जगदलपुर। जिस युवक को रेप केस में जेल भेजा, वही अगर पति बन जाये तो…..सुनकर हैरानी होगी, लेकिन ये हकीकत है। शुक्रवार को जगदलपुर जेल एक अनूठी शादी का गवाह बने। जहां बाराती वकील थे, जेल के कर्मचारी थे, तो वहीं, घराती कैदी व घर के कुछ परिजन थे। आमतौर पर केंद्रीय जेल की पहचान कड़ी सुरक्षा, बंद दरवाजों और कैदियों की निगरानी से होती है, लेकिन शुक्रवार को जगदलपुर केंद्रीय जेल का नजारा बिल्कुल अलग था।
जेल परिसर कुछ घंटों के लिए विवाह मंडप में बदल गया। वैदिक मंत्रों की गूंज, अग्नि के फेरे और शहनाई की मधुर धुन के बीच एक ऐसा विवाह संपन्न हुआ, जिसने पूरे बस्तर में चर्चा छेड़ दी।यह शादी इसलिए खास रही क्योंकि दूल्हा दुष्कर्म के एक मामले में विचाराधीन बंदी है और दुल्हन वही युवती है, जिसकी शिकायत के बाद वह जेल पहुंचा था।
सात महीने पहले दर्ज हुई थी FIR, अब दोनों बने जीवनसाथी
दरअसल परपा थाना क्षेत्र के राजूर गांव निवासी सुरेश सेठिया 16 जनवरी 2026 से केंद्रीय जेल जगदलपुर में बंद है। उसके खिलाफ युवती ने दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। केस न्यायालय में विचाराधीन है।सुनवाई के दौरान अचानक कहानी ने नया मोड़ लिया। युवती ने विशेष सत्र न्यायालय (अट्रोसिटी) में आवेदन देकर कहा कि वह और सुरेश लंबे समय से प्रेम संबंध में थे। परिवारों ने अंतरजातीय विवाह का विरोध किया, जिसके चलते परिस्थितियां बिगड़ गईं और मामला थाने तक पहुंच गया। अब दोनों अपनी इच्छा से विवाह करना चाहते हैं।
कोर्ट ने कहा- दोनों बालिग हैं, सहमति है तो शादी हो सकती है
न्यायालय ने दोनों पक्षों की बात सुनी। यह भी देखा कि युवक और युवती दोनों बालिग हैं तथा विवाह के लिए अपनी स्वतंत्र सहमति दे रहे हैं। इसके बाद विशेष अनुमति जारी करते हुए केंद्रीय जेल परिसर में विवाह कराने का आदेश दिया गया।
जेल प्रशासन ने मंडप सजाया, सुरक्षा के बीच हुई शादी
शुक्रवार को जेल प्रशासन ने न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए विवाह की पूरी व्यवस्था कराई। सीमित संख्या में दोनों परिवारों के सदस्य, अधिवक्ता और जेल अधिकारी मौजूद रहे। कड़ी सुरक्षा के बीच वैदिक परंपरा के अनुसार वरमाला, हवन और सात फेरे की सभी रस्में पूरी हुईं।कुछ देर के लिए जेल की ऊंची दीवारों के भीतर कैदियों की गिनती नहीं, बल्कि विवाह के मंगल गीत सुनाई दिए।
एक ही पेट्रोल पंप से शुरू हुई थी प्रेम कहानी
जानकारी के अनुसार, सुरेश और युवती एक ही पेट्रोल पंप पर काम करते थे। वहीं दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और प्रेम संबंध शुरू हुआ। लेकिन अलग-अलग जाति होने के कारण परिवारों ने इस रिश्ते को स्वीकार नहीं किया।विवाद बढ़ता गया और मामला पुलिस तक पहुंच गया। शिकायत दर्ज होने के बाद सुरेश जेल चला गया, लेकिन दोनों के बीच संवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। युवती लगातार जेल में मुलाकात करती रही और आखिरकार दोनों ने विवाह का फैसला लिया।
जेल के भीतर रिश्ते की नई शुरुआत
जेल अधिकारियों के मुताबिक, न्यायालय का आदेश मिलने के बाद सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया। आवश्यक दस्तावेजों की जांच के बाद विवाह संपन्न कराया गया। यह पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर पूरी की गई।
मामला अभी भी विचाराधीन
हालांकि शादी हो जाने के बावजूद सुरेश के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म का मामला समाप्त नहीं हुआ है। केस अभी न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम फैसला अदालत ही सुनाएगी। विवाह का इस मुकदमे के कानूनी परिणाम पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय करेगी।



















