बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सहायक शिक्षक और शिक्षक भर्ती परीक्षा के आयोजन पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी आरक्षित वर्गों (विशेषकर दृष्टिहीन अभ्यर्थियों) को विज्ञापन में शामिल कर आवेदन करने का अवसर नहीं दिया जाता, तब तक चयन परीक्षाएं आयोजित नहीं की जाएंगी।
यह महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता मीनाक्षी मंगलेकर व अन्य की ओर से दायर याचिका (WPS No. 6783 of 2026) पर सुनवाई करते हुए दिया है।
शुद्धिपत्र जारी होने के बाद भी अभ्यर्थियों को नहीं मिला अवसर
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि 16 अप्रैल 2026 को जारी भर्ती विज्ञापन के संबंध में 9 अक्टूबर को शुद्धिपत्र (Corrigendum) जारी कर दिया गया है। यह शुद्धिपत्र रायपुर के ‘नवभारत’ और बिलासपुर के ‘हरिभूमि’ समाचार पत्रों के साथ-साथ विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी प्रकाशित किया गया है।
राज्य शासन की ओर से यह भी दलील दी गई कि शुद्धिपत्र में वर्गवार आरक्षित पदों का विवरण तो दे दिया गया है, लेकिन आवेदन की अंतिम तिथि (21 अगस्त 2026) समाप्त हो जाने के कारण अब दृष्टिहीन अभ्यर्थियों को नए सिरे से आवेदन की अनुमति देना संभव नहीं है।
हाईकोर्ट ने राज्य के तर्क पर जताई असहमति
अदालत ने राज्य सरकार की इस दलील पर कड़ी असहमति जताई है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब सरकार ने वर्गवार आरक्षण को लेकर शुद्धिपत्र जारी किया है, तो नियमों के तहत दृष्टिहीन (Blind persons) अभ्यर्थियों को इस प्रक्रिया से बाहर रखने या उन्हें शामिल न करने का कोई ठोस आधार नजर नहीं आता।
इसके अलावा, याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता विजय के. देशमुख ने कोर्ट का ध्यान इस ओर भी आकर्षित किया कि जारी किया गया शुद्धिपत्र केवल ‘सहायक शिक्षक’ के पद के लिए है, जबकि ‘शिक्षक’ के पद के संबंध में ऐसा कोई शुद्धिपत्र जारी नहीं किया गया है।
तय तारीखों पर नहीं होंगी परीक्षाएं
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार:
• सहायक शिक्षक पद की चयन परीक्षा 11 अक्टूबर 2026 को होनी थी।
• शिक्षक पद की चयन परीक्षा 25 अक्टूबर 2026 को आयोजित होनी थी।
लेकिन हाईकोर्ट के इस कड़े आदेश के बाद इन दोनों ही तारीखों पर होने वाली परीक्षाएं टल गई हैं। अदालत ने निर्देश दिया है कि सभी आरक्षित श्रेणियों को विज्ञापन में शामिल कर आवेदन का उचित अवसर दिए बिना परीक्षा आयोजित नहीं की जा सकती।
तीन सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों को इस मामले में अपना विस्तृत जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब से तीन सप्ताह बाद तय की गई है, और तब तक यह अंतरिम रोक प्रभावी रहेगी।
साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस आदेश से राज्य सरकार या संबंधित विभाग को नियमों और आरक्षण नीति के तहत नया शुद्धिपत्र जारी करने अथवा सभी आरक्षित वर्गों को शामिल करते हुए नया विज्ञापन निकालकर आवेदन का अवसर देने से नहीं रोका गया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार इस पर आगे क्या कदम उठाती है।















