BEO Order News। यूं तो अपाइंटमेंट लेकर मिलने का नियम अब तक तो मंत्री- मुख्यमंत्री या फिर सचिव स्तर के अफसरों के साथ ही था, लेकिन अब शिक्षकों को अपने BEO से मिलने के लिए पहले अपाइंटमेंट लेना होगा। इस संबंध में छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले के गौरेला विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) ने फरमान जारी किया है।
बीईओ कार्यालय से सभी शिक्षक संवर्ग के लिए नया प्रशासनिक निर्देश जारी किया है। जारी आदेश के अनुसार अब कोई भी शिक्षक शासकीय, अर्द्धशासकीय अथवा व्यक्तिगत कार्य से विद्यालय छोड़कर सीधे विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय नहीं पहुंच सकेगा। इसके लिए पहले कार्यालय प्रमुख से दूरभाष पर संपर्क कर पूर्वानुमति लेना अनिवार्य होगा।
विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय गौरेला की ओर से 2 जुलाई 2026 को जारी आदेश में कहा गया है कि विकासखंड के सभी शिक्षक इस निर्देश का कड़ाई से पालन करें। बिना अनुमति कार्यालय में उपस्थिति स्वीकार नहीं की जाएगी।
पहले फोन, फिर कार्यालय पहुंचें
आदेश के मुताबिक यदि किसी शिक्षक को अत्यंत आवश्यक कार्य से कार्यालय आना हो, तो उसे पहले कार्यालय प्रमुख से दूरभाष के माध्यम से संपर्क करना होगा। अनुमति मिलने के बाद ही कार्यालय में उपस्थित होकर संबंधित कार्य कराया जा सकेगा।इतना ही नहीं, शिक्षकों को कार्यालय प्रमुख से मिलने से पहले अपने कार्य और विषय से संबंधित पूरी जानकारी भी देनी होगी, ताकि निर्धारित समय पर ही मुलाकात सुनिश्चित की जा सके।
कार्यालय प्रमुख का मोबाइल नंबर भी जारी
शिक्षकों की सुविधा के लिए आदेश में कार्यालय प्रमुख का मोबाइल नंबर 7415781710 भी जारी किया गया है। निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि सभी शिक्षक इसी नंबर पर संपर्क कर समय और अनुमति प्राप्त करने के बाद ही कार्यालय पहुंचें।
यह आदेश विकासखंड शिक्षा अधिकारी, गौरेला के हस्ताक्षर से जारी किया गया है। माना जा रहा है कि कार्यालय में अनावश्यक भीड़ कम करने और प्रशासनिक कार्यों को व्यवस्थित एवं समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गई है।

क्यों लागू करना पड़ा नियम
दरअसल होता ये है कि शिक्षकों का इन दिनों जमावड़ा बीईओ-डीईओ कार्यालय में कुछ ज्यादा ही हो रहा है। अलग-अलग मांगों को लेकर आये दिन स्कूल छोड़कर शिक्षक डीईओ-बीईओ कार्यालय पहुंच रहे हैं। इसी बात पर पाबंदी लगाने के लिए शिक्षकों के लिए ये फरमान जारी किया गया है। इस आदेश को लेकर शिक्षकों में तरह-तरह की चर्चाएं है। कई शिक्षकों ने इसे तुगलकी फरमान भी करार दिया है।










