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स्कूलों में पढ़ाई छोड़ वोटर तलाशेंगे शिक्षक, फिर जनगणना की ड्यूटी; परीक्षा से पहले बढ़ सकती है परेशानी

छत्तीसगढ़ में हजारों शिक्षक SIR और जनगणना के कार्य में लगाए जा सकते हैं। परीक्षा से पहले शिक्षकों की कमी और स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका जानिए।

October 16, 2026 6:21 AM
छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की दोहरी ड्यूटी, SIR के बाद जनगणना; परीक्षा से पहले पढ़ाई पर असर की आशंका
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छत्तीसगढ़ में 10 हजार से ज्यादा शिक्षक एसआईआर अभियान में तैनात, जनवरी-फरवरी में 53 हजार से अधिक शिक्षकों पर जनगणना की जिम्मेदारी; स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों पर एक बार फिर गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ बढ़ने जा रहा है। प्रदेश में 10 हजार से ज्यादा शिक्षकों की ड्यूटी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान में लगाई गई है। अगले एक महीने तक ये शिक्षक घर-घर जाकर मतदाता सूची से कटे नामों की तलाश करेंगे और पात्र लोगों के नाम दोबारा जोड़ने के लिए फॉर्म-6 भरवाने की प्रक्रिया में जुटेंगे। इसके बाद जनगणना की तैयारियों और प्रशिक्षण का दौर शुरू होगा। ऐसे में जनवरी में परीक्षाओं से पहले बड़ी संख्या में शिक्षकों के स्कूलों से बाहर रहने की आशंका है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।

पहले घर-घर जाकर तलाशेंगे मतदाता, फिर भरवाएंगे फॉर्म

एसआईआर अभियान के लिए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। अभियान में 33 जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO), 90 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO), 377 सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO), 2,719 सुपरवाइजर और 27,196 बूथ लेवल अधिकारी (BLO) लगाए गए हैं। इस काम में शिक्षक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी शामिल हैं।अभियान के दौरान विशेष शिविर भी आयोजित किए जाने हैं। इससे शिक्षकों को स्कूल के नियमित कार्यों के साथ चुनाव संबंधी जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ रही हैं।

बीएलओ को सप्ताह में 20 से 25 लोगों के घर जाकर सत्यापन करना है। मतदाता सूची से हटे नामों को नियमानुसार दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया भी इसी अभियान का हिस्सा है। इसके लिए बुधवार और गुरुवार को सामुदायिक भवनों, रैनबसेरों समेत अन्य स्थानों पर विशेष शिविर लगाए जाएंगे। वहीं, शुक्रवार और शनिवार को मतदान केंद्रों के अंतर्गत आने वाले स्कूल-कॉलेजों में शिविर आयोजित होंगे। यह अभियान 8 नवंबर तक चलना है।

 जनवरी में पढ़ाई के बीच जनगणना का काम

एसआईआर अभियान के बाद शिक्षकों की जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी। फरवरी 2027 से शुरू होने वाली जनगणना के दूसरे चरण के लिए दिसंबर और जनवरी में प्रशिक्षण तथा अन्य तैयारियां की जाएंगी। इस चरण में प्रदेश के 53 हजार से ज्यादा शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने की बात सामने आई है। प्रगणक घर-घर जाकर प्रत्येक व्यक्ति से जुड़ी जानकारी जुटाएंगे।

पहले चरण में मकानों की गणना का काम मई में कराया गया था। उस समय गर्मी की छुट्टियां होने से स्कूलों की पढ़ाई पर असर कम पड़ा था। लेकिन दूसरा चरण शैक्षणिक सत्र के दौरान होने के कारण शिक्षकों की अनुपस्थिति का असर कक्षाओं पर पड़ने की आशंका है।

SIR के बाद जनगणना की तैयारी, शिक्षकों की फिर लगेगी ड्यूटी

शिक्षकों की परेशानी केवल मतदाता सूची पुनरीक्षण तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। इसके बाद जनगणना के दूसरे चरण से संबंधित प्रशिक्षण और तैयारियों का काम भी प्रस्तावित है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस कार्य में प्रदेश के 53 हजार से अधिक शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने की बात सामने आई है।

जनगणना के दौरान प्रगणकों को घर-घर जाकर निर्धारित जानकारियां एकत्र करनी होंगी। इसके लिए मैदानी स्तर पर बड़ी संख्या में कर्मचारियों की आवश्यकता होगी। ऐसे में स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी, लेकिन उनकी अनुपस्थिति की स्थिति में पढ़ाई की व्यवस्था बनाए रखना भी शिक्षा विभाग के सामने चुनौती बन सकता है।

3.45 करोड़ आबादी तक पहुंचने की तैयारी

जनगणना के दौरान प्रदेश की अनुमानित 3.45 करोड़ आबादी तक पहुंचने का लक्ष्य बताया जा रहा है। हालांकि, आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय की 2025-26 की मासिक जनसंख्या प्रक्षेपण तालिका के मुताबिक, 1 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ की अनुमानित आबादी 3 करोड़ 12 लाख 11 हजार थी। ऐसे में जनगणना का काम बड़े स्तर पर किया जाना है और इसके लिए बड़ी संख्या में मैदानी कर्मचारियों की जरूरत होगी।

परीक्षा से पहले स्कूलों में पढ़ाई का सवाल

शिक्षकों की लगातार चुनावी और जनगणना संबंधी ड्यूटी के बीच सबसे बड़ा सवाल स्कूलों में पढ़ाई की व्यवस्था को लेकर है। जनवरी में परीक्षाओं की तैयारी का समय रहता है। ऐसे में यदि बड़ी संख्या में शिक्षक लंबे समय तक सर्वे और जनगणना के काम में लगे रहे, तो कक्षाओं का संचालन और पाठ्यक्रम पूरा करना चुनौती बन सकता है। हालांकि, पढ़ाई पर वास्तविक असर कितना होगा, यह ड्यूटी की अवधि और स्कूलों में वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

गैर-शैक्षणिक कार्यों को लेकर फिर उठे सवाल

शिक्षकों की चुनावी और जनगणना संबंधी ड्यूटी को लेकर एक बार फिर यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि शैक्षणिक कार्यों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा। मतदाता सूची का पुनरीक्षण और जनगणना दोनों महत्वपूर्ण सरकारी कार्य हैं, लेकिन इनके दौरान स्कूलों में पढ़ाई नियमित रखने के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था जरूरी होगी।

अब निगाह इस बात पर रहेगी कि शिक्षा विभाग परीक्षा से पहले स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है और ड्यूटी पर तैनात शिक्षकों के कारण पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए क्या वैकल्पिक इंतजाम किए जाते हैं।

 

Gitendra Sahu

Gitendra Kumar Sahu has over 10 years of experience in journalism and newsroom operations. He has worked with reputed media organizations such as Swaraj Express and Press Trust of India (PTI), where he spent nearly five years in active journalism. He has also worked with several digital media platforms and possesses extensive experience in both field reporting and newsroom desk operations. After completing his graduation, he chose journalism as his professional career. He specializes in political reporting, current affairs, and crime journalism, with strong expertise in breaking and handling major news stories.

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