इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय पेंशन। महंगाई भत्ता व पेंशन की मांग छत्तीसगढ़ में जोर पकड़ रही है। कर्मचारी व शिक्षक तो इन मांगों को लेकर लगातार अलग-अलग स्तर अपनी आवाज बुलंद कर ही रहे हैं, अब रिटायर्ड प्रोफेसर कर्मचारी भी इन मांगों को लेकर धरने पर बैठ गये हैं। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसरों, वैज्ञानिकों और कर्मचारियों ने लंबित पेंशन प्रकरणों को लेकर आंदोलन का रास्ता चुन लिया है।
पेंशन संबंधी मामलों के समय पर निराकरण नहीं होने से नाराज सेवानिवृत्त कर्मचारी सोमवार से विश्वविद्यालय परिसर में क्रमिक एवं शांतिपूर्ण धरना शुरू करेंगे।सेवानिवृत्त कर्मचारियों का कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखने और मांग उठाने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
40 सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन लंबित होने का दावा
सेवानिवृत्त कर्मचारियों के संगठन का दावा है कि अप्रैल 2024 से रिटायर हुए करीब 38 से 40 प्रोफेसरों और वैज्ञानिकों के पेंशन प्रकरण अब तक लंबित हैं। समय पर पेंशन स्वीकृत नहीं होने के कारण सेवानिवृत्त कर्मचारी अपनी नियमित आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं।
धरने में प्रोफेसर, वैज्ञानिक और कर्मचारी होंगे शामिल
विश्वविद्यालय परिसर में शुरू होने वाले इस क्रमिक धरने में सेवानिवृत्त प्रोफेसर, वैज्ञानिक और अन्य कर्मचारी भी शामिल होंगे। आंदोलन के जरिए प्रशासन का ध्यान लंबित मामलों की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया जाएगा।
महंगाई राहत एरियर का भुगतान भी प्रमुख मांग
पेंशन प्रकरणों के अलावा संगठन लंबित महंगाई राहत (Dearness Relief) एरियर के भुगतान की मांग भी उठाएगा। सेवानिवृत्त कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें समय पर पेंशन और बकाया राशि मिलना उनका अधिकार है, लेकिन लंबे समय से इसमें अनावश्यक विलंब हो रहा है।
जल्द समाधान की मांग
धरने पर बैठे कर्मचारी सभी लंबित पेंशन प्रकरणों का शीघ्र निराकरण, बकाया महंगाई राहत एरियर का भुगतान और भविष्य में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करने की मांग करेंगे।



















