बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में मुआवजे के नाम घोटाले का अजीबो गरीब मामला सामने आया है। प्रकरण सामने आने के बाद अब 12 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि इन लोगों ने फर्जी तरीके से प्रकरण बनाकर मुआवजे की रकम हड़पी है। शिकायत के बाद जांच के दौरान सामने आया कि छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सर्पदंश से मौत के नाम पर सरकारी सहायता लेने के मामलों में बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है।
जांच पूरी होने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए जिले के अलग-अलग थानों में कुल 12 प्रकरण दर्ज कराए हैं। अब इन मामलों की जांच पुलिस करेगी और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई मामलों में बीमारी या अन्य सामान्य कारणों से हुई मौत को सर्पदंश बताकर शासन की सहायता राशि लेने की कोशिश की गई। इस तरह के मामलों में कथित रूप से बिचौलियों की भी भूमिका सामने आई है, जो फर्जी दस्तावेज तैयार कर मुआवजा दिलाने का दावा करते थे।
कहां-कहां दर्ज हुए मामले
जिला प्रशासन द्वारा दर्ज कराए गए मामलों में सबसे अधिक पांच प्रकरण सरकंडा थाना क्षेत्र में साहुमने आए हैं। इसके अलावा कोतवाली थाना में एक, सिविल लाइन थाना में तीन और कोनी थाना क्षेत्र में भी तीन मामले दर्ज किए गए हैं। सभी मामलों में पुलिस अब जांच कर रही है।
विधानसभा में उठे सवाल के बाद खुलासा
आपको याद होगा, प्रदेश में सर्पदंश से मौत के मामलों की संख्या को लेकर विधानसभा में सवाल उठाए गए थे। इसके बाद बिलासपुर जिले में विशेष जांच कराई गई, जिसमें कई संदिग्ध मामले सामने आए। जांच में यह भी पाया गया कि कुछ मामलों में दलालों के जरिए फर्जी केस तैयार कराए गए थे।
प्रशासन ने दी सख्त चेतावनी
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल पात्र लोगों तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। यदि कोई व्यक्ति गलत जानकारी देकर या तथ्यों को छिपाकर आर्थिक सहायता लेने की कोशिश करता है, तो इसे गंभीर अनियमितता माना जाएगा। ऐसे मामलों में जांच के बाद संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।










