अंबिकापुर/रायपुर। राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तहत वर्ष 2010-11 में हुई फर्नीचर खरीदी में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने 12 अक्टूबर 2026 को 10 आरोपियों के खिलाफ करीब 20 हजार पन्नों का चालान विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), अंबिकापुर में पेश किया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में शासन को कुल
67,48,008.28 की आर्थिक क्षति हुई। आरोप है कि भंडार क्रय नियमों की अनदेखी कर फर्नीचर की आपूर्ति और भौतिक सत्यापन से पहले ही भुगतान कर दिया गया। कुछ फर्मों ने निर्धारित मात्रा से कम फर्नीचर दिया, जबकि दो फर्मों ने भुगतान लेने के बावजूद किसी भी स्कूल में फर्नीचर की आपूर्ति नहीं की।
2.70 करोड़ मिले थे फर्नीचर खरीदी के लिए
मामला वर्ष 2010-11 का है, जब सर्व शिक्षा अभियान के तहत अविभाजित सरगुजा जिले के मिडिल स्कूलों में फर्नीचर खरीदी के लिए करीब ₹2.70 करोड़ का आवंटन मिला था।जिला कार्यालय, राजीव गांधी शिक्षा मिशन, अंबिकापुर ने तत्कालीन कलेक्टर एवं जिला मिशन संचालक के अनुमोदन से छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (CSIDC) की दरों पर 10 फर्मों को खरीदी के आदेश जारी किए थे।
इन फर्मों के नाम पर 28 मार्च 2011 को कुल 2,68,18,838 के चेक जारी किए गए थे।क्रय आदेशों के मुताबिक, फर्मों को 20 दिनों के भीतर फर्नीचर की आपूर्ति करनी थी। लेकिन जांच में भुगतान प्रक्रिया और आपूर्ति से संबंधित कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया।
भौतिक सत्यापन से पहले भुगतान करने का आरोप
समाचार पत्रों में शिकायतें प्रकाशित होने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने 20 अप्रैल 2013 को जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद सरगुजा कलेक्टर द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति ने 3 जून से 12 जून 2013 के बीच जांच की और 19 जुलाई 2013 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।जांच समिति के अनुसार, तत्कालीन कलेक्टर ने फर्नीचर का भौतिक सत्यापन करने के बाद ही भुगतान के लिए चेक जारी करने का निर्देश दिया था।
इसके बावजूद तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक सत्यप्रकाश पाण्डेय ने लेखापाल प्रवीण सिन्हा से चेक लेकर 6 से 9 अप्रैल 2011 के बीच वितरित कर दिए।रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि भुगतान से पहले न तो सभी स्कूलों में फर्नीचर की आपूर्ति सुनिश्चित की गई और न ही निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार भौतिक सत्यापन कराया गया।
आठ फर्मों ने कम फर्नीचर दिया, दो ने नहीं की आपूर्ति
EOW/ACB की जांच में फर्मों की आपूर्ति और भुगतान से संबंधित कई अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।
• आठ फर्मों ने क्रय आदेश के मुकाबले कम मात्रा में फर्नीचर की आपूर्ति की।
• दो फर्मों ने भुगतान प्राप्त करने के बावजूद किसी भी स्कूल में फर्नीचर नहीं पहुंचाया।
• फर्मों से स्कूलवार आपूर्ति सूची और प्रधान पाठकों के हस्ताक्षरयुक्त प्राप्ति प्रमाणपत्र नहीं लिए गए।
• फर्नीचर की गुणवत्ता जांच और क्रय समिति से भौतिक सत्यापन नहीं कराया गया।
• फर्मों के साथ निर्धारित अनुबंध नहीं किए गए और तीन प्रतिशत सुरक्षा निधि भी जमा नहीं कराई गई।
जांच एजेंसी का कहना है कि इन प्रक्रियागत अनियमितताओं के कारण सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय नुकसान की स्थिति बनी।
कथित फर्जी फर्म के नाम पर ₹22.91 लाख का भुगतान
