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खबरदार! हाथी पर पत्थर फेंका या पटाखा छोड़ा तो सीधे होगी जेल, वन विभाग का सख्त अल्टीमेटम, हो सकती है 3 साल जेल व 1 लाख रुपये जुर्माने का भी प्रावधान

छत्तीसगढ़ वन विभाग ने हाथियों को पत्थर मारने, पटाखे फोड़कर खदेड़ने और प्रताड़ित करने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उल्लंघन पर 3 साल तक की जेल और 1 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है।

July 7, 2026 11:40 AM
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Elephand News। हाथियों के संरक्षण को लेकर वन विभाग ने नया एक्शन प्लान तैयार किया है। वन विभाग ने दो टूक निर्देश दिया है कि अगर हाथियों को सताया, तो अब सीधे FIR होगी। इस आदेश के बाद छत्तीसगढ़ में अब जंगली हाथियों को भगाने या खदेड़ने के नाम पर उन्हें प्रताड़ित करना भारी पड़ सकता है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक, छत्तीसगढ़ ने सभी क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षकों, वनमंडल अधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिया है।

तीन साल की जेल व 1 लाख रुपये जुर्माना

विभाग ने अपने आदेश में कहा है कि हाथियों को पत्थर मारने, पटाखे फोड़ने, तेज आवाज कर डराने या किसी भी प्रकार से प्रताड़ित करने वालों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। इस सजा के तहत तीन साल की जेल या 1 लाख रुपये तक का जुर्माना या फिर दोनों सजाएं एक साथ भी हो सकती है। अगर यही गलती दोबारा की गई तो ये सजा तीन साल से बढ़कर 7 साल भी हो सकती है।

वन मुख्यालय, अटल नगर (नवा रायपुर) से 17 जून 2026 को जारी पत्र में सरगुजा, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग और कांकेर वृत्त के मुख्य वन संरक्षकों सहित उदंती-सीतानदी, अचानकमार टाइगर रिजर्व और गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व के अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं।

वन विभाग के पत्र के अनुसार यह निर्देश स्टीयरिंग कमेटी ऑफ प्रोजेक्ट एलिफेंट के सदस्य मंसूर खान के अभ्यावेदन और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार के 15 जून 2026 के पत्र के संदर्भ में जारी किए गए हैं। पत्र में कहा गया है कि हाथियों को भगाने के नाम पर उन्हें लगातार प्रताड़ित किए जाने से उनके व्यवहार में परिवर्तन आ सकता है, जिससे मानव-हाथी संघर्ष और जन-धन की हानि की घटनाएं बढ़ने की आशंका रहती है।

वन विभाग ने दिए स्पष्ट निर्देश

प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने अपने आदेश में कहा है कि हाथियों को अनावश्यक रूप से परेशान होने से रोकने के लिए समय रहते कार्रवाई की जाए और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं के तहत दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही सभी वनमंडलों को स्थानीय स्तर पर आवश्यक निगरानी और रोकथाम के निर्देश भी दिए गए हैं।

मंसूर खान ने जताई थी चिंता

प्रोजेक्ट एलिफेंट की स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य मंसूर खान ने अपने अभ्यावेदन में बताया था कि छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में हाथियों को खदेड़ने के दौरान उन पर पत्थर फेंके जाते हैं, पटाखे छोड़े जाते हैं और तेज शोर मचाकर उन्हें परेशान किया जाता है।उन्होंने कहा कि ऐसे व्यवहार से हाथी आक्रामक हो सकते हैं। यदि हाथी वापस मुड़ जाए तो वह उसे खदेड़ने वाले पर हमला कर सकता है, जबकि आगे बढ़ने की स्थिति में रास्ते में मिलने वाले निर्दोष लोगों पर भी हमला होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे जनहानि, फसल और संपत्ति को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बढ़ जाती है।

उल्लंघन पर जेल और जुर्माने का प्रावधान

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत जंगली हाथियों को प्रताड़ित करने, नुकसान पहुंचाने या कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक के कारावास, 25 हजार रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किए जाने का प्रावधान है।वन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि मानव और हाथी दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसे मामलों में अब किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

Gitendra Sahu

Gitendra Kumar Sahu has over 10 years of experience in journalism and newsroom operations. He has worked with reputed media organizations such as Swaraj Express and Press Trust of India (PTI), where he spent nearly five years in active journalism. He has also worked with several digital media platforms and possesses extensive experience in both field reporting and newsroom desk operations. After completing his graduation, he chose journalism as his professional career. He specializes in political reporting, current affairs, and crime journalism, with strong expertise in breaking and handling major news stories.

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