बिलासपुर। नक्सली संगठन से संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार चार आरोपियों को बिलासपुर की विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी अदालत से जमानत मिल गई है। विशेष न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरेशी की अदालत ने गिरधर नाग, सुकारू राम कोरसा, संदेव पोड़ियामी और शंकर कोरसा को निर्धारित शर्त के साथ रिहा करने का आदेश दिया है। यह मामला रायपुर के डीडी नगर थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया था।
आपको बता दें कि पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 147, 148 और 61 के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र प्रस्तुत किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि आरोपी प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) संगठन के लिए शहरी नेटवर्क तैयार करने, सूचनाओं के आदान-प्रदान और संगठनात्मक गतिविधियों में सहयोग करने में शामिल थे।
इस आधार पर उनके खिलाफ यूएपीए की धाराएं भी लगाई गई थीं। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य भी रखा गया कि इसी मामले में सह-आरोपी धनसिंह गावड़े को पहले ही जमानत दी जा चुकी है। अदालत ने इस पहलू को भी अपने आदेश में महत्व दिया। अदालत ने कहा कि चारों आरोपी काफी समय से न्यायिक हिरासत में हैं और फिलहाल यह संभावना नहीं दिखती कि मुकदमे की सुनवाई निकट भविष्य में पूरी हो जाएगी।
ऐसे में जमानत दिए जाने का आधार बनता है। बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि आरोपियों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वे समाज में स्थापित व्यक्ति हैं। यह भी बताया गया कि गिरधर नाग के पास से केवल एक मोबाइल फोन बरामद हुआ था, जबकि अन्य तीन आरोपियों के कब्जे से कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली। अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए चारों आरोपियों को जमानत देने का आदेश पारित किया। हालांकि, अदालत ने शर्त रखी है कि प्रत्येक आरोपी 20 हजार रुपये का निजी मुचलका और समान राशि का एक जमानतदार प्रस्तुत करेगा। निर्धारित शर्तों का पालन करने पर उन्हें रिहा किया जाएगा।









