रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और बेहतर बनाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा की। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मरीजों को समय पर उपचार, आवश्यक दवाइयां, जांच और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अस्पतालों में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी दूर करने, खराब चिकित्सा उपकरणों की समय पर मरम्मत और दूरस्थ क्षेत्रों में एंबुलेंस नहीं पहुंचने की स्थिति में वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना का विस्तार हुआ है, लेकिन अब यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उपलब्ध संसाधनों का लाभ सीधे मरीजों तक पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों को वर्तमान सुविधाओं और भविष्य की जरूरतों के आकलन के आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं की दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने को कहा।
जिला अस्पताल से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करें
मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिए कि जिला अस्पतालों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक आवश्यक दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहनी चाहिए। मरीजों को सामान्य जांच और उपचार के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
उन्होंने अस्पतालों में उपलब्ध चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव और मरम्मत पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि रखरखाव के अभाव में कोई महत्वपूर्ण उपकरण लंबे समय तक बंद नहीं रहना चाहिए। इसके लिए नियमित निगरानी और समयबद्ध मरम्मत की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
बैठक में रिक्त पदों पर भर्ती, मानव संसाधन की उपलब्धता और भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधनों की स्थिति की समीक्षा भी की गई। मुख्यमंत्री ने भर्ती प्रक्रियाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि स्वास्थ्य संस्थानों में पर्याप्त चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध हो सकें।
25 नए डायलिसिस केंद्र होंगे शुरू, 1,045 संस्थानों में अटल आरोग्य लैब
समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के 1,045 स्वास्थ्य संस्थानों में अटल आरोग्य लैब संचालित हैं। डायलिसिस, ट्रॉमा केयर, ब्लड बैंक, आईसीयू और सीटी स्कैन जैसी महत्वपूर्ण चिकित्सा सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है।
वर्तमान में प्रदेश के 33 स्थानों पर डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है और 25 नए डायलिसिस केंद्र प्रारंभ किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम के साथ-साथ ई-हॉस्पिटल और आभा जैसी डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने तकनीक का उपयोग मरीजों की सुविधा और स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए करने को कहा।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर विशेष जोर, सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के निर्देश
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, पोषण, चिकित्सा देखभाल और सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रसव सुरक्षित हो और जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रहें। प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव से जुड़ी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। साथ ही प्रसूता महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मातृ मृत्यु दर में कमी आई है, लेकिन इसे और कम करने की जरूरत है। उन्होंने मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को राष्ट्रीय औसत के करीब लाने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाकर काम करने के निर्देश दिए।
बैठक में संस्थागत प्रसव, पूर्ण टीकाकरण, मलेरिया की रोकथाम, कुष्ठ रोग निवारण और टीबी उन्मूलन कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया।
दुर्गम इलाकों में एंबुलेंस नहीं पहुंची तो बनेगी वैकल्पिक व्यवस्था
दूरस्थ, वनांचल और दुर्गम क्षेत्रों में आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने को लेकर मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने 108 संजीवनी एक्सप्रेस और 102 महतारी एक्सप्रेस सेवाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि भौगोलिक कठिनाइयों के कारण किसी नागरिक को उपचार से वंचित नहीं होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में सड़क या अन्य भौगोलिक परिस्थितियों के कारण एंबुलेंस नहीं पहुंच सकती, वहां स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था विकसित की जाए। मरीजों को गांव से एंबुलेंस प्वाइंट या निकटतम स्वास्थ्य केंद्र तक सुरक्षित और समय पर पहुंचाने की व्यवस्था बनाई जाए।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 108 संजीवनी एक्सप्रेस के तहत 375 एंबुलेंस और 102 महतारी एक्सप्रेस के तहत 380 वाहन उपलब्ध हैं। जनवरी से अगस्त 2026 तक महतारी एक्सप्रेस सेवा से 2 लाख 19 हजार से अधिक हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने इन सेवाओं का प्रभावी और समयबद्ध संचालन सुनिश्चित करने को कहा।
