया, लेकिन यह जानकारी नियमित रूप से एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड के रूप में मुख्यालय तक नहीं पहुंचती।
नई व्यवस्था में बच्चों की हाजिरी OMR शीट के माध्यम से दर्ज करने और महीनेभर का रिकॉर्ड एप पर अपलोड करने की तैयारी है। डेटा ऑनलाइन पहुंचने के बाद मुख्यालय के कंट्रोल रूम से इसकी निगरानी की जा सकेगी।
हर तीन महीने में बच्चों की उपस्थिति का विश्लेषण किया जाएगा। इसमें AI की मदद से लगातार गैरहाजिर रहने वाले बच्चों की पहचान करने की योजना है। ऐसे बच्चों को चिह्नित करने के बाद शिक्षकों के माध्यम से उनके घर संपर्क कर उन्हें दोबारा स्कूल से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
हर महीने पता चलेगा किस स्कूल में कितना कोर्स हुआ
बच्चों की हाजिरी के साथ अब पढ़ाई की प्रगति का भी डिजिटल हिसाब रखने की तैयारी है। इसके लिए स्कूलों के लिए अलग फार्मेट तैयार किया जा रहा है।
इसमें सप्ताह और महीने के हिसाब से प्रत्येक विषय में कितना पाठ्यक्रम पूरा हुआ और कितना बाकी है, इसकी जानकारी दर्ज की जाएगी। यह डेटा भी एप के जरिए मुख्यालय भेजा जाएगा।इसका फायदा यह होगा कि मुख्यालय स्तर पर ही पता चल सकेगा कि किसी स्कूल में गणित का पाठ्यक्रम तय लक्ष्य से पीछे चल रहा है या विज्ञान की पढ़ाई की गति कम है। ऐसे स्कूलों की पहचान कर उन्हें समय रहते पाठ्यक्रम पूरा करने के निर्देश दिए जा सकेंगे।
रिजल्ट का इंतजार नहीं, पहले ही पकड़ में आ जाएगा पढ़ाई का पिछड़ना
अभी किसी स्कूल में पाठ्यक्रम कितना पीछे है, इसकी तस्वीर अक्सर परीक्षा या रिजल्ट की समीक्षा के दौरान सामने आती है। तब तक शैक्षणिक नुकसान हो चुका होता है।नई व्यवस्था लागू होने पर विभाग को हर महीने और हर तिमाही में स्कूलवार व विषयवार स्थिति मिल सकेगी। इससे पढ़ाई में पिछड़ रहे स्कूलों पर समय रहते फोकस किया जा सकेगा।
कक्षा में शिक्षक कैसे पढ़ा रहे, इसकी भी हो सकती है रिकॉर्डिंग
शिक्षा विभाग इससे आगे की निगरानी व्यवस्था पर भी मंथन कर रहा है। योजना के शुरुआती विचार के तहत स्कूलों में ऐसा डिवाइस लगाने पर विचार किया जा रहा है, जिससे कक्षा की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जा सके।
खास तौर पर शिक्षक कक्षा में क्या और किस तरीके से पढ़ा रहे हैं, इसका वॉयस रिकॉर्ड तैयार कर ऑनलाइन सिस्टम के जरिए मुख्यालय तक भेजने की संभावना पर विचार हो रहा है। इससे अधिकारियों को कक्षा में वास्तविक शिक्षण गतिविधियों की जानकारी मिल सकेगी।हालांकि यह व्यवस्था फिलहाल प्रारंभिक विचार और मंथन के स्तर पर है। इसे लागू करने को लेकर अंतिम निर्णय होना बाकी है।
शिक्षकों की ऑनलाइन हाजिरी के बाद निगरानी का अगला चरण
शिक्षा विभाग ने इसी साल करीब दो लाख शिक्षकों की ऑनलाइन हाजिरी अनिवार्य की है। इससे बड़े स्तर पर यह निगरानी शुरू हुई कि शिक्षक समय पर स्कूल पहुंच रहे हैं या नहीं।अब इसी डिजिटल निगरानी व्यवस्था को बच्चों की उपस्थिति और पढ़ाई की प्रगति से जोड़ने की तैयारी है।
यानी आने वाले समय में स्कूल की निगरानी सिर्फ निरीक्षण, रजिस्टर या संस्था प्रमुख की रिपोर्ट पर निर्भर नहीं रहेगी।मुख्यालय के पास एक ही डिजिटल सिस्टम के जरिए बच्चों की उपस्थिति, पाठ्यक्रम की प्रगति और आगे चलकर कक्षा में होने वाली शिक्षण गतिविधियों का रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की दिशा में विभाग आगे बढ़ रहा है।










