Ayodhya Ram mandir: चंदा चोरी विवाद के बाद से अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में खलबली मची हुई है। आठ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब ट्रस्ट में इस्तीफा का शुरू हो गया है। शुक्रवार को बड़े घटनाक्रम में अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया। हालांकि इस बात अटकलें दो दिन पहले से ही लगने लगी थी। जब चंपत राय को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे के कार्यक्रम से दूर रखा गया था।
सूत्रों के मुताबिक मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव को भी मंदिर की व्यवस्था से बाहर कर दिया गया है। आपको बता दें कि चोरी का मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। सरकार के संज्ञान में आने के बाद 13 जून को SIT बनाई गई थी। एसआईटी ने 23 जून को एडिशनल चीफ सेक्रेटरी संजय प्रसाद को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी, इसके दो दिन के बाद कार्रवाई हुई और मंदिर से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया।
गुरुवार को दर्ज एफआईआर के बाद जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया उनमें, टीन्नू, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और रमाशंकर मिश्रा शामिल है। बताया जा रहा है कि अनुकल्प, लव कुश का जीजा है और यह दोनों अनिल मिश्रा के रिश्तेदार है, जबकि मनीष, टीन्नू यादव का भतीजा बताया जा रहा है।
आपको बता दे कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के पास पूरे मंदिर की जिम्मेदारी थी। राय के बाद ट्रस्टी अनिल और गोपाल राव की मंदिर व्यवस्था में बड़ी भूमिका थी। चढ़ावा चोरी मामले में गुरुवार देर शाम ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर पहली एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसके बाद रामाशंकर यादव उर्फ टीन्नू समेत 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। आज सभी लोगों को कोर्ट में पेश किया गया। हालांकि इसमें चंपत राय, डॉक्टर अनिल मिश्रा समेत अन्य बड़े पदाधिकारी के नाम नहीं है।
कौन हैं चंपत राय
राम मंदिर ट्रस्ट में चंपत राय काफी प्रभावशाली थे। उनके पास असीमित अधिकार थे। 18 नवंबर 1946 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की नगीना तहसील में चंपत राय का जन्म हुआ था। उनके पिता रामेश्वर प्रसाद बंसल RSS से जुड़े थे। उनकी मां का नाम सावित्री देवी था। चंपत राय अपने 10 भाई बहनों में दूसरे नंबर पर है। उनका पूरा परिवार हिंदुत्व से प्रेरित था। चंपक राय शिक्षक के रूप में सेवा करते हुए आरएसएस के प्रचार प्रसार से जुड़े।
इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाया तो चंपक राय भी विरोध में उतर गए, इसके बाद पुलिस में उन्हें गिरफ्तार किया। 8 महीने तक जेल में रहने के बाद चंपत राय बाहर आए तो शिक्षक की नौकरी छोड़कर संघ के पूर्ण कालिक प्रचारक बन गए। संघ में रहते हुए चंपतराय ने आगरा, देहरादून और हरिद्वार समेत कई जगहों पर संगठन के विस्तार का काम किया।
वे संघ में विभाग प्रचारक रहे, बाद में उन्हें विश्व हिंदू परिषद में भेज दिया गया। जहां उन्होंने क्षेत्रीय संगठन मंत्री के तौर पर अपना काम संभाल। यही से वह राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ गए, हालांकि अब चंदा चोरी विवाद के बाद उन्हें अपना इस्तीफा देना पड़ा है।