अस्पताल में मृत्यु होने पर परिजनों को समय पर मिले शव वाहन
मुख्यमंत्री साय ने शव वाहन सेवाओं को मजबूत बनाने के निर्देश देते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में मानवीय संवेदनाओं को सर्वोपरि रखने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि किसी परिजन को खोना परिवार के लिए बेहद कठिन समय होता है। ऐसे में शव वाहन जैसी बुनियादी सुविधा के लिए परिजनों को परेशान नहीं होना चाहिए। अस्पताल में मृत्यु होने की स्थिति में शव वाहन सहजता और समय पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि परिवार की गरिमा और संवेदनाओं का सम्मान बना रहे।
सिकल सेल से लेकर मानसिक स्वास्थ्य तक, सेवाओं का होगा विस्तार
मुख्यमंत्री ने सिकल सेल रोग की रोकथाम, जांच, परामर्श और उपचार से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में स्क्रीनिंग और परामर्श सेवाओं को मजबूत करने तथा सिकल सेल के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए।
उन्होंने वर्ष 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध तरीके से काम करने को कहा। विवाह पूर्व स्वैच्छिक जांच और आनुवंशिक परामर्श के प्रति लोगों को जागरूक करने पर भी जोर दिया।
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने परामर्श और उपचार सुविधाओं की जानकारी आम नागरिकों तक पहुंचाने के निर्देश दिए, ताकि जरूरतमंद लोग समय पर सहायता प्राप्त कर सकें।
बैठक में आयुष्मान भारत योजना, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना, आयुष्मान आरोग्य मंदिर और मोबाइल हेल्थ सेवाओं की प्रगति की भी समीक्षा हुई। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत एक लाख लोगों को उपचार का लाभ मिला है। मुख्यमंत्री ने पात्र मरीजों तक सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचाने को कहा।
प्रदेश में 6 नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत, नर्सिंग और फिजियोथेरेपी शिक्षा का भी विस्तार
मुख्यमंत्री साय ने चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा शिक्षा सुविधाओं के विस्तार के साथ गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई, पर्याप्त फैकल्टी, विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
बैठक में बताया गया कि छत्तीसगढ़ में 15 शासकीय मेडिकल कॉलेज, एक एम्स और छह निजी मेडिकल कॉलेज सहित कुल 22 चिकित्सा संस्थान हैं। इसके अलावा छह नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों की प्रगति और संचालित संस्थानों में फैकल्टी तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता की समीक्षा की। उन्होंने निर्माण कार्यों में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का समयबद्ध निराकरण करने को कहा।
अधिकारियों के अनुसार, प्रदेश में शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की संख्या आठ से बढ़कर 17 और फिजियोथेरेपी कॉलेजों की संख्या एक से बढ़कर सात हो गई है। पहली बार एलाइड हेल्थ से जुड़े 11 पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किए जा रहे हैं। इनके तहत 10 मेडिकल कॉलेजों में 640 सीटों की व्यवस्था की गई है। रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में पहली बार डीएम कार्डियोलॉजी की दो सीटें भी शुरू की गई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा का विस्तार प्रदेश में प्रशिक्षित चिकित्सकों, नर्सिंग कर्मियों और अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद करेगा। मेडिकल कॉलेजों को बेहतर उपचार सुविधाओं के केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाना चाहिए।
त्योहारों से पहले मिलावट के खिलाफ सघन जांच अभियान
आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए मुख्यमंत्री ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेशभर में सघन जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान मिठाई, दुग्ध उत्पाद और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण और बिक्री स्थलों की नियमित जांच की जाए। अमानक या मिलावटी खाद्य पदार्थ मिलने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आम नागरिकों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री का जोर—स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित समीक्षा की जाए और स्थानीय जरूरतों के अनुसार कमियों को दूर किया जाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य योजनाओं की सफलता इस बात से तय होगी कि जरूरत के समय उनका लाभ आम नागरिकों तक कितनी आसानी और समयबद्धता से पहुंचता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य शहरों से लेकर सुदूर वनांचलों तक प्रत्येक नागरिक को समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराना है। स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ सेवाओं को अधिक सुलभ, संवेदनशील और गुणवत्तापूर्ण बनाना जरूरी है, ताकि चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में किसी परिवार को परेशानी न हो।
बैठक में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।










