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शिक्षक न्यूज : कोर्ट से सजा, फिर भी स्कूल में ड्यूटी! महिला शिक्षिका से छेड़छाड़ के दोषी शिक्षक पर 24 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं

बिलासपुर में महिला शिक्षिका से छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में दोषी शिक्षक विवेक गुप्ता पर 24 दिन बाद भी विभागीय कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट की सजा के बावजूद स्कूल में सेवाएं देने का मामला सामने आया है।

October 18, 2026 5:13 AM
कोर्ट ने उपभोक्ता प्रकरण में सुनाया फैसला
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बिलासपुर। कोर्ट से सजा सुनाये जाने के बाद किसी भी दोषी के साथ कैसा सलूक होता है? ये बताने की जरूरत नहीं है। लेकिन, अगर कोई दोषी शिक्षक अगर सजा सुनाये जाने के बाद भी ड्यूटी करता रहे, तो विभाग पर सवाल उठना लाजिमी है। दरअसल महिला शिक्षिका से छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में अदालत से दोषी ठहराए जाने के बावजूद शिक्षक विवेक गुप्ता के खिलाफ शिक्षा विभाग ने अब तक कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की है।

तखतपुर न्यायालय ने 26 सितंबर 2026 को शिक्षक को दो धाराओं में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। इसके बाद भी वह बेलमुंडी स्कूल में सेवाएं दे रहा है। मामले में जिला शिक्षा अधिकारी संदीप पांडेय का कहना है कि उन्हें शिक्षक को सजा सुनाए जाने की जानकारी नहीं है। उन्होंने न्यायालय के आदेश की स्थिति का पता लगाकर प्राथमिकता से कार्रवाई करने की बात कही है।

दो धाराओं में दोषी, एक साल के सश्रम कारावास की सजा

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ऋचा यादव की अदालत ने अर्चना विहार, नेहरू नगर निवासी शिक्षक विवेक गुप्ता को भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत एक साल के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं, धारा 323 के तहत भी एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

अदालत के आदेश के मुताबिक, जुर्माना नहीं देने पर प्रत्येक धारा में एक-एक महीने का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने 7 अगस्त से 9 अक्टूबर 2018 तक न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने का निर्देश भी दिया है।

स्कूल में महिला शिक्षिका के साथ हुई थी घटना

अभियोजन के अनुसार, घटना 17 फरवरी 2018 को सुबह करीब 11:30 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच शासकीय प्राथमिक शाला चनाडोंगरी में हुई थी। वहां पदस्थ महिला शिक्षिका ने आरोप लगाया था कि शिक्षक विवेक गुप्ता ने उनका हाथ पकड़कर खींचा और सीने पर हाथ लगाया। आरोप के मुताबिक, विरोध करने पर शिक्षक ने उनके चरित्र पर लांछन लगाते हुए गाली-गलौज की और मारपीट कर उन्हें दीवार की ओर धकेल दिया। इससे उनके चेहरे और सिर में चोटें आई थीं।

मामले में तेजाब फेंकने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप भी लगाए गए थे। हालांकि, अदालत ने पीड़िता की गवाही, अन्य गवाहों के बयान और चिकित्सकीय साक्ष्यों पर विचार करने के बाद छेड़छाड़ और मारपीट के आरोप प्रमाणित पाए।

कुछ आरोपों में अदालत ने दिया संदेह का लाभ

न्यायालय ने पीछा करने, अश्लील गाली-गलौज और आपराधिक धमकी से जुड़े आरोपों में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर शिक्षक को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। इस तरह अदालत ने मामले के सभी आरोपों में दोषी नहीं ठहराया, बल्कि साक्ष्यों के आधार पर दो धाराओं में सजा सुनाई।

जिला शिक्षा अधिकारी बोले—जानकारी लेकर करेंगे कार्रवाई

मामले में विभागीय कार्रवाई नहीं होने को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी संदीप पांडेय ने कहा कि उन्हें शिक्षक को सजा मिलने की जानकारी नहीं है। न्यायालय का आदेश शिक्षा विभाग तक नहीं पहुंचने के संबंध में जानकारी लेकर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, बेलमुंडी मिडिल स्कूल के प्रधान पाठक संजय कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि शिक्षक विवेक गुप्ता लगातार स्कूल में सेवाएं दे रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षक ने अदालत से सजा मिलने की जानकारी उन्हें नहीं दी थी। प्रधान पाठक के अनुसार, शिक्षक 16 अक्टूबर को भी स्कूल में उपस्थित था।

अदालत के फैसले के बाद विभागीय कार्रवाई पर सवाल

अदालत से सजा सुनाए जाने के बाद भी शिक्षक के स्कूल में काम करते रहने का मामला अब शिक्षा विभाग की जानकारी और कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले की जानकारी लेकर कार्रवाई करने की बात कही है। अब देखना होगा कि न्यायालय के आदेश और संबंधित अभिलेखों की पुष्टि के बाद विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है।

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