रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का सबसे अहम दिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बहस के नाम रहा। विपक्ष की तरफ से लाया गया अविश्वास प्रस्ताव करीब 15 घंटे तक चली मैराथन चर्चा के बाद ध्वनिमत से अस्वीकृत हो गया। इसके साथ ही विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। पूरे दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे हमले, जवाबी आरोप और कई बार हंगामे का दौर चलता रहा।
दोपहर 12 बजे से शुरू हुई अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा रात के करीब 3 बजे तक चलती रही। इस दौरान सदन में सभी विधायक बैठे रहे। अविश्वासव प्रस्ताव के बाद ऐसी उम्मीद जतायी जा रही थी कि विपक्ष वोटिंग की मांग कर सकता है, लेकिन ऐसी नौबत नहीं आयी। विधानसभा अध्यक्ष ने ध्वनिमत से संख्या गणना की, जिसके आधार पर अविश्वास प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया गया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सदन में तीखे तेवर
अविश्वास प्रस्ताव पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांग्रेस के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष मजबूरी में अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया, लेकिन इस बहस ने सरकार को अपने ढाई साल के कार्यों को जनता के सामने रखने का अवसर दिया।मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस जनता के विश्वास पर खरी नहीं उतर सकी और अपने शासनकाल में लोगों के साथ विश्वासघात किया। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के अनुरूप महिलाओं, किसानों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए लगातार योजनाएं लागू कर रही है।
“25 साल तक कांग्रेस सत्ता में नहीं आएगी”
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश की जनता अब कांग्रेस की राजनीति को समझ चुकी है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा 70 से अधिक सीटें जीतकर सरकार बनाएगी और कांग्रेस अगले 25 वर्षों तक सत्ता में नहीं लौट पाएगी।उन्होंने कांग्रेस पर आदिवासियों को केवल वोट बैंक मानने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक आदिवासी बेटे का मुख्यमंत्री बनना कांग्रेस को स्वीकार नहीं हो रहा है।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का भी किया जिक्र
सीएम साय ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 का उल्लेख करते हुए विपक्षी विधायकों से कहा कि यदि उन्हें कहीं कोई शिकायत दिखाई देती है तो वे भी हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के नवाचार और पारदर्शी कामकाज से कांग्रेस बौखलाई हुई है।
बलौदाबाजार आगजनी और हिडमा के नारों पर गरमाया सदन
बहस के दौरान बलौदाबाजार आगजनी कांड को लेकर भी सदन का माहौल गर्म रहा। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के बयान के बाद कांग्रेस ने सरकार को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया, जबकि सत्ता पक्ष ने कांग्रेस नेताओं पर लोगों को उकसाने का आरोप लगाया।इसी बीच हिडमा के समर्थन में लगे नारों का मुद्दा भी सदन में उठा, जिस पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। बढ़ते हंगामे के कारण विधानसभा की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित भी करनी पड़ी।
सत्ता पक्ष ने कांग्रेस के आरोपों को बताया बेबुनियाद
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल को घोटालों और झूठ की राजनीति वाला शासन बताया। वहीं वरिष्ठ भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस द्वारा लगाए गए 136 आरोपों में से 56 आरोप दोहराए गए, जिससे स्पष्ट है कि विपक्ष के पास सरकार के खिलाफ कोई मजबूत आधार नहीं है।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने भी कहा कि प्रदेश की जनता का भरोसा साय सरकार के साथ है और अविश्वास प्रस्ताव पूरी तरह राजनीतिक औपचारिकता साबित हुआ।
ध्वनिमत से खारिज हुआ अविश्वास प्रस्ताव
करीब 15 घंटे तक चली बहस के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव को ध्वनिमत के लिए रखा, जिसे सदन ने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
हालांकि विपक्ष ने सरकार पर कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक व्यवस्था और विभिन्न मुद्दों पर सवाल उठाए, जबकि सत्ता पक्ष ने सभी आरोपों का जवाब देते हुए सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। राजनीतिक दृष्टि से यह बहस आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा और कांग्रेस के बीच बड़े सियासी संदेश के रूप में देखी जा रही है।










