Chhattisgarh News। छत्तीसगढ़ में इन दिनों कुत्तों का आंतक काफी बढ़ गया है। डॉग बाइट के हर दिन दर्जनों केस अलग-अलग जिलों में आ रहे हैं। कुछ दिन पहले तो एक बच्चे की भी जान कुत्ते ने ले ली थी। पिछले दिनों ही राज्य सरकार को स्कूली बच्चों की कुत्तों से सुरक्षा को लेकर SOP भी जारी करना पड़ा था। इसी कड़ी में कांकेर जिले के बागोड़ गांव में पालतू और आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक से परेशान ग्रामीणों ने अनोखा लेकिन सख्त फैसला लिया है।
ग्रामसभा में सर्वसम्मति से तय किया गया है कि यदि किसी का पालतू कुत्ता किसी राहगीर, बच्चे या ग्रामीण को काटता है, तो उसके मालिक से 5,000 रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा। गांव में लगातार बढ़ रही कुत्तों के काटने की घटनाओं के बाद यह निर्णय लिया गया है। दरअसल कई बार पालतू कुत्तों को भी मालिक की तरफ से खुले में छोड़ दिया जाता है। घर में कैद रहने की वजह से वो कुत्ते खुले में काफी आक्रामक हो जाते हैं। वैसे कुत्ते ज्यादा काटने की घटना किया करते हैं।
पिछले कुछ महीनों में कई लोग बने शिकार
ग्रामीणों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में गांव में 4 से 5 लोगों को कुत्तों ने काटा है। सबसे हालिया घटना 10 जुलाई की है, जब एक पालतू कुत्ते ने वार्ड पंच की 8 वर्षीय बेटी को काट लिया। इसके अगले ही दिन उसी कुत्ते ने एक महिला पर भी हमला कर दिया।वहीं करीब 15 दिन पहले एक अन्य कुत्ते ने एक बुजुर्ग और 10 वर्षीय बच्चे को घायल कर दिया था। जांच में पता चला कि वह कुत्ता रेबीज संक्रमित था, जिसके बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल बन गया।
ग्रामसभा में बने तीन सख्त नियम
लगातार हो रही घटनाओं को देखते हुए ग्रामसभा की बैठक बुलाई गई, जिसमें सर्वसम्मति से तीन महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए—
- सभी पशुपालक अपने पालतू कुत्तों को घर में बांधकर रखें।
- सभी कुत्तों का समय-समय पर एंटी-रेबीज टीकाकरण कराना अनिवार्य होगा।
- यदि किसी का पालतू कुत्ता किसी व्यक्ति को काटता है तो उसके मालिक पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
पशु चिकित्सा विभाग ने चलाया टीकाकरण अभियान
ग्रामसभा के फैसले के बाद पशु चिकित्सा विभाग की टीम गांव पहुंची और 7 से 9 कुत्तों को एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई। आपको बता दें कि रेबीज एक बेहद खतरनाक वायरस जनित बीमारी है। संक्रमित कुत्ते के काटने से इंसानों और अन्य जानवरों में भी संक्रमण फैल सकता है। उन्होंने कहा कि समय पर टीकाकरण और तत्काल इलाज ही इसका सबसे प्रभावी बचाव है। ग्रामीणों का यह निर्णय जागरूकता और जनसुरक्षा की दिशा में सराहनीय कदम है।
ग्रामीण बोले- अब पशुपालकों की बढ़ेगी जिम्मेदारी
गांव के लोगों का कहना है कि अब तक कई लोग कुत्तों का शिकार हो चुके हैं। नए नियम लागू होने से पशुपालक अपने कुत्तों की जिम्मेदारी गंभीरता से निभाएंगे और ऐसी घटनाओं में कमी आएगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव में नियमित एंटी-रेबीज टीकाकरण शिविर लगाने की भी मांग की है, ताकि सभी पालतू और आवारा कुत्तों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित किया जा सके।



















