रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित कोल लेवी घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की ओर से अदालत में पेश पूरक आरोपपत्र में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की भूमिका का उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, तत्कालीन खनिज सचिव अंबलगन पी और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा के बीच हुई व्हाट्सएप बातचीत से संकेत मिलता है कि वर्ष 2019 में कोरबा जिले की कोल वाशरियों पर की गई गोपनीय जांच की जानकारी तत्कालीन मुख्यमंत्री को थी। हालांकि, यह जांच एजेंसी का दावा है और आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत में होना है।
कोरबा की कोल वाशरियों पर कार्रवाई का मामला
पूरक आरोपपत्र के अनुसार, 15 जून 2019 को अंबलगन पी ने अनिल टुटेजा को कोरबा जिले की कोल वाशरियों में की गई औचक जांच के बारे में जानकारी दी थी। बातचीत में कार्रवाई को गोपनीय रखने और इसकी जानकारी खनिज विभाग के संचालक तथा कोरबा कलेक्टर तक सीमित होने का उल्लेख बताया गया है।
आरोपपत्र में दर्ज चैट के मुताबिक, जब अंबलगन पी ने मामले को मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाने की बात कही, तो टुटेजा ने जवाब दिया कि मुख्यमंत्री को इसकी जानकारी है। जांच एजेंसी ने इस बातचीत को तत्कालीन मुख्यमंत्री की जानकारी से जोड़ते हुए अपनी जांच में शामिल किया है।
चैट में मीडिया के सामने जांच को सामान्य और नियमित कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत करने तथा गोपनीयता बनाए रखने को लेकर बातचीत होने का भी उल्लेख है।
मौर्य और विश्नोई की चैट में खनिज कारोबार का उल्लेख
पूरक आरोपपत्र में तत्कालीन खनिज विभाग के संचालक जयप्रकाश मौर्य और निलंबित आईएएस अधिकारी समीर विश्नोई से जुड़ी बातचीत का भी उल्लेख किया गया है। आरोपपत्र के अनुसार, 28 सितंबर 2021 से मई 2022 के बीच खनिज पट्टों, अल्ट्राटेक के प्रतिनिधियों और पेलेट उद्योगों से संबंधित मामलों पर अधिकारियों के बीच संवाद हुआ था।
जांच एजेंसी का आरोप है कि आयरन ओर उद्योगपतियों की बैठक के बाद प्रति टन 100 रुपये की कथित अवैध लेवी वसूलने के लिए सूर्यकांत तिवारी और उसके सिंडिकेट से संपर्क करने को कहा गया था। एजेंसी ने इस बातचीत को कथित लेवी नेटवर्क की जांच से जोड़कर देखा है।
ई-परमिट व्यवस्था में बदलाव के निर्देशों का भी जिक्र
आरोपपत्र में 20 से 31 जुलाई 2020 के बीच समीर विश्नोई और अन्य अधिकारियों के बीच हुई बातचीत का भी उल्लेख है। जांच एजेंसी के अनुसार, इन संवादों में ई-परमिट व्यवस्था में बदलाव से संबंधित निर्देश सामने आए थे।
जांच एजेंसी इन बातचीत और दस्तावेजों को कथित कोल लेवी नेटवर्क की कार्यप्रणाली समझने के लिए महत्वपूर्ण मान रही है। मामले में आरोपपत्र में दर्ज दावों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।










