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GFATM राज्यों की बैठक: वेक्टर जनित रोगों के नियंत्रण की रणनीतियों पर राज्यों ने साझा किए अनुभव, संजीव झा बोले, हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी के दौर में मलेरिया के मामलों में वृद्धि स्वीकार्य नहीं

रायपुर में GFATM राज्यों की क्षेत्रीय समीक्षा बैठक में संजीव कुमार झा ने मलेरिया उन्मूलन पर जोर दिया। बोले- हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी के दौर में मलेरिया के मामलों में वृद्धि स्वीकार्य नहीं।

September 28, 2026 1:43 PM
संजीव झा बोले- हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी के दौर में मलेरिया के मामले बढ़ना स्वीकार्य नहीं
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में मलेरिया उन्मूलन की दिशा में राज्य सरकार के प्रयासों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं के आयुक्त-सह-संचालक संजीव कुमार झा ने कहा कि हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी के बेहतर उपयोग के दौर में मलेरिया के मामलों में वृद्धि स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने मलेरिया नियंत्रण के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया है और पिछले दस वर्षों में राज्य में मलेरिया के मामलों में ऐतिहासिक कमी दर्ज की गई है।

राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत GFATM राज्यों की क्षेत्रीय समीक्षा बैठक (IMEP-3) का आयोजन छत्तीसगढ़ में 28 से 30 सितंबर तक किया जा रहा है। बैठक में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय स्तर के विशेषज्ञ, WHO के प्रतिनिधि और कार्यक्रम से जुड़े अधिकारी शामिल हुए हैं।बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्यों में वेक्टर जनित रोग नियंत्रण गतिविधियों की समीक्षा करने के साथ-साथ अलग-अलग राज्यों की सफल कार्यप्रणालियों, मैदानी अनुभवों और नवाचारों को साझा करना है।

पोलियो और कोविड की तरह मलेरिया उन्मूलन के लिए मिलकर काम करने की जरूरत

बैठक को संबोधित करते हुए संजीव कुमार झा ने कहा कि देश ने पोलियो उन्मूलन में सफलता हासिल की है और स्वास्थ्यकर्मियों ने कोविड-19 जैसी चुनौती का भी मिलकर सामना किया है। उसी सामूहिक भावना के साथ अब मलेरिया उन्मूलन की दिशा में भी सभी को एकजुट होकर काम करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि GFATM राज्यों की क्षेत्रीय समीक्षा बैठक विभिन्न राज्यों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का अवसर देती है। अलग-अलग राज्यों में मलेरिया नियंत्रण के लिए अपनाई जा रही बेहतर रणनीतियों को समझकर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उनका इस्तेमाल किया जा सकता है।

संजीव झा ने कहा कि विशेषज्ञों, राज्य प्रतिनिधियों और मैदानी स्तर पर काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों के अनुभव मलेरिया उन्मूलन की आगामी रणनीति को और मजबूत करने में उपयोगी साबित होंगे।

2030 तक मलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य

राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र, नई दिल्ली के अपर संचालक डॉ. प्रणब ज्योति भुइयां ने बताया कि देश ने वर्ष 2030 तक मलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्यों के लगातार और प्रभावी प्रयास महत्वपूर्ण हैं।उन्होंने छत्तीसगढ़ में पिछले वर्ष की तुलना में मलेरिया के मामलों में दर्ज कमी का उल्लेख करते हुए इसे राज्य में किए जा रहे प्रभावी प्रयासों का परिणाम बताया।

मैदानी स्तर पर बेहतर काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मी सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान मलेरिया और अन्य वेक्टर जनित रोगों के नियंत्रण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले फील्ड वर्कर्स, मितानिन प्रशिक्षकों, कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (CHO) सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को सम्मानित किया गया।

इन स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा समुदाय के बीच जागरूकता, समय पर जांच और उपचार, सर्विलांस तथा मलेरिया नियंत्रण से जुड़ी गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है। राष्ट्रीय और राज्य स्तर के विशेषज्ञों की मौजूदगी में हुए सम्मान समारोह को मैदानी स्वास्थ्यकर्मियों के प्रयासों की पहचान के रूप में देखा गया।

तीन दिन तक राज्यों के अनुभवों पर मंथन

तीन दिवसीय बैठक में मलेरिया सहित अन्य वेक्टर जनित रोगों की निगरानी, सर्विलांस, समय पर जांच एवं उपचार, वेक्टर नियंत्रण और सामुदायिक भागीदारी जैसे विषयों पर राज्यों के अनुभव साझा किए जा रहे हैं।

बैठक में विभिन्न राज्यों की सफल कार्यप्रणालियों को समझने और उन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने पर भी चर्चा हो रही है। वर्ष 2030 के मलेरिया उन्मूलन लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और सामूहिक प्रयासों को गति देने पर जोर दिया जा रहा है।

कार्यक्रम में RLTRI रायपुर के क्षेत्रीय संचालक डॉ. संदीप जोगदंड, ICMR-NIRTH जबलपुर के संचालक डॉ. प्रवीण कुमार भारती और राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ. घनाराम रावटे सहित संबंधित अधिकारी एवं विशेषज्ञ मौजूद रहे।

 

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