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Chhattisgarh High Court: 27 प्रधान पाठकों को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, पदोन्नति-वरिष्ठता पर रिट अपील खारिज

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 27 प्रधान पाठकों की पदोन्नति और वरिष्ठता लाभ से जुड़ी रिट अपील खारिज कर दी। डिवीजन बेंच ने एकलपीठ के फैसले को सही ठहराते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।

July 18, 2026 5:27 AM
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Chhattisgarh High Court Headmaster Promotion Case। Chhattisgarh High Court Bilaspur verdict on headmaster promotion and seniority case। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में पदोन्नति और वरिष्ठता से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सेवा में लाभ की मांग कर रहे 27 प्रधान पाठकों को हाई कोर्ट से झटका लगा है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने उनकी रिट अपील खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस विवाद पर पहले ही न्यायालय का कानूनी दृष्टिकोण तय हो चुका है। ऐसे में एकलपीठ के आदेश में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने अमित कुमार दुबे एवं अन्य द्वारा दायर अपील को निरस्त करते हुए 24 नवंबर 2025 को पारित एकलपीठ के फैसले को बरकरार रखा।

एकलपीठ के फैसले को दी थी चुनौती

दरअसल सिंगल बेंच के फैसले से असंतुष्ट होकर प्रधान प्राठकों ने हाईकोर्ट की डबल बेंच में चुनौती दी थी। मामला रायपुर और धमतरी जिले के विभिन्न शासकीय प्राथमिक विद्यालयों में पदस्थ 27 प्रधान पाठकों से जुड़ा है। उन्होंने पदोन्नति और वरिष्ठता संबंधी लाभ की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। हालांकि, एकलपीठ ने उनकी याचिकाएं खारिज कर दी थीं, जिसके बाद उन्होंने डिवीजन बेंच में रिट अपील दाखिल की।

60 दिन की देरी माफ, फिर मेरिट पर हुई सुनवाई

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अपील दाखिल करने में हुई 60 दिनों की देरी को माफ कर दिया। इसके बाद मामले के गुण-दोष पर विस्तृत सुनवाई की गई।याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रमोद रामटेके ने पक्ष रखा, जबकि राज्य शासन की ओर से उप महाधिवक्ता प्रसून कुमार भादुड़ी ने अदालत में अपना पक्ष रखा।

पुराने फैसले के आधार पर खारिज हुई अपील

सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने स्वीकार किया कि यह मामला पहले से तय हो चुके ‘पुष्पलता मानिकपुरी एवं अन्य बनाम राज्य शासन’ प्रकरण से मिलता-जुलता है।खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि अपीलकर्ता यह साबित नहीं कर सके कि उनका मामला ‘सोना साहू बनाम राज्य शासन’ प्रकरण जैसी परिस्थितियों वाला है। इसलिए 10 मार्च 2017 के शासन के परिपत्र के आधार पर किए गए उनके दावे को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

अदालत ने कहा कि एकलपीठ ने सभी तथ्यों, दस्तावेजों और कानूनी प्रावधानों का परीक्षण करने के बाद याचिकाएं खारिज की थीं। उस आदेश में कोई ऐसी कानूनी त्रुटि नहीं है, जिसमें डिवीजन बेंच को हस्तक्षेप करने की आवश्यकता हो।इसी आधार पर हाई कोर्ट ने सभी रिट अपीलों को खारिज कर दिया।

क्या होगा फैसले का असर?

इस फैसले का असर उन अन्य मामलों पर भी पड़ सकता है, जिनमें सरकारी शिक्षकों या प्रधान पाठकों ने पदोन्नति और वरिष्ठता लाभ को लेकर समान दावे किए हैं। हाई कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि पहले से तय न्यायिक सिद्धांतों से अलग राहत तभी संभव होगी, जब मामले के तथ्य अलग और पर्याप्त रूप से भिन्न हों।

Gitendra Sahu

Gitendra Kumar Sahu has over 10 years of experience in journalism and newsroom operations. He has worked with reputed media organizations such as Swaraj Express and Press Trust of India (PTI), where he spent nearly five years in active journalism. He has also worked with several digital media platforms and possesses extensive experience in both field reporting and newsroom desk operations. After completing his graduation, he chose journalism as his professional career. He specializes in political reporting, current affairs, and crime journalism, with strong expertise in breaking and handling major news stories.

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