जांच में दर्शन फेब्रिकेटर, रायपुर से संबंधित एक मामले का भी उल्लेख किया गया है। एजेंसी के अनुसार, 18 फरवरी 2011 को दर्शन फेब्रिकेटर के संचालक सुरेश कटारिया के नाम पर जारी क्रय आदेश संबंधित फर्म को देने के बजाय आकृति प्रिंटिंग प्रेस, अंबिकापुर के संचालक संजय पटेल को दिया गया।
आरोप है कि संजय पटेल को दर्शन फेब्रिकेशन के नाम से बैंक खाता खुलवाने के लिए कहा गया। इसके बाद ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, अंबिकापुर में इस नाम से खाता खोला गया और 28 मार्च 2011 को जारी ₹22,91,909 का चेक उसमें जमा कर राशि निकाल ली गई।
जांच एजेंसी के अनुसार, पूछताछ में संजय पटेल ने कथित तौर पर ₹7 लाख कमीशन के रूप में सत्यप्रकाश पाण्डेय को देने की बात कही। शेष राशि से फर्नीचर की आपूर्ति करने को कहा गया था, लेकिन संबंधित फर्म ने किसी भी स्कूल में फर्नीचर नहीं दिया।ये आरोप जांच एजेंसी के निष्कर्षों पर आधारित हैं; इन पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाना है।
दूसरी फर्म ने भी भुगतान के बाद नहीं की आपूर्ति
जांच में महारानी स्टील एंड अप्लायंस, रायपुर का मामला भी सामने आया। एजेंसी के अनुसार, फर्म के संचालक प्रेमचंद जैन को 28 मार्च 2011 को ₹11,44,349 का चेक दिया गया था।आरोप है कि राशि निकालने के बावजूद फर्म ने किसी भी स्कूल में फर्नीचर की आपूर्ति नहीं की। प्रेमचंद जैन की मृत्यु 7 अगस्त 2025 को हो चुकी है।
67.48 लाख की आर्थिक क्षति का आकलन
EOW/ACB की फर्मवार गणना के अनुसार, फर्नीचर की आपूर्ति नहीं किए जाने से संबंधित राशि और अन्य मदों में कुल ₹67,48,008.28 की आर्थिक क्षति आंकी गई है।
मद राशि
आपूर्ति नहीं किए गए फर्नीचर की राशि ₹56,84,848
वैट की अंकित राशि ₹9,47,938
निरीक्षण शुल्क ₹1,15,222.28
कुल आर्थिक क्षति ₹67,48,008.28
इन 10 आरोपियों के खिलाफ पेश हुआ चालान
EOW/ACB ने अपराध क्रमांक 28/2017 में निम्नलिखित 10 आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय, अंबिकापुर में चालान पेश किया है:
1. सत्यप्रकाश पाण्डेय — तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक।
2. संजय पटेल — दर्शन फेब्रिकेशन से संबंधित आरोपी।
3. अजय कुमार अग्रवाल — अम्बिका अलमीरा एंड स्टील फेब्रिकेटर्स।
4. ममता अग्रवाल — सेलेनो स्टील।
5. बिधी सिंह कटलारिया — महामाया फेब्रिकेटर्स।
6. राजकुमार बंसल — सूर्या स्टील एंड वुडन इंडस्ट्रीज।
7. संदीप तिवारी — श्री साई इंडस्ट्रीज।
8. हितेश कुमार अग्रवाल — श्याम मेटल प्रोडक्ट्स।
9. रितेश कुमार अग्रवाल — श्री श्याम इंडस्ट्रीज।
10. संजीव गुप्ता — पंकज फर्नीचर मार्ट।
एजेंसी के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(डी), 13(2) तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 409 और 420 के तहत चालान प्रस्तुत किया गया है।
नोटिस के बाद गिरफ्तारी, फिर न्यायिक रिमांड
जांच एजेंसी की जानकारी के मुताबिक, सत्यप्रकाश पाण्डेय और संजय पटेल को अपना पक्ष रखने तथा बयान दर्ज कराने के लिए कई बार नोटिस जारी किए गए थे। एजेंसी का कहना है कि दोनों ने जांच में सहयोग नहीं किया।
इसके बाद 19 अगस्त 2026 को दोनों को गिरफ्तारी के कारणों से अवगत कराकर गिरफ्तार किया गया। परिजनों को सूचना देने के बाद उन्हें न्यायिक मजिस्ट्रेट, अंबिकापुर के समक्ष पेश किया गया, जहां से 24 अगस्त 2026 तक न्यायिक रिमांड प्राप्त हुआ था।
अब 12 अक्टूबर 2026 को 10 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किए जाने के बाद मामले में न्यायिक कार्यवाही आगे बढ़ेगी।फिलहाल, यह मामला न्यायालय के विचाराधीन है। जांच एजेंसी ने आरोपपत्र में वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए हैं। आरोपियों की दोषसिद्धि का अंतिम निर्णय न्यायालय में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।







