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छत्तीसगढ़: बार-बार गर्भपात, परिवार के सामने टूटने का डर… और फिर महिला ने गढ़ी नवजात चोरी की कहानी?

बेमेतरा में नवजात को दो महिलाओं द्वारा ले जाने की शिकायत झूठी निकली। पुलिस के मुताबिक, परिवार के सामने सच छिपाने के डर से महिला ने मनगढ़ंत कहानी बनाई।

October 10, 2026 5:29 AM
बेमेतरा में नवजात को ले जाने की झूठी शिकायत और पुलिस जांच का मामला
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बेमेतरा। कभी-कभी सामाजिक अपेक्षाओं और परिवार के सामने खुद को साबित करने का दबाव इंसान को ऐसी उलझन में डाल देता है, जहां वह सच का सामना करने के बजाय उसे छिपाने की कोशिश करने लगता है। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के जेवरा-एस गांव का मामला भी कुछ ऐसा ही पहलू सामने लाता है। यहां नवजात शिशु को दो अज्ञात महिलाओं द्वारा ले जाने की शिकायत ने पुलिस को उलझा दिया था। लेकिन जांच में कहानी कुछ और ही निकली। पुलिस के मुताबिक, महिला ने गर्भावस्था और प्रसव की झूठी कहानी इसलिए गढ़ी, क्योंकि उसे परिवार के सामने गलत साबित होने का डर था।

दो अज्ञात महिलाओं पर नवजात को ले जाने का आरोप

नवागढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम जेवरा-एस में 4 अक्टूबर 2026 को महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि एक दिन पहले, यानी 3 अक्टूबर को, जब परिवार के सदस्य घर पर नहीं थे, तब दो अज्ञात महिलाएं आईं। आरोप के मुताबिक, उन्होंने महिला का प्रसव कराया और नवजात को अपने साथ लेकर चली गईं।

नवजात को ले जाने की बात सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया। घटनास्थल का निरीक्षण किया गया, ग्रामीणों से पूछताछ हुई और कथित तौर पर नवजात को ले जाने वाली महिलाओं की तलाश शुरू की गई।

बार-बार गर्भपात और परिवार की अपेक्षाओं के बीच उलझी कहानी

पुलिस अधीक्षक त्रिलोक बंसल के अनुसार, जांच में सामने आया कि महिला पहले भी गर्भपात का सामना कर चुकी थी। पुलिस का दावा है कि परिवार के सामने अपनी स्थिति को लेकर शर्मिंदगी से बचने के लिए उसने गर्भवती होने की बात कही और बाद में भी इसे छिपाए रखा।

यहीं से इस मामले का मानवीय पहलू सामने आता है। गर्भपात जैसी निजी और भावनात्मक रूप से कठिन परिस्थिति से गुजरने वाले व्यक्ति के लिए परिवार की अपेक्षाओं का दबाव कितना भारी हो सकता है, यह समझना जरूरी है। हालांकि, महिला की वास्तविक मानसिक स्थिति के बारे में स्वतंत्र जानकारी उपलब्ध नहीं है। पुलिस के अनुसार, परिवार के सामने सच सामने आने के डर ने उसे झूठी कहानी गढ़ने की ओर धकेला।

प्रसव की कहानी पर संदेह, चिकित्सकीय जांच में खुलासा

पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. हरीश यादव और एसडीओपी भूषण एक्का के नेतृत्व में जांच की गई। पुलिस टीम और फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों की चिकित्सकीय जांच भी कराई गई।

पुलिस के अनुसार, चिकित्सकीय परीक्षण में घटना के आसपास महिला के गर्भवती होने या प्रसव होने की पुष्टि नहीं हुई। जांच में यह भी सामने आया कि महिला ने अपनी गर्भावस्था का आभास देने के लिए कपड़े पहनने के तरीके में बदलाव किया था। पुलिस का दावा है कि उसने प्रसव की स्थिति दर्शाने के लिए भी कहानी बनाई और परिवार के लौटने पर नवजात को दो अज्ञात महिलाओं द्वारा ले जाने की बात कही।

झूठ छिपाने की कोशिश का कानूनी परिणाम

पुलिस ने जांच के बाद महिला के खिलाफ झूठी सूचना देकर पुलिस को गुमराह करने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता की धारा 217 के तहत कार्रवाई की है।

यह मामला जहां झूठी शिकायत के कानूनी परिणामों को सामने लाता है, वहीं परिवार और समाज में संतान को लेकर बनी अपेक्षाओं पर भी सवाल खड़े करता है। गर्भपात एक निजी और संवेदनशील अनुभव हो सकता है। ऐसी परिस्थितियों में प्रभावित व्यक्ति को दोषारोपण के बजाय सहानुभूति, संवाद और सहयोग की जरूरत होती है। हालांकि, किसी भी परिस्थिति में पुलिस को जानबूझकर गलत सूचना देना जांच और कानून की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

संक्षेप में: बेमेतरा के जेवरा-एस गांव में नवजात को दो अज्ञात महिलाओं द्वारा ले जाने की शिकायत पुलिस जांच में झूठी निकली। पुलिस के मुताबिक, परिवार के सामने सच उजागर होने के डर से महिला ने यह कहानी गढ़ी थी। मामले में बीएनएस की धारा 217 के तहत कार्रवाई की गई है।

 

 

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