धमतरी। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (यूएसटीआर) क्षेत्र के ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मूलभूत समस्याओं के समाधान को लेकर शुक्रवार को धमतरी जिले के नगरी जनपद पंचायत सभाकक्ष में प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के बीच महत्वपूर्ण बैठक चल रही है। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर अबिनाश ने की, जिसमें क्षेत्र के विकास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीण और जनप्रतिनिधि
इस खास बैठक में क्षेत्रीय विधायक अम्बिका मरकाम, जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा, पूर्व विधायक श्रवण मरकाम, लक्ष्मी ध्रुव, जनपद पंचायत अध्यक्ष महेश गोटा, सरपंच संघ नगरी के अध्यक्ष उमेश देव सहित कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।वहीं, जल, जंगल, जमीन संघर्ष समिति की ओर से पूर्व जिला पंचायत सदस्य मनोज साक्षी, जिला पंचायत सदस्य संजय ठाकुर, जनपद सदस्य सिरधन सोम और सरपंच नरेश मांझी के नेतृत्व में अभयारण्य क्षेत्र के अनेक गांवों के ग्रामीण बैठक में शामिल हुए।
सड़क, बिजली, पुल-पुलिया और आवास की उठी मांग
बैठक में ग्रामीणों ने अपने गांवों में सड़क, पुल-पुलिया, बिजली, पेयजल और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। ग्रामीणों का कहना था कि आजादी के कई दशक बाद भी क्षेत्र के अनेक गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि विकास कार्यों को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
वन विभाग पर विकास कार्यों में बाधा का आरोप
ग्रामीणों ने बैठक में आरोप लगाया कि टाइगर रिजर्व क्षेत्र होने का हवाला देकर वन विभाग कई विकास कार्यों की अनुमति नहीं देता, जिससे सड़क, पुल-पुलिया और अन्य आधारभूत परियोजनाएं वर्षों से लंबित हैं। उनका कहना है कि इससे क्षेत्र के लोगों के विकास और मूलभूत अधिकार दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
पहले भी कलेक्ट्रेट का किया था घेराव
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी उदंती-सीतानदी अभयारण्य क्षेत्र के हजारों ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर धमतरी कलेक्ट्रेट पहुंचे थे और प्रदर्शन किया था। उस दौरान कलेक्टर ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनी थीं, लेकिन बारिश के कारण बैठक किसी ठोस निर्णय के बिना समाप्त हो गई थी।
समाधान की उम्मीद में जारी बैठक
शुक्रवार को आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने क्रमवार अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रखीं और उनके शीघ्र निराकरण की मांग की। समाचार लिखे जाने तक बैठक जारी थी और प्रशासनिक अधिकारी विभिन्न मांगों पर ग्रामीणों के साथ चर्चा कर रहे थे।ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार उनकी वर्षों पुरानी समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस निर्णय लिए जाएंगे।